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भक्ति भाव: सर्वार्थ सिद्धि योग और अनुराधा नक्षत्र में हुई जेठ मास की शुरुआत, भगवान विष्णु की पूजा का है विधान
Sat, 25 May 2024 01:14 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sat, 25 May 2024 01:14 PM IST
सार
Varanasi News: ज्येष्ठ माह में तांबा और तिल का दान करना चाहिए। इन चीजों का दान करने से मंगल दोष से मुक्ति मिलती है। इस दौरान सत्तू का सेवन करना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। बैंगन और तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। बड़ा मंगल के दिन व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करने का विधान है।
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वाराणसी में गंगा स्नान को उमड़े श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ज्येष्ठ मास की शुरूआत सर्वार्थ सिद्धि योग और अनुराधा नक्षत्र में हुई है। भगवान विष्णु, बजरंग बली और शनिदेव को समर्पित ज्येष्ठ मास में विविध अनुष्ठान संपन्न होंगे। मान्यता है कि इनकी पूजा से सभी कार्यों में सफलता मिलती है। जाने-अनजाने में किए गए पाप से भी छुटकारा मिल जाता है।
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इस महीने जल की पूजा, जल दान और जल बचाने का नियम है। इसके साथ ही काशी में भगवान विष्णु से जुड़े तीर्थों की परिक्रमा और दर्शन-पूजन का विधान है। आदिकेशव से राजघाट के बीच लगभग 15 तीर्थ हैं।
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स्कंदपुराण के अनुसार गंगा और वरुणा के संगम स्थल से भगवान विष्णु के तीर्थों की शुरूआत होती है। इनका निर्माण महादेव ने किया था। गंगा-वरुणा के संगम में स्नान करके संगमेश्वर की पूजा करने वाला मुक्त हो जाता है। इसके आगे बढ़ने पर विष्णुपादोदकतीर्थ विराजमान है।
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इस तीर्थ पर भगवान विष्णु ने मंदराचल से आने के बाद पहली बार अपने पैर धोए थे। इस तीर्थ में स्नान, तर्पण करके आदिकेशव का पूजन करने वाला संसार की दुर्गति से दूर हो जाता है। श्वेतद्वीप और क्षीराब्धि तीर्थ पर पुण्यकर्म करने वाला क्षीरसमुद्र के तीर वास करता है।
क्षीरोदतीर्थ से दक्षिण भाग में शंखतीर्थ पर स्नान से मनुष्य शंख इत्यादि निधियों का अधिपति होता है। शंखतीर्थ के पीछे सर्वोत्तम चक्रतीर्थ है और उस तीर्थ के जल में नहाने से मनुष्य कभी संसारचक्र में नहीं गिरता है।
उसके आगे (बढ़कर) संसाररूप गद (रोग) का नाशक गदातीर्थ है। वहां पर श्राद्ध करने से गदाधर भगवान के दर्शन मिल जाते हैं। उसके आगे पितरों की तृप्ति करने वाला और सर्वसंपत्तिजनक (पद्मादेवी का बनाया हुआ) पद्मतीर्थ है। यहां पर स्नान करने से पापों का क्षय हो जाता है। उसके आगे महापुण्यप्रद महालक्ष्मीतीर्थ है।
महालक्ष्मी की आराधना करने से निर्वाणलक्ष्मी की प्राप्ति होती है। इसके उपरांत संसार रूपी गरल का नाश करने वाला गारुत्मततीर्थ है। इस तीर्थ का दर्शन-पूजन और यहां स्नान करनेवाला बैकुंठ में वास करता है। उसके आगे आदित्यकेशव तीर्थ है। इसमें नहाने से मनुष्य स्वर्ग में विराजमान होगा। उसी के निकट में त्रैलोक्यपावन दत्तात्रेयतीर्थ है।
मान्यता है कि वहां पर भक्तिभाव से केवल स्नान कर लेने ही से (मनुष्य) योगसिद्धि को प्राप्त कर लेता है। उसके आगे बढ़ते ही परम ज्ञानसमर्पक भार्गवतीर्थ है। यहां पर स्नानविधान से मनुष्य भार्गवलोक का भागी होता है।
जरूरतमंदों को पिलाएं जल
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि ज्येष्ठ माह में दान करना पुण्य कार्य माना जाता है। ज्येष्ठ माह में जल दान सबसे अधिक पुण्य फलदायक माना जाता है। इसलिए इस महीने राहगीरों को पानी पिलाना चाहिए। इसके लिए प्याऊ की व्यवस्था करने, पशु-पक्षियों को पानी पिलाने से शुभ फल मिलता है। भगवान विष्णु सहित अन्य देवी-देवताओं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। व्यक्ति के कष्ट कट जाते हैं।