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रविदास जयंती: श्रद्धालु कर सकेंगे संत की कठौती और चमत्कारिक पत्थर के दर्शन, देश के कोने-कोने से पहुंचने लगे आस्थावान

Sat, 12 Feb 2022 10:56 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 12 Feb 2022 10:56 AM IST
सार

श्रम साधक संत रविदास की जयंती 16 फरवरी को है। इस बार श्रद्धालु  अगुवाई में संत की कठौती, चमत्कारिक पत्थर और स्वर्ण पालकी के दर्शन कर सकेंगे। सीर गोवर्धन आने वाले हर रैदासी के लिए गुरु के मंदिर में यह आस्था का केंद्र है। 

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Ravidas Jayanti 2022 varanasi shir goverdhanpur Devotees will  able to darshan saint and wondrous stone
मंदिर में संत रविदास के दर्शन करते सेवादार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रम साधक संत रविदास के सपनों का गांव बेगमपुरा अब लघु भारत के रूप में संवर गया है। संत रविदास की जयंती पर गुरु चरणों की रज पाने वाले आस्थावान देश के कोने-कोने से सीर पहुंचने लगे हैं। संत रविदास की जयंती पर श्रद्धालु संत निरंजन दास की अगुवाई में संत की कठौती, चमत्कारिक पत्थर और स्वर्ण पालकी के दर्शन कर सकेंगे।

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वाराणसी के सीर गोवर्धन आने वाले हर रैदासी के लिए गुरु के मंदिर में यह आस्था का केंद्र है। संत की कठौती को बुलेट प्रूफ कांच में बंद करके संगमरमर से मंदिर में जड़ दिया गया है। मंदिर के जनरल सेक्रेटरी सतपाल विर्दी ने बताया कि 1964 में संत रविदास के मंदिर निर्माण के लिए नींव खोदाई के समय यह कठौती मिली थी।
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गंगा में मिला था तैरता पत्थर
इसे संत रविदास की निशानी मानकर मंदिर के तहखाने में रखा गया था और बाद में सुरक्षा के लिहाज से संगमरमर से जड़ा गया। मंदिर में सभी श्रद्धालुओं को दर्शन मिलता है। 2016 में संत मनदीप दास नगवां स्थित रविदास पार्क में संत की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने गए थे।
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पढ़ेंः सीरगोवर्धन में संत का हो रहा इंतजार, देशभर से पहुंच रहे आस्थावान, पकवानों की खुशबू से महक उठा लंगर क्षेत्र

इस दौरान गंगा किनारे उनको पानी में तैरता हुआ पत्थर मिला था। संत उसे गुरु रविदास की निशानी मानकर मंदिर ले आए। ट्रस्टी केएल सरोआ ने बताया कि इसे चमत्कारिक पत्थर मानकर सोने की पालकी में संत रविदास की प्रतिमा के सामने बुलेट प्रूफ कांच में रखा गया है।

कोरोना संक्रमण को देख विशेष सतर्कता

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चार दिन पहले सीर गोवर्धन क्षेत्र में इक्का-दुक्का लोग नजर आ रहे थे। वहीं, शुक्रवार शाम को संगत और पंगत भी गुलजार हो उठी। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के पहुंचने से रौनक भी बढ़ गई है। शुक्रवार को सीर गोवर्धन का मेला क्षेत्र लंगर में बनने वाले पकवानों की खुशबू से महक उठा।

लंगर क्षेत्र में पंगत की तैयारियां चल रही थीं। वहीं रैदासियों के आने का सिलसिला भी जारी है। रैदासियों के ठहरने से लेकर भजन कीर्तन के लिए स्थान तय होने के साथ ही सेवादारों की फौज अनवरत सेवा में लगी हुई है। कोरोना संक्रमण को देख विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जगह-जगह जागरूक करने वाले पोस्टर से मास्क के इस्तेमाल और शारीरिक दूरी के पालन की अपील की जा रही है।

लंगर तैयार करने के लिए सेवादारों का जत्था अलग-अलग पालियों में तैनात हैं। शनिवार से भीड़ ज्यादा बढ़ेगी और 14 फरवरी को संत निरंजन दास और डेरा से आने वाले संतों का इंतजार श्रद्धालु कर रहे हैं।

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