दुर्गा मंदिर संगीत समारोह: 'माई मटियो के होखेली त माई होखे ली...', अरविंद अकेला सहित 21 कलाकारों ने की पेशकश
दुर्गा मंदिर में महोत्सव के छठवें दिन कुल 21 कलाकारों ने मनोहारी प्रस्तुति दी। देर रात तक भक्तों का मंदिर परिसर में माैजूद था। भक्ति गीतों पर लोग झूमते दिखे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दुर्गाकुण्ड स्थित मां कूष्माण्डा दुर्गा मन्दिर के प्रांगण में लोक संगीत की भक्ति रसधारा पूरी रात प्रवाहमान होती रही। कार्यक्रम में विख्यात गायक अरविंद अकेला कल्लू, आर्यन बाबू, शैलबाला सरकार, अर्चना तिवारी, संजीत सागर, ज्योति गुप्ता, सुमन अग्रहरि ने देवी गीत, पचरा, झूला जैसे भजनों से मंदिर को गुंजायमान रखा।
छठी निशा में लोक गायक अरविंद अकेला कल्लू ने मां कूष्माण्डा के चरणों में सुरों की गंगा बहाई। उन्होंने 'माई मटियो के होखेली त माई होखे ली..., 'जहिया माई पाव अंगना में धईली...', 'निमिया के डाढ़ मईया...मनभावक गीतों से भक्तों को खूब झूमाया। बिहार से आये मशहूर कलाकार आर्यन बाबू ने 'माई माई के लार..., 'नजर ना लगे..., 'ए राजा जी खजनवा दे द...आदि गीतों की रसधार बहाई।
भक्तों ने लगाए जयकारे
गीतांजलि मौर्य ने 'लाल लाल जोड़ा पहना', 'अईली सातों बहिनिया हो' सुनाया। अर्चना तिवारी ने 'बनल रहे नैहरवा', 'तेरे चरणों मे मेरा ठिकाना', ज्योति गुप्ता ने 'ए मोरी मईया दुर्गा मईया', 'हमरे अंगनवा हउवे', संजीत सागर ने मतलब के बाद ई जमाना आदि ने भजनों से सबको झुमाते रहे।
सुमन अग्रहरि ने 'तेरा दरबार हमने सजाया है', 'झुलेली झुलनिया मैय्या' सुनाया। अंशिका सिंह ने 'तुमने लाखो की किस्मत सवारी', 'तुम न सुनोगी तो कौन सुनेगा' से भक्तों को झूमाया। इसके अलावा रविन्द्र सिंह ज्योति, सरोज वर्मा, प्रियंका सिंह, गोपाल त्रिपाठी, वैष्णवी राय ने प्रस्तुतियां दी।
महारानी हार से सजा मां कूष्माण्डा का दिव्य स्वरूप
महोत्सव के छठें दिन सोमवार को स्वर्ण महारानी हार से मां का दिव्य स्वरूप सजाया गया। सायंकाल पट बंद होने के उपरांत मां को पंचामृत स्नान कराया गया, उसके बाद सुर्ख नीली बनारसी साड़ी और मारवाड़ी चुनरी ओढ़ाई गई। इसके बाद कोलकाता से मंगाए गए गुलाब, कमल, रजनीगन्धा, सफेद कठुआ और मुरली की माला से मां को सुसज्जित किया गया।
इसके बाद स्वर्ण महारानी हार, कमल पुष्प स्वर्णाहार और अड़हुल के स्वर्ण फूलों से मां का शृंगार किया गया। शृंगार पं. कौशलपति द्विवेदी एवं आरती पं. किशन दुबे ने उतारी। कलाकारों का सम्मान महंत राजनाथ दुबे एवं विश्वजीत दुबे ने किया। संचालन सोनू झा ने किया। इस मौके पर पं. संजय दुबे, विकास दुबे, प्रकाश दुबे सहित बड़ी संख्या में महंत परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।