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काशी में खुलेगी डिजिटल यूनिवर्सिटी, घर बैठे मिलेगी बनारस से जुड़ी हर जानकारी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 29 Apr 2018 11:45 AM IST
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काशी में कितने घाट हैं, उनका महत्व क्या है। यहां की प्रमुख धरोहर, शैक्षिक, सांस्कृतिक विरासत। अब बनारस से जुड़ी हर जानकारी आपको डिजिटल यूनिवर्सिटी में मिल जाएगी। बीएचयू के प्रोफेसरों और काशी के विद्वानों की ओर से इसकी पहल की गई है।
गंगा दशहरा से खुलने वाले इस विश्वविद्यालय की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें विद्वानों की ओर से अलग-अलग विषयों पर न केवल जानकारी दी जाएंगी बल्कि सप्ताह में दो दिन घाटों पर चलने वाली क्लास का लाइव प्रसारण फेसबुक, ट्विटर पर किया जाएगा।
घर बैठे लोगों को एक ही जगह बनारस के बारे में सभी अहम जानकारियां मिल जाएं, इसके लिए यह अपने आप का एक अनूठा विश्वविद्यालय होगा। इसमें बनारस पर आधारित कोर्स होगा और तीन महीने बाद परीक्षा भी होगी।
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इसमें प्राचीन संस्कृति के साथ ही यहां की बातचीत समय-समय पर लगने वाले मेले, धार्मिक आयोजनों, गलियों, घाटों, गंगा, खान-पान, गीत-संगीत, संस्कृति, ऐतिहासिकता आदि का पूरा विवरण होगा।
इसके लिए मई के दूसरे सप्ताह में पहली बैठक गंगा के बीच में बजड़े पर होगी। जिसमें अलग-अलग विद्या के विद्वान जानकारियां देंगे। अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच हो सके, इसके लिए युवाओं की एक टीम फेसबुक, ट्विटर पर अपलोड कर देगी और लोग अपनी इच्छानुसार संबंधित कोर्स मैटेरियल को पढ़ सकेंगे।
बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट प्रो.वीएन मिश्र का कहना है बनारस के बारे में लोगों को सही जानकारियां मिल सकें, इसी उद्देश्य के साथ डिजिटल विश्वविद्यालय की परिकल्पना की गई है। 90 दिन का पूरा कोर्स होगा और ऑनलाइन ही लोग कोर्स मैटेरियल देख सकेंगे। गंगा दशहरा पर इसकी लांचिंग की जाएगी।
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गंगा दशहरा से खुलने वाले इस विश्वविद्यालय की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें विद्वानों की ओर से अलग-अलग विषयों पर न केवल जानकारी दी जाएंगी बल्कि सप्ताह में दो दिन घाटों पर चलने वाली क्लास का लाइव प्रसारण फेसबुक, ट्विटर पर किया जाएगा।
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घर बैठे लोगों को एक ही जगह बनारस के बारे में सभी अहम जानकारियां मिल जाएं, इसके लिए यह अपने आप का एक अनूठा विश्वविद्यालय होगा। इसमें बनारस पर आधारित कोर्स होगा और तीन महीने बाद परीक्षा भी होगी।
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इसमें प्राचीन संस्कृति के साथ ही यहां की बातचीत समय-समय पर लगने वाले मेले, धार्मिक आयोजनों, गलियों, घाटों, गंगा, खान-पान, गीत-संगीत, संस्कृति, ऐतिहासिकता आदि का पूरा विवरण होगा।
इसके लिए मई के दूसरे सप्ताह में पहली बैठक गंगा के बीच में बजड़े पर होगी। जिसमें अलग-अलग विद्या के विद्वान जानकारियां देंगे। अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच हो सके, इसके लिए युवाओं की एक टीम फेसबुक, ट्विटर पर अपलोड कर देगी और लोग अपनी इच्छानुसार संबंधित कोर्स मैटेरियल को पढ़ सकेंगे।
बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट प्रो.वीएन मिश्र का कहना है बनारस के बारे में लोगों को सही जानकारियां मिल सकें, इसी उद्देश्य के साथ डिजिटल विश्वविद्यालय की परिकल्पना की गई है। 90 दिन का पूरा कोर्स होगा और ऑनलाइन ही लोग कोर्स मैटेरियल देख सकेंगे। गंगा दशहरा पर इसकी लांचिंग की जाएगी।
क्या है विश्वविद्यालय में खास
-विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अलग-अलग पाठ्यक्रम होंगे।
-इससे जुड़ने के लिए वेबसाइट पर ही आईडी के माध्यम से लॉगिन करना होगा।
-तीन महीने का कोर्स होगा, जिसमें बनारस के बारे में हर जानकारी मिलेगी।
-एक सप्ताह वर्चुअल क्लास भी करनी होगी।
-एक बार लॉगिन करने के बाद बीच में निकल नहीं सकते हैं।
-इससे जुड़ने के लिए वेबसाइट पर ही आईडी के माध्यम से लॉगिन करना होगा।
-तीन महीने का कोर्स होगा, जिसमें बनारस के बारे में हर जानकारी मिलेगी।
-एक सप्ताह वर्चुअल क्लास भी करनी होगी।
-एक बार लॉगिन करने के बाद बीच में निकल नहीं सकते हैं।
डिजिटल विवि से जुड़े विद्वान
-महंत प्रो.विश्वंभर नाथ मिश्र काशी की संस्कृति गंगा
-प्रो. राजेश्वर आचार्य लोक का शास्त्रीयकरण
-प्रो. राणा पीवी सिंह लौकिक ज्यामिति
-रमन शंकर पंड्या काशी का शिल्प
-अमिताभ भट्टाचार्या काशी का मूल आचरण एवं स्वभाव
-वृंदा धर मास्टर प्लान एवं फदर डेवपलमेंट
-रामनरेशाचार्य काशी की वैष्णव परंपरा
-कमल गिरि काशी का काष्ठ शिल्प
-मो.आरिफ फारसी और उर्दू साहित्य में काशी
-कुमार अजय काशी की लोकदृष्टि
-विवेक दास कबीर एवं मानवता
-प्रो. राजेश्वर आचार्य लोक का शास्त्रीयकरण
-प्रो. राणा पीवी सिंह लौकिक ज्यामिति
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-वृंदा धर मास्टर प्लान एवं फदर डेवपलमेंट
-रामनरेशाचार्य काशी की वैष्णव परंपरा
-कमल गिरि काशी का काष्ठ शिल्प
-मो.आरिफ फारसी और उर्दू साहित्य में काशी
-कुमार अजय काशी की लोकदृष्टि
-विवेक दास कबीर एवं मानवता