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बलिया के डॉ. अनिल भी हैं कोरोना की दवा बनाने वालों में, बीएचयू को किया गौरवान्वित, फ्रांस-अमेरिका में रहे वैज्ञानिक

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी/बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 10 May 2021 04:17 PM IST

सार

- अंतिम बार वर्ष 2018 में आए थे गांव, इस उपलब्धि से गदगद हैं जनपद वासी, बधाइयों का लगा तांता।
- डॉ अनिल कुमार मिश्रा 22 छात्रों को करा चुके हैं पीएचडी, उनके 270 से अधिक शोध पत्र हो चुके हैं प्रकाशित।
- बतौर वैज्ञानिक फ्रांस और अमेरिका में भी रह चुके हैं तीन-तीन वर्ष तक।
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अनिल कुमार मिश्र
अनिल कुमार मिश्र - फोटो : social media
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विस्तार

कोरोना के इलाज में गेम चेंजर दवा टू डीजी बनाने वालों में शामिल जिले के लाल डॉ. अनिल कुमार मिश्रा सिकंदरपुर के मिश्र चक निवासी हैं। उनकी उपलब्धि से जिले में हर्ष का माहौल है। इसके पूर्व सिकंदरपुर क्षेत्र के लीलकर गांव निवासी डॉ संजय राय ने कोवैक्सीन के मामले में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
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सिकंदरपुर से दो किमी दूर पर स्थित छोटे से गांव मिश्रचक निवासी डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई जूनियर हाई स्कूल सिकंदरपुर में की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे गोरखपुर चले गए। 1984 में उन्होंने एमएससी(रसायन विज्ञान) की पढ़ाई गोरखपुर विश्वविद्यालय से की। 1988 में उन्होंने बीएचयू से पीएचडी की। इस बाद वह तीन साल तक पोस्ट डॉक्टोरल फेलो के साथ प्रोफेसर रॉजर गुइलार्ड के साथ बर्गोग्ने विश्वविद्यालय, डीजन, फ्रांस में और प्रोफेसर सीएफ मेयर्स, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और डेविस, यूएसए के साथ रहे। वह 1994- 1997 तक इनसेरम, नैनटेस, फ्रांस में प्रोफेसर चटल के साथ अनुसंधान वैज्ञानिक रहे।


इसके अलावा वह मैक्स-प्लैंक इंस्टीट्यूट, जर्मनी में हेड और अतिरिक्त निदेशक इनमास और विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे। 1997 से वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में वे इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज, डीआरडीओ, में शामिल हुए थे। उनके मार्ग दर्शन में 22 छात्रों ने पीएचडी की। उनके 270 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ मिश्रा को कई पुरस्कार मिले हैं। उनमें 1999 में भारत के प्रधान मंत्री द्वारा डीआरडीओ के यंग साइंटिस्ट का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी शामिल है। उनकी शोध रुचि रेडियोमेकैमिस्ट्री, मेटल केमिस्ट्री, रेडियो फार्मास्युटिकल साइंस और विशिष्ट आणविक इमेजिंग जांच का विकास रही है।
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