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श्रद्धांजलि: काशी में मिला न आदि है, न अंत...का दर्शन, यहीं बनी ब्रह्मांड के जन्म की थ्योरी; डॉ. जयंत का निधन

Wed, 21 May 2025 05:02 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 21 May 2025 05:02 PM IST
सार

डॉ. जयंत विष्णु नार्लीकर की मृत्यु से विज्ञान जगत को काफी क्षति हुई है। बीएचयू से उनका काफी लगाव था। यही कारण है कि कई प्रोफेसराें ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने भी उनकी मृत्यु पर अपनी शोक संवेदना जाहिर की है।

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doctor Jayant vishnu passed away in pune philosophy of no beginning no end was found in Kashi
डॉ. जयंत विष्णु नार्लीकर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Jayant Vishnu Narlikar Passed Away: डॉ. जयंत विष्णु नार्लीकर को बनारस ने ही स्टीफन हॉकिंग की बिग-बैंग थ्योरी को नकारने की हिम्मत दी। 2014 में बीएचयू में बिग-बैंग थ्योरी को उन्होंने काल्पनिक बताया। काशी में मिले भारतीय धर्म दर्शन और वेद विज्ञान के ज्ञान ब्रह्मांड का आदि है न अंत है के दर्शन को उन्होंने अपने हायल-नार्लीकर थ्योरी में वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया। मंगलवार को उनका 87 साल की उम्र में पुणे में निधन हो गया।

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1957 में बीएचयू से बीएससी कर चुके डॉ. जयंत विष्णु नार्लीकर ने बीएचयू में अल्बर्ट आइंसटीन के सापेक्षता सिद्धांत का अध्ययन किया। वहां से कैंब्रिज पहुंचकर फ्रेड हॉयल के साथ स्थिर अवस्था सिद्धांत का प्रतिपादन किया। 
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ब्रह्मांड की उत्पत्ति के एकमात्र दूसरे सिद्धांत हायल-नार्लीकर थ्योरी की नींव भी काशी में ही पड़ी। बनारस में बीता 20 साल, उनके पूरे वैज्ञानिक जीवन का एक थीसिस था। प्रो. राजेश्वर आचार्य ने बताया कि पिता प्रो. विष्णु वासुदेव नार्लीकर बीएचयू में गणित विभाग के अध्यक्ष थे। माता सुमति नार्लीकर संस्कृत की विशेषज्ञ थीं। दुनिया को हायल-नार्लीकर थ्योरी देने के बाद जब नार्लीकर बीएचयू आए तो उन्हें खूब समर्थन मिला। 

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बीएचयू में ही हुई स्कूलिंग : 19 जुलाई 1938 को डॉ. नार्लीकर ने भले ही महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जन्म लिया लेकिन पूरा बचपन बीएचयू कैंपस में बीता। बीएचयू कैंपस के केंद्रीय विद्यालय में पांचवीं तक, सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल में 12वीं तक पढ़ाई की। 

ब्रहांड की उत्पत्ति की गुत्थी सुलझाने का दिया था फार्मूला : पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह ने 2014 में जयंत विष्णु नार्लीकर को 96वें दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किया था। उन्होंने ब्रह्मांड की उत्पत्ति की गुत्थी सुलझाने का फार्मूला दिया था। कहा था कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य बरकरार है। 

पीएम मोदी ने किया एक्स पोस्ट
डॉ. जयंती नार्लीकर का निधन विज्ञान जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। वे खगोल भौतिकी के महान वैज्ञानिक थे। उनके शोध और सिद्धांत आने वाले वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। उन्होंने विज्ञान के साथ ही शिक्षण संस्थानों को स्थापित कर कई युवाओं को रास्ता दिखाया है। उनकी लिखी किताबों और लेखों ने आम लोगों तक विज्ञान को बेहद सरल और रोचक ढंग से पहुंचाया है। परिवार और मित्रों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। ॐ शांति। - नरेंद्र मोदी, पीएम

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