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पीढि़यों से कर रहे मरीजों की सेवा, निभा रहे संकल्प
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वाराणसी। डाक्टर जिसे धरती का भगवान कहा जाता है और सभी की अपेक्षा इनसे बेहतर इलाज की रहती है। डाक्टर भी मरीजों की सेवा में ही दिन रात लगे रहते हैं। कोरोना काल में तो इनकी जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई है। काशी में कई ऐसे परिवार हैं जो कई पीढि़यों से मरीजों की सेवा में लगे हैं। आगामी एक जुलाई को डॉक्टर्स डे है। ऐसे में इनका जिक्र जरूरी है। बीएचयू में कई चिकित्सक ऐसे हैं। इसमें से एक आयुर्वेद संकाय में प्रमुख प्रो़फेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी। महामना की बगिया से पांच पीढि़यों इनका जुड़ाव है। जिसमें आईएमएसबीएचयू से 4 पीढि़यां शामिल हैं। उधर सर्जरी विभाग में प्रो. राहुल खन्ना और इनके पिता पद्मश्री प्रोफेसर एनएन खन्ना के साथ ही अब बेटी रितिका भी एमबीबीएस के बाद इंटर्न कर रही है।
आईएमएस बीएचयू से चार पीढि़यों का जुड़ाव
आयुर्वेद संकाय के प्रमुख प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी के मुताबिक पांच पीढि़यां महामना की बगिया से जुड़ी हैं। लेकिन मरीजों की सेवा में चार को मौका मिला। बताया बाबा पंडित देवदत्त शास्त्री आयुर्वेदाचार्य के रूप में 1936 में आये और सेवा की। इसके बाद पिता प्रो. एसएन त्रिपाठी 1952 से 1991 तक आयुर्वेद संकाय में रहे। प्रो. यामिनी भूषण ने बताया कि वह खुद 1981 से आयुर्वेद संकाय में सेवा दे रहे हैं और 30 जून को रिटायर हो जाएंगे। अब बेटा डॉ. सुयश त्रिपाठी भी कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर 7 मार्च 2020 से सेवारत है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा का कार्य लगातार जारी रहेगा।
समय के साथ बदलाव होना बहुत जरूरी
सर्जरी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर राहुल खन्ना के मुताबिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तीन पीढि़यां जुड़ी हैं। बताया कि पिता पद्मश्री प्रोफेसर एनएन खन्ना सर्जरी डिपार्टमेंट में 1961 से 1993 तक बीएचयू में सेवा देने के बाद अब भी मरीजों की सेवा में लगे हैं। जबकि खुद प्रोफेसर राहुल खन्ना का कहना है कि 1981 में बीएचयू में एमबीबीएस करने आए और उसके बाद 1991 में उन्होंने सर्जरी डिपार्टमेंट को ज्वाइन किया। बिटिया रितिका खन्ना भी एमबीबीएस करने के बाद अब यहीं से इंटर्न कर रही है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में जिस तरह से तेजी से बदलाव हो रहे हैं उसमें डॉक्टर्स का हर समय अपडेट रहना बहुत जरूरी है।
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आईएमएस बीएचयू से चार पीढि़यों का जुड़ाव
आयुर्वेद संकाय के प्रमुख प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी के मुताबिक पांच पीढि़यां महामना की बगिया से जुड़ी हैं। लेकिन मरीजों की सेवा में चार को मौका मिला। बताया बाबा पंडित देवदत्त शास्त्री आयुर्वेदाचार्य के रूप में 1936 में आये और सेवा की। इसके बाद पिता प्रो. एसएन त्रिपाठी 1952 से 1991 तक आयुर्वेद संकाय में रहे। प्रो. यामिनी भूषण ने बताया कि वह खुद 1981 से आयुर्वेद संकाय में सेवा दे रहे हैं और 30 जून को रिटायर हो जाएंगे। अब बेटा डॉ. सुयश त्रिपाठी भी कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर 7 मार्च 2020 से सेवारत है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा का कार्य लगातार जारी रहेगा।
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समय के साथ बदलाव होना बहुत जरूरी
सर्जरी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर राहुल खन्ना के मुताबिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तीन पीढि़यां जुड़ी हैं। बताया कि पिता पद्मश्री प्रोफेसर एनएन खन्ना सर्जरी डिपार्टमेंट में 1961 से 1993 तक बीएचयू में सेवा देने के बाद अब भी मरीजों की सेवा में लगे हैं। जबकि खुद प्रोफेसर राहुल खन्ना का कहना है कि 1981 में बीएचयू में एमबीबीएस करने आए और उसके बाद 1991 में उन्होंने सर्जरी डिपार्टमेंट को ज्वाइन किया। बिटिया रितिका खन्ना भी एमबीबीएस करने के बाद अब यहीं से इंटर्न कर रही है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में जिस तरह से तेजी से बदलाव हो रहे हैं उसमें डॉक्टर्स का हर समय अपडेट रहना बहुत जरूरी है।
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