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डीरेका के ई- संचरण पर वाणिज्यकर की रोक

Sun, 10 Apr 2016 02:51 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी Updated Sun, 10 Apr 2016 02:51 AM IST
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DLW Commercial on the transmission of e-stop
रेलवे - फोटो : pti
डीरेका के इंजन उत्पादन की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। वजह है, डीरेका के ई-संचरण पर रोक। 70 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया होने के बाद वाणिज्यकर विभाग ने डीरेका के ई- संचरण पर रोक लगा दी है। इसकी वजह से फार्म- 38 डाउनलोड नहीं हो सकेगा। वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने यह रोक लगाई है। इससे डीरेका में खलबली मची है। फ ार्म 38 पर रोक लगने से डीरेका अब बाहर से माल नहीं मंगा पाएगा जबकि रेल इंजन निर्माण से जुड़े तमाम कल-पुर्जे बाहर से मंगाए जाते हैं। 
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रेल अधिकारियों की तमाम पैरवी के बावजूद बिना बकाया राजस्व जमा कराए सुविधा बहाल करने को वाणिज्यकर विभाग राजी नहीं हुआ। डीरेका को यहां तक चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द बकाया न जमा हुआ तो कारखाने को सील कर दिया जाएगा। इससे डीरेका प्रशासन के समक्ष बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2007-08 से 2015-16 तक का वाणिज्य कर डीरेका पर बकाया है। इसमें मूल धनराशि के साथ ब्याज भी शामिल है। 2007-08 से 2011-12 तक के आकलन में आंकड़ा 70 करोड़ के पार पहुंच जा रहा है। बचे चार सालों के आकलन के बाद वाणिज्य कर विभाग को अनुमान है कि यह आंकड़ा एक अरब के ऊपर पहुंच जाएगा।
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 वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार डीरेका प्रशासन को नोटिस भेजकर बकाया जमा करने को कहा गया। लेकिन, डीरेका प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। वाणिज्य कर विभाग ने पिछले 15 दिसंबर और 16 जनवरी को भी डीरेका के अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया था लेकिन बकाया धनराशि जमा नहीं की गई। इसके बाद वाणिज्य कर विभाग ने प्रदेश के उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हुए कार्रवाई का आग्रह किया। आखिरकार वाणिज्य कर विभाग की ओर से लगातार भेजे जा रहे नोटिस को दरकिनार करना डीरेका प्रशासन को महंगा पड़ा। ई संचरण फ ार्म 38 पर रोक लगने से डीरेका अब बाहर से माल नहीं मंगा पाएगा। गतिरोध जल्द न सुलझा तो इसका असर डीरेका के रेल इंजन उत्पादन पर पड़ना तय माना जा रहा है। 
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