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डोमराजा परिवार ने की घोषणा, मंदिर तोड़ने वालों को नहीं देंगे चिता के लिए आग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 14 May 2018 02:43 PM IST
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मंदिर बचाओ आंदोलनम की बैठक
- फोटो : self
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बनारस में श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर योजना को लेकर चली आ रही बहस ने नया मोड़ ले लिया है। अब मंदिर बचाओ आंदोलनम की बैठक के दौरान डोमराजा के पुत्र विश्वनाथ चौधरी ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि मंदिर तोड़ने वालों को चिता के लिए आग नहीं देंगे।
मंदिर को तोड़कर और उनका स्थान बदलने की कोशिश करने वालों को काशी के मणिकर्णिका घाट पर चिता के लिए अग्नि देना संभव नहीं है। मीरघाट पर बरिया चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक के मुख्य अतिथि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती थे।
उधर, योजना का ब्लूप्रिंट अब तक सार्वजनिक न होने और इसे लेकर जनता में भ्रम और नाराजगी की स्थिति पर आरएसएस ने गंभीर रुख अख्तियार किया है।
वस्तुस्थिति की जानकारी के साथ ही मंदिर परिक्षेत्र के लोगों की समस्या और नाराजगी का कारण जानने और आम जनता की राय के अनुरूप समाधान तलाशने के लिए संघ ने अपने अनुषांगिक संगठनों को जिम्मेदारी दी है।
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मंदिर को तोड़कर और उनका स्थान बदलने की कोशिश करने वालों को काशी के मणिकर्णिका घाट पर चिता के लिए अग्नि देना संभव नहीं है। मीरघाट पर बरिया चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक के मुख्य अतिथि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती थे।
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उधर, योजना का ब्लूप्रिंट अब तक सार्वजनिक न होने और इसे लेकर जनता में भ्रम और नाराजगी की स्थिति पर आरएसएस ने गंभीर रुख अख्तियार किया है।
वस्तुस्थिति की जानकारी के साथ ही मंदिर परिक्षेत्र के लोगों की समस्या और नाराजगी का कारण जानने और आम जनता की राय के अनुरूप समाधान तलाशने के लिए संघ ने अपने अनुषांगिक संगठनों को जिम्मेदारी दी है।
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पीएम को भेजी जाएगी रिपोर्ट
काशी विश्वनाथ मंदिर
संगठन मंदिर परिक्षेत्र में सर्वे कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। संघ सूत्रों की मानें तो यह रिपोर्ट पीएम मोदी को भेजी जाएगी। विश्वनाथ कॉरिडोर की प्रस्तावित योजना के लिए भवनों की खरीद और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद से मंदिर परिक्षेत्र के बाशिंदों में भ्रम और नाराजगी की स्थिति है।
योजना का मसौदा सार्वजनिक न होने से हर कोई संशय में है। साथ ही, विरोध के स्वर लगातार मुखर हो रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरने के लिए इसे मुद्दा बना लिया है।
वहीं, भाजपा के मंत्री और विधायक जनता के बीच जाने से परहेज कर रहे हैं। उनकी आशंकाओं का समाधान करने के बजाए चुप्पी साधे हुए हैं। इससे विरोधियों को हवा बनाने का मौका मिल रहा है और मंदिर प्रशासन की सफाई भी जनता का संशय खत्म नहीं कर पा रही है।
इन स्थितियों से संघ नाराज है। संघ सूत्रों की मानें तो सर्वे रिपोर्ट के साथ ही मंत्रियों, विधायकों की कार्यप्रणाली के बारे में भी पीएमओ को अवगत कराया जाएगा।
योजना का मसौदा सार्वजनिक न होने से हर कोई संशय में है। साथ ही, विरोध के स्वर लगातार मुखर हो रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरने के लिए इसे मुद्दा बना लिया है।
वहीं, भाजपा के मंत्री और विधायक जनता के बीच जाने से परहेज कर रहे हैं। उनकी आशंकाओं का समाधान करने के बजाए चुप्पी साधे हुए हैं। इससे विरोधियों को हवा बनाने का मौका मिल रहा है और मंदिर प्रशासन की सफाई भी जनता का संशय खत्म नहीं कर पा रही है।
इन स्थितियों से संघ नाराज है। संघ सूत्रों की मानें तो सर्वे रिपोर्ट के साथ ही मंत्रियों, विधायकों की कार्यप्रणाली के बारे में भी पीएमओ को अवगत कराया जाएगा।