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Varanasi: महिला या पुरुष...बांझपन के लिए कौन जिम्मेदार, BHU में DNA वैज्ञानिक ने बताया सच

Sun, 12 Mar 2023 04:23 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 12 Mar 2023 04:23 PM IST
सार

 बीएचयू के विज्ञान संस्थान में डीएनए डिफेंस मैकेनिज्म पर आधारित एडनेट 2023 का आयोजन किया गया। हैदराबाद सीसीएमबी के निदेशक प्रो. के थंगराज ने जेनेटिक्स ऑफ मेल इनफर्टिलिटी पर चर्चा करते हुए कहा कि बांझपन के लिए हर बार बहू को जिम्मेदार ठहराया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है। 

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DNA scientist claims that man mother may be responsible for infertility
सीसीएमबी हैदराबाद के निदेशक डॉ. के थंगराज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुरुषों में बांझपन के ज्यादातर मामलों में मां का माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए ही जिम्मेदार होता है। यह निष्कर्ष शोध में सामने आया है। इसकी पहचान भी हो चुकी है। यह कहना है सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) हैदराबाद के निदेशक डॉ. के थंगराज का। वह शनिवार को बीएचयू के विज्ञान संस्थान में महामारी के डीएनए डिफेंस मैकेनिज्म पर आधारित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। 

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जेनेटिक्स ऑफ मेल इनफर्टिलिटी पर चर्चा करते हुए डॉ के थंगराज ने कहा कि पुरुषों में बांझपन के लिए उनकी मां का डीएनए ही जिम्मेदार होता है। यह सच बांझपन से जुड़े एक हजार नमूनों की जांच से सामने आया है। इन नमूनों की जांच में नौ जीन ऐसे पाए गए, जो पुरुषों में बांझपन के लिए जिम्मेदार होते हैं। ये जीन मां के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए से बच्चों में आए हैं।
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ऑटोजोम्स के कारण जो बांझपन होता है, वह भी मां से बेटे को जाता है। नौ जीन में एक ऑटोजोम्स भी है। जीनोम सिक्वेंसिंग के दौरान पता चला कि 90 फीसदी मामलों में माता के डीएनए के कारण ही पुरुषों में बांझपन की समस्या आती है।
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हर बार बहू को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं

डॉ. के थंगराज ने कहा कि बांझपन के लिए हर बार बहू को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। अभी बच्चे पैदा न होने पर महिलाओं को बांझ कहा जाता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में पुरुष ही जिम्मेदार होते हैं। जिन पुरुषों में बांझपन की समस्या होती है, उन्हें अपनी मां से ही माइटोकॉन्ड्रियल व ऑटोजोम्स जीन मिलते हैं।
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ओपीडी में आने वाली हर पांचवीं महिला परेशान

DNA scientist claims that man mother may be responsible for infertility
सीसीएमबी हैदराबाद के निदेशक डॉ. के थंगराज - फोटो : अमर उजाला

बीएचयू के स्त्री रोग विभाग की ओपीडी में आने वाली हर पांचवीं महिला गर्भधारण न करने की समस्या से परेशान रहती है। इनकी उम्र 30 से 45 वर्ष है। ओपीडी में रोजाना करीब 215 महिलाएं दिखाने आती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बांझपन की समस्या बढ़ी है। इसकी प्रमुख वजह दिनचर्या में बदलाव के साथ धूम्रपान है। जो पुरुष शराब या फिर सिगरेट पीते हैं, उनमें बांझपन की समस्या हो सकती है। मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल व कसे हुए कपड़े पहनने से भी नुकसान हो रहा है। यह कहना कतई उचित नहीं है कि बांझपन सिर्फ महिलाओं में होता है। इसके लिए पुरुष भी जिम्मेदार हैं।

आठ फीसदी रेट्रो वायरस से बना मानव जीनोम

जर्मनी से आए वैज्ञानिक डॉ. मानवेंद्र सिंह ने ज्यादातर महामारियां विभिन्न वायरस के कारण फैली हैं। इनमें रेट्रो वायरस प्रमुख था। इसी वजह से आज के मानव का जीनोम आठ फीसदी रेट्रो वायरस का बना है।  एडनेट 2023 के दूसरे दिन तीन सत्रों में वैज्ञानिक व विशेषज्ञों ने डीएनए और जीनोम पर चर्चा की। बंगलूरू से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दंडपानी ने 500 से ज्यादा सैंपल पर किए गए शोध की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पीआरकेसीए नामक जीन की मौजूदगी से दक्षिण एशिया में हाइपरट्राॅफिक कार्डियो मायोपैथी की समस्या गहराई है। उन्होंने पूरे भारत से एक हार्ट कॉन्सोर्शियम बनाया और इक्जोम सिक्वेंसिंग के जरिये पूरे जीनोम को सिक्वेंस किया। वैज्ञानिक के मुताबिक, यह खोज हृदय रोगियों के इलाज में कारगर साबित हो सकती है।

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