पुण्यतिथि: साल में 30 दिन काशी में रहते थे देवरहा बाबा, जार्ज पंचम ने भी किए थे दर्शन; देशभर में हैं शिष्य
Varanasi News: देवरहा बाबा जब काशी आते थे, तो उनका दर्शन करने के लिए आसपास के जिलों वालों का काफी जमावड़ा लगता था। वे भक्तों ने अपना आशीर्वाद देने के साथ सफल जीवन के लिए उचित ज्ञान भी देते थे। आज भी उनके भक्त पूरी आस्था के साथ पूजन-अर्चन करते हैं।
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एक लकड़ी ह्रदय को मानो दूसर राम नाम पहिचानो, राम नाम नित उर पे मारो ब्रह्म दिखे संशय न जानो...। अर्थात लकड़ी के घर्षण से आग निकलती है, ठीक उसी तरह रामनाम के जपने मात्र से उनका दर्शन होता है।
ये संदेश देने वाले सिद्ध महापुरुष देवरहा बाबा काशी में साल में एक महीने गुजारते थे। रोज गंगा स्नान करते थे। वह परम रामभक्त थे। वो भक्तों को राम मंत्र की दीक्षा देते थे। उन्होंने ही कांग्रेस पार्टी को हाथ का पंजा निशान दिया था।
देवरहा बाबा को काशी से काफी लगाव था, क्योंकि उनके गुरु जनार्दनाचार्य महाराज का पीठ अस्सी घाट पर द्वारिकाधीश मंदिर में ही था। बाद में बाबा की कीर्ति बढ़ने पर द्वारिकाधीश मंदिर देवरहा बाबा आश्रम के नाम से जाना जाने लगा।
आश्रम के प्रभारी राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि देवरहा बाबा प्रयाग में माघ मेला में, फागुन में वृंदावन में, चैत्र व वैशाख मास में हरिद्वार और ज्येष्ठ मास में काशी में रहते थे। यहां पर नित्य गंगा में स्नान करते थे। पूजन-अर्चन, प्रवचन और रामनाम कीर्तन करते थे। तब यहां दूर-दराज से उनके अनुयायी दर्शन करने आते थे।
उन्होंने बताया कि वह जनसेवा तथा गोसेवा को सर्वोपरि धर्म मानते थे। देवरहा बाबा निर्वस्त्र और 12 फीट ऊंचे लकड़ी से बने मचान (बॉक्स) पर रहते थे। वह नीचे केवल सुबह के समय स्नान करने के लिए आते थे।
पंडित राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि वह गुरु परंपरा के तीसरी पीढ़ी के शिष्य थे। पहले गोपालाचार्य महाराज, दूसरे जनार्दनाचार्य महाराज, तीसरे देवरहा बाबा और चौथी पीढ़ी के बाबा के शिष्य हंस दास महाराज उर्फ देवरहा बाबा हैं। देवरहा बाबा के शिष्य देशभर में हैं। यूपी के अलावा बिहार, झारखंड, उतराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब आदि प्रदेशों में आश्रम बने हैं।
1990 में त्याग दिए थे प्राण
बाबा अवतारी पुरुष माने जाते थे। इसीलिए उनके जन्म को लेकर अभी तक कोई ठोस तथ्य नहीं मिलता है। राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि देवरिया जिले के लार रोड क्षेत्र के सरयू के तट पर स्थित मइल गांव में उनकी तपस्थली है। यही पर वह आठ माह रहते थे।
कुछ संतों का कहना है कि देवरिया ही उनका जन्म स्थान है। कुछ उनके जीवित रहने के संबंध में 250 साल तो कुछ 500 साल बताते हैं। उन्होंने बताया कि देवरहा बाबा ने वृंदावन में यमुना तट पर 19 जून 1990 को योगिनी एकादशी (आषाढ़ मास) के दिन प्राण त्याग दिए थे।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी किए थे देवरहा बाबा के दर्शन
प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, महामना मदन मोहन मालवीय, विश्वनाथ प्रताप सिंह, अटल बिहारी बाजपेयी, पुरुषोत्तमदास टंडन, लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, कमलापति त्रिपाठी आदि नेताओं ने उनके दर्शन किए थे।
राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जब इंदिरा गांधी हार गईं तो वह भी देवराहा बाबा से आशीर्वाद लेने देवरिया उनके आश्रम में गईं थीं। बाबा ने अपने हाथ के पंजे से उन्हें आशीर्वाद दिया, तभी से कांग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ का पंजा बन गया और 1980 में हुए चुनाव में वह प्रचंड बहुमत से जीती थीं।
पुण्यतिथि पर नवाह्न पारायण शुरू
द्वारिकाधीश मंदिर देवरहा बाबा आश्रम में नवाह्न पारायण 24 जून से देवरहा बाबा की पुण्यतिथि तक योगिनी एकादशी यानी दो जुलाई तक चलेगा। राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि 41 वेदपाठी सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक नवाह्न पारायण कर रहे हैं। इसके बाद साधु-संतों का भोज और शाम को चार बजे से प्रवचन, भजन कीर्तन होता है।