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तीन ग्रहों की युति कराएगी धनवर्षा
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 26 Oct 2016 02:53 AM IST
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दीपावली रहेगी खास
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दिवाली पर तीन ग्रहों की युति से मिलकर बनने वाला महायोग धनवर्षा कराएगा। स्वाति नक्षत्र में दिवाली हर आमो-खास के जीवन में खुशियों का संचार करने वाली होगी। घर-आंगन को सजाने-संवारने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। फूलों की अल्पनाओं, रंगोलियों से दिवाली की खुशियों को यादगार बनाने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। 28 अक्तूबर को धनतेरस पर कुबेर संग धन लक्ष्मी का पदार्पण होगा। इसी के साथ पांच दिवसीय दीपदान का यम पंचक महोत्सव आरंभ हो जाएगा।
स्वाति नक्षत्र में दिवाली शुभ फलदायी होगी। 30 अक्तूबर को अमावस के दिन दिवाली पर घर-आंगन के साथ हर कोने को दीयों की अल्पनाओं से सजाया जाएगा। अमावस की शाम प्रदोष काल स्थिर लक्ष्मी के लिए पूजा का सर्वोत्तम योग शाम 6:15 से रात 8:11 के बीच होगा। अमावस्या की शाम वृष लग्न में जब लक्ष्मी की पूजा आरंभ होगी, तब लग्न के त्रिकोण में गुरु विराजमान रहेगा।
छठवें उपचय स्थान में चंद्रमा, सूर्य और बुध स्थित होंगे। सप्तम भाव में शुक्र और शनि स्थान बनाएंगे। जबकि अष्टम भाव में मंगल रहेगा। उस वक्त दशम भाव में केतु रहेगा। महावीर पंचांग के संपादक ज्योतिषाचार्य डॉ. रामेश्वर नाथ ओझा के मुताबिक पूजा के दौरान वृष लग्न के छठवें भाव में स्वाति नक्षत्र में सूर्य और चंद्रमा की नक्षत्रात्मक युति एवं सप्तम केंद्र स्थान में लग्नेश शुक्र की स्थिति दिवाली पर ऐश्वर्यवृद्धि एवं समृद्धि दायक होगी। इसी के साथ पांच दिनी दीपोत्सव का यम पंचक शुरू हो जाएगा।
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स्वाति नक्षत्र में दिवाली शुभ फलदायी होगी। 30 अक्तूबर को अमावस के दिन दिवाली पर घर-आंगन के साथ हर कोने को दीयों की अल्पनाओं से सजाया जाएगा। अमावस की शाम प्रदोष काल स्थिर लक्ष्मी के लिए पूजा का सर्वोत्तम योग शाम 6:15 से रात 8:11 के बीच होगा। अमावस्या की शाम वृष लग्न में जब लक्ष्मी की पूजा आरंभ होगी, तब लग्न के त्रिकोण में गुरु विराजमान रहेगा।
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छठवें उपचय स्थान में चंद्रमा, सूर्य और बुध स्थित होंगे। सप्तम भाव में शुक्र और शनि स्थान बनाएंगे। जबकि अष्टम भाव में मंगल रहेगा। उस वक्त दशम भाव में केतु रहेगा। महावीर पंचांग के संपादक ज्योतिषाचार्य डॉ. रामेश्वर नाथ ओझा के मुताबिक पूजा के दौरान वृष लग्न के छठवें भाव में स्वाति नक्षत्र में सूर्य और चंद्रमा की नक्षत्रात्मक युति एवं सप्तम केंद्र स्थान में लग्नेश शुक्र की स्थिति दिवाली पर ऐश्वर्यवृद्धि एवं समृद्धि दायक होगी। इसी के साथ पांच दिनी दीपोत्सव का यम पंचक शुरू हो जाएगा।
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