मालवीय पुल पर डायवर्जन: रात में पैदल भी नहीं जा सकेंगे यात्री, मरम्मत का कार्य दो महीने तक चलेगा; जानें वजह
Varanasi News: वाराणसी के मालवीय पुल पर ड्रेनेज स्पाउट और एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत के चलते दो महीने तक रात 10 बजे से सुबह 6:30 बजे तक डायवर्जन लागू रहेगा। इस दौरान पुल पर वाहनों के साथ पैदल यात्रियों का आवागमन भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। रेलवे और प्रशासन ने यात्रियों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Varanasi News: मालवीय पुल पर मरम्मत का काम होगा। इसके कारण 14 जून से 13 अगस्त तक रात में यातायात प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध मालवीय पुल के ड्रेनेज स्पाउट और एक्सपेंशन जॉइंट की विशेष मरम्मत के लिए लगाया गया है। यातायात पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी ने इस अवधि के लिए वैकल्पिक मार्गों की घोषणा की है।
मरम्मत कार्य प्रतिदिन रात 10 बजे से सुबह 6:30 बजे तक चलेगा। इस दौरान मालवीय सेतु, जिसे राजघाट पुल भी कहा जाता है, पर सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। पैदल यात्रियों को भी पुल से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। नमो घाट से पड़ाव और पड़ाव से नमो घाट की ओर जाने वाले मार्ग विशेष रूप से प्रभावित होंगे।
यातायात डायवर्जन योजना
पड़ाव चौराहे से नमो घाट और भदऊं चुंगी की तरफ आने वाले वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा। इन वाहनों को पड़ाव चौराहे से रामनगर की ओर मोड़ा जाएगा। इसके बाद वे सामनेघाट या विश्वसुंदरी पुल होकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। यह व्यवस्था सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए की गई है। गोलगड्डा तिराहे से पड़ाव की तरफ जाने वाले वाहनों के लिए भी डायवर्जन लागू रहेगा।
इन वाहनों को बसंता कॉलेज मोड़ से यू-टर्न लेना होगा। इसके बाद वे लकड़ीमंडी फ्लाईओवर, लहरतारा, भिखारीपुर, अमरा अखरी, एनएच-19 और विश्वसुंदरी पुल होकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। एक अन्य विकल्प के तहत वाहन लकड़ीमंडी से लाइट सिग्नल चौराहा, चौकाघाट, पुलिस लाइन चौराहा और संदहा होते हुए भी अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।
छह किलोमीटर की दूरी अब 18 किलोमीटर में होगी तय
मरम्मत कार्य के कारण अगले दो महीने तक वाराणसी से चंदौली की ओर जाने वाले लोगों को लगभग तीन गुना अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। पड़ाव से कैंट की दूरी सामान्यतः करीब छह किलोमीटर है, लेकिन डायवर्जन लागू होने के बाद पड़ाव से रामनगर होते हुए कैंट पहुंचने के लिए 18 से 20 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ सकती है। हालांकि यह व्यवस्था केवल रात 10 बजे से सुबह 6:30 बजे तक प्रभावी रहेगी।