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काशी में धर्म संसद: दूसरे दिन भी छाया रहा राम मंदिर का मुद्दा, धर्मांतरण पर भी गहन चर्चा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 27 Nov 2018 10:29 AM IST
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धर्म संसद का दूसरा दिन
- फोटो : अमर उजाला
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परम धर्म संसद 1008 के दूसरे दिन सोमवार को पहले सत्र में श्रीराम मंदिर का मुद्दा ही छाया रहा। साधु-संतों और महात्माओं ने एक स्वर में कहा कि राम मंदिर मामले को राजनीतिक चादर से ढक दिया गया है। मंदिर बनाने की बजाय उसे भुनाने का काम किया जा रहा है और यह कभी संभव नहीं है। मंदिर जब भी बनेगा, संत महात्माओं के प्रयास और उनकी मेहनत से ही बनेगा। इसके लिए जगद्गुरु शंकराचार्य के सानिध्य की जरूरत है और हम लोग इन के सानिध्य में ही यह कार्य पूरा करेंगे।
धर्म संसद के दोनों सत्रों में मंदिर रक्षा विधेयक के साथ धर्मांतरण विधेयक, वैदिक शिक्षा पद्धति और गंगा संरक्षण जैसे विषयों पर गहन विमर्श किया गया, लेकिन किसी विषय पर प्रस्ताव पास नहीं हुआ। 29 से 31 जनवरी तक प्रयागराज में कुंभ के दौरान अगली धर्म संसद के आयोजन का निर्णय लिया गया।
धर्म संसद में संतों ने कहा कि श्रीराम मंदिर के नाम पर 100 करोड़ सनातन धर्मियों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। श्रीराम हमारे आराध्य हैं, इसलिए राम लला का मंदिर बनना चाहिए। संतों ने कहा कि भाजपा और आरएसएस द्वारा श्रीराम मंदिर के नाम पर अब तक जो दावे किए गए, उससे आम जनता ही नहीं संतों का भी विश्वास इन पर नहीं रहा। इसलिए राम पंचायत बनाकर श्रीराम मंदिर का अति शीघ्र निर्माण कराया जाना चाहिए।
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पढ़ें : काशी में धर्म संसद: पढ़िए गंगा सफाई, राम मंदिर और केंद्र सरकार पर क्या बोले साधु-संत
रसिक पीठाधीश्वर स्वामी जन्मेजय ने कहा कि कोई कहता है श्रीराम जन्मभूमि पर अस्पताल बनेगा तो कोई कह रहा है धर्मशाला बनेगी, यह न्याय का विषय नहीं है। वोट बैंक के नाते राजनीतिक पार्टियां बयानबाजी कर रही हैं। संत मंथन करते हुए इस पर निर्णय लें। कई अन्य संतों और विद्वानों ने भी अपने-अपने तर्क दिए।
मध्याह्न के बाद धर्मांतरण पर चर्चा की गई और इस पर रोक लगाने के लिए प्रयास पर बल दिया गया। प्रवर धर्माधीश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि परम धर्म संसद के आयोजन का उद्देश्य किसी अन्य धर्म का अपमान करना नहीं है। सभी धर्मों के विचार अलग हैं, सबका आदर करना ही सनातन धर्म का कर्तव्य है।
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धर्म संसद के दोनों सत्रों में मंदिर रक्षा विधेयक के साथ धर्मांतरण विधेयक, वैदिक शिक्षा पद्धति और गंगा संरक्षण जैसे विषयों पर गहन विमर्श किया गया, लेकिन किसी विषय पर प्रस्ताव पास नहीं हुआ। 29 से 31 जनवरी तक प्रयागराज में कुंभ के दौरान अगली धर्म संसद के आयोजन का निर्णय लिया गया।
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धर्म संसद में संतों ने कहा कि श्रीराम मंदिर के नाम पर 100 करोड़ सनातन धर्मियों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। श्रीराम हमारे आराध्य हैं, इसलिए राम लला का मंदिर बनना चाहिए। संतों ने कहा कि भाजपा और आरएसएस द्वारा श्रीराम मंदिर के नाम पर अब तक जो दावे किए गए, उससे आम जनता ही नहीं संतों का भी विश्वास इन पर नहीं रहा। इसलिए राम पंचायत बनाकर श्रीराम मंदिर का अति शीघ्र निर्माण कराया जाना चाहिए।
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रसिक पीठाधीश्वर स्वामी जन्मेजय ने कहा कि कोई कहता है श्रीराम जन्मभूमि पर अस्पताल बनेगा तो कोई कह रहा है धर्मशाला बनेगी, यह न्याय का विषय नहीं है। वोट बैंक के नाते राजनीतिक पार्टियां बयानबाजी कर रही हैं। संत मंथन करते हुए इस पर निर्णय लें। कई अन्य संतों और विद्वानों ने भी अपने-अपने तर्क दिए।
मध्याह्न के बाद धर्मांतरण पर चर्चा की गई और इस पर रोक लगाने के लिए प्रयास पर बल दिया गया। प्रवर धर्माधीश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि परम धर्म संसद के आयोजन का उद्देश्य किसी अन्य धर्म का अपमान करना नहीं है। सभी धर्मों के विचार अलग हैं, सबका आदर करना ही सनातन धर्म का कर्तव्य है।
योगी सरकार की घोषणा के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव
धर्म संसद में मौजूद लोग
- फोटो : amar ujala
श्रीराम मंदिर निर्माण पर संत, महात्माओं, महामंडलेश्वर व विद्वानों ने कहा कि अब सब्र का बांध टूट रहा है, इसलिए श्रीराम मंदिर बनना चाहिए। मंदिर बन गया तो राजनीति करने वालों की राजनीति समाप्त हो जाएगी। वहीं हमारे आराध्य भी मंदिर में निवास करने लगेंगे। संसद की कार्यवाही के दौरान जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि लोग श्रीराम मंदिर के बजाय खुले में भगवान राम का स्टैच्यू बनाना चाह रहे हैं, यह गलत है।
प्रतिमा धूप, आंधी और बारिश में खुले आसमान के नीचे रहेगी, इसलिए यह धर्म संसद ऐसे लोगों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला रही है। प्रस्ताव का लोगों ने करतल ध्वनि और हर हर महादेव के नारे से समर्थन किया, लेकिन प्रवर धर्माधीश ने अगले वक्ता को आमंत्रित कर दिया।
पढ़ें : स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बोले, कोई भी राजनीतिक दल कभी नहीं बनाएगा राम मंदिर
उधर, धर्म संसद के लिए जहां संसद भवन की तरह ही टेंट लगाया गया है, वहीं गोशाला भी बनाई गई है। गोशाल में बांधे गए गाय-बछड़ों का श्रद्धालु पूजन कर रहे थे। सभी प्रवेश द्वार का नाम वेदों के नाम पर रखा गया है। शाम को काशी की परंपरा के अनुसार गंगा आरती की तर्ज पर पांच वैदिक ब्राह्मणों ने यहां आरती उतारी। कार्यक्रम स्थल और परिसर के बाहर तीन बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी, जहां से लोग सजीव प्रसारण देख रहे हैं।
श्रीराम मंदिर बनने से कोई रोक नहीं सकता
श्रीराम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष के पैरोकार सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता परमेश्वर नाथ मिश्र ने कहा कि श्रीराम मंदिर मुद्दे पर धर्म संसद तटस्थ है। यहां जो भी हल निकलेगा, उससे पूरी दुनिया सहमत होगी।
अगर विधेयक लाकर मंदिर बनवाया जाएगा तो विश्व में हमारे देश की छवि खराब होगी। देश का हर नागरिक चाहता है कि श्रीराम मंदिर का निर्माण हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह तो स्पष्ट हो चुका है कि वहां कोई मस्जिद थी ही नहीं, इसलिए राम मंदिर बनने से कोई रोक नहीं सकता।
अगर विधेयक लाकर मंदिर बनवाया जाएगा तो विश्व में हमारे देश की छवि खराब होगी। देश का हर नागरिक चाहता है कि श्रीराम मंदिर का निर्माण हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह तो स्पष्ट हो चुका है कि वहां कोई मस्जिद थी ही नहीं, इसलिए राम मंदिर बनने से कोई रोक नहीं सकता।