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Varanasi News: उम्र के साथ महिलाओं में बढ़ रही दांतों की बीमारियां, चिकित्सकों ने किया मंथन
Sun, 21 Apr 2024 09:16 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sun, 21 Apr 2024 09:16 PM IST
सार
Varanasi News: शरीर में हार्मोन एस्ट्रोजन का स्तर कम होने की वजह से वह जबड़े में आस्टियोपोरेसिस यानी हड्डियां कमजोर होने की शिकार हो जाती हैं। ऐसी महिलाओं में प्रत्यारोपण के माध्यम से इस बीमारी को दूर किया जा सकता है।
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कार्यशाला में मौजूद दंत चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीएचयू के दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय में चल रही कार्यशाला के तीसरे दिन दांतों से जुड़ी बीमारियों के कारण, उसके इलाज की विधियों पर दंत चिकित्सकों ने मंथन किया। इसमें नई तकनीक से दंत प्रत्यारोपण, जबड़े की हड्डिया कमजोर होने के बाद इलाज आदि के बारे में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया।
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बीएचयू दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के प्रो. राजेश बंसल का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ ही महिलाओं में दांतों से जुड़ी बीमारियां बढ़ने लगती है। आमतौर पर 45 साल से अधिक उम्र के बाद महिलाओं में मासिक धर्म बंद हो जाता है, इसे चिकित्सकीय भाषा में (पोस्टमेनोपॉज़ल) कहते हैं।
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डॉ. अमित शर्मा ने यह बताया कि प्रत्यारोपण का सहारा लेकर फिक्स दांत उन रोगियों को कैसे दिए जा सकते हैं जिनकी हड्डी गंभीर रूप से घिस गई है।
दो दिन में तीन सर्जरी, 11 इंप्लांट लगे
प्रोफेसर राजेश बंसल का कहना है कि कार्यशाला में अब तक तीन मरीजों की सर्जरी के साथ ही कुल 11 इंप्लांट लगाए गए हैं। कार्यशाला में प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि एडेंटुलिज्म एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। इसमें जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दांतों की संख्या कम हो जाती है, दंत क्षरण भी होता है।
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नई तकनीक से प्रत्यारोपण के साथ एक निकला हुए दांत का प्रतिस्थापन कर इसको दूर किया जाता है। इसमें जबड़े की हड्डी में पतला पेच डाला जाता है और इम्प्लांट के ऊपर क्राउन जुड़ा होता है। यह प्राकृतिक दांत की तरह काम करता है। यह अपेक्षाकृत नया उपकरण है और पुराने ब्रिज आंशिक डेंचर की तुलना में बहुत बेहतर भी है।