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Varanasi News: डायलिसिस यूनिट की पांंच दिन से बिजली गुल, सेवा हो रही प्रभावित
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जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी में डायलिसिस के लिए किडनी के मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। निजी कंपनी की लापरवाही से अंडर ग्राउंड केबल कटने से पिछले पांच दिनों से यूनिट में लाइन नहीं है।
ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे में मरीजों को उपचार चल रहा है। ऐसे में उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। गलत खान-पान के कारण आदिवासी बहुल जिले में हर साल किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं।
ऐसे मरीजों को हर दो से तीन दिन पर डायलिसिस की जरूरत होती है। शासन की पहल पर जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी में पीपीपी मॉडल पर मई 2019 में हिमो डासलिसिस सेंटर की स्थापना हुई।
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दस बेड की क्षमता वाले सेंटर में 7 बेड हिमो पाॅजिटिव और 2 बेड हिमो नेगेटिव के हैं। यहां करीब 50 से 60 मरीज पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो यहां रोजाना तीन शिफ्ट में मरीजों की डायलिसिस होती है।
एक मरीज को हफ्ते में दो से तीन बार डायलिसिस कराने की जरूरत होती है। जिला अस्पताल परिसर में ही रिलायंस जीओ कंपनी की ओर से अनाधिकृत रूप से सड़क के किनारे खुदाई कर केबल डालने का कार्य किया जा रहा है।
मेडिकल कालेज की मनाही के बावजूद कार्य होने से पूर्व में डायलिसिस यूनिट की पानी की पाइप कट गयी थी। जबकि 24 मई की सुबह कार्य के दौरान डायलिसिस यूनिट की बिजली का केबल कट गया।
जिससे पिछले पांच दिनों से डायलिसिस यूनिट में बिजली बाधित है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए मरीजों के इलाज का प्रयास किया जा रहा है। बुधवार की दोपहर साढ़े 12 बजे डायलिसिस यूनिट का जायजा लिया गया। जहां बिजली गायब थी।
जंगलेटर भी उस दौरान बंद मिला। कई मरीज और तीमारदार गर्मी से बेहाल नजर आए। बभनी और राबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र निवासी दो-अलग-अलग मरीजों ने बताया कि उनकी डायलिसिस दूसरे सिफ्ट में सुबह 11 से साढ़े 11 बजे के बीच शुरू होना था।
बिजली न होने के कारण जंगलेटर के सहारे किसी तरह से पहली शिफ्ट के मरीजों की डायलिसिस हुई। जबकि दूसरी शिफ्ट के मरीजों की डायलिसिस दो घंटे बाद करीब एक बजे के बाद शुरू हुआ। इसकी वजह बीच-बीच में जंगलेटर को आराम देना भी था।
सेंटर में मरीजों की डायलिसिस लगातार हो रही है। बिजली का केबल कटने से आपूर्ति प्रभावित हैं। वैकल्पिक संसाधनों से उपचार किया जा रहा है। घटना से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। - अविनाश सिंह, मैनेजर, डायलिसिस केंद्र
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ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे में मरीजों को उपचार चल रहा है। ऐसे में उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। गलत खान-पान के कारण आदिवासी बहुल जिले में हर साल किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं।
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ऐसे मरीजों को हर दो से तीन दिन पर डायलिसिस की जरूरत होती है। शासन की पहल पर जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी में पीपीपी मॉडल पर मई 2019 में हिमो डासलिसिस सेंटर की स्थापना हुई।
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दस बेड की क्षमता वाले सेंटर में 7 बेड हिमो पाॅजिटिव और 2 बेड हिमो नेगेटिव के हैं। यहां करीब 50 से 60 मरीज पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो यहां रोजाना तीन शिफ्ट में मरीजों की डायलिसिस होती है।
एक मरीज को हफ्ते में दो से तीन बार डायलिसिस कराने की जरूरत होती है। जिला अस्पताल परिसर में ही रिलायंस जीओ कंपनी की ओर से अनाधिकृत रूप से सड़क के किनारे खुदाई कर केबल डालने का कार्य किया जा रहा है।
मेडिकल कालेज की मनाही के बावजूद कार्य होने से पूर्व में डायलिसिस यूनिट की पानी की पाइप कट गयी थी। जबकि 24 मई की सुबह कार्य के दौरान डायलिसिस यूनिट की बिजली का केबल कट गया।
जिससे पिछले पांच दिनों से डायलिसिस यूनिट में बिजली बाधित है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए मरीजों के इलाज का प्रयास किया जा रहा है। बुधवार की दोपहर साढ़े 12 बजे डायलिसिस यूनिट का जायजा लिया गया। जहां बिजली गायब थी।
जंगलेटर भी उस दौरान बंद मिला। कई मरीज और तीमारदार गर्मी से बेहाल नजर आए। बभनी और राबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र निवासी दो-अलग-अलग मरीजों ने बताया कि उनकी डायलिसिस दूसरे सिफ्ट में सुबह 11 से साढ़े 11 बजे के बीच शुरू होना था।
बिजली न होने के कारण जंगलेटर के सहारे किसी तरह से पहली शिफ्ट के मरीजों की डायलिसिस हुई। जबकि दूसरी शिफ्ट के मरीजों की डायलिसिस दो घंटे बाद करीब एक बजे के बाद शुरू हुआ। इसकी वजह बीच-बीच में जंगलेटर को आराम देना भी था।
सेंटर में मरीजों की डायलिसिस लगातार हो रही है। बिजली का केबल कटने से आपूर्ति प्रभावित हैं। वैकल्पिक संसाधनों से उपचार किया जा रहा है। घटना से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। - अविनाश सिंह, मैनेजर, डायलिसिस केंद्र