BHU: 18 साल के युवक को मिली नई जिंदगी, डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर बदला वॉल्व; जन्मजात बीमारी का निदान
बीएचयू अस्पताल में डाॅक्टरों ने युवक की सफल सर्जरी की है। उसे जन्मजात बीमारी थी। वीएसडी हृदय की जन्मजात विकृति है। इस गंभीर बीमारी को डाॅक्टरों ने निराकरण कर दिया।
विस्तार
BHU Hospital: बीएचयू अस्पताल में शुक्रवार को डॉक्टरों की टीम ने एक 18 साल के युवक की जटिल सर्जरी कर एरोटिक वाॅल्व को कृत्रिम वाॅल्व से बदला। युवक जन्म से ही हृदयरोग से ग्रसित था। बचपन से सांस फूलने, सीने में दर्द और घबराहट की समस्या थी। जांच में पता चला कि उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) है।
कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया के अनुसार युवक के खराब एरोटिक वाॅल्व को कृत्रिम वाॅल्व से बदला गया है और वेंट्रिकुलर सेप्टल को सिंथेटिक पैच से बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि वीएसडी हृदय की जन्मजात विकृति है। इसमें हृदय में छेद होता है।
यह छेद निचले हृदय कक्षों (दाएं और बाएं वेंट्रिकल) के बीच होता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो कई रोगी समय के साथ उच्च रक्तचाप के शिकार हो जाते हैं। इस कारण रक्त का बहाव उलट जाता है और मरीज ऑपरेशन योग्य नहीं रहता है। इसको आइसेनमेंगर सिंड्रोम कहा जाता है।
ऑपरेशन करने वाली टीम में प्रो. लखोटिया के साथ डॉ. नरेंद्र नाथ दास, डॉ. अरविंद पांडे, डॉ. संजीव कुमार, दिनेश मैती, बैजनाथ, ओमप्रकाश, विकास आदि शामिल थे। आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने सर्जरी करने वाली टीम को बधाई दी है।
जन्मजात बीमारी है वीएसडी
प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया ने बताया कि वीएसडी यानी वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट जन्मजात बीमारी है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों के अभिभावकों को जल्द चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हृदय रोग विशेषज्ञ से नियमित रूप से परामर्श भी लेना चाहिए।
डॉ. नरेंद्र दास ने जोर देकर कहा कि जिन बच्चों को बार-बार खांसी और सर्दी, निमोनिया, घबराहट, सांस लेने में कठिनाई, धीमी गति से शारीरिक विकास, नीलापन आदि समस्याएं हों, उन्हें बाल रोग विशेषज्ञ या बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेनी चाहिए।