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वाराणसीः सावन के दूसरे सोमवार को ढाई हजार भक्तों ने बाबा दरबार में लगाई हाजिरी
Mon, 13 Jul 2020 10:03 PM IST
विचित्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: विचित्र सिंह
Updated Mon, 13 Jul 2020 10:03 PM IST
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला।
सावन के दूसरे सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ ने भक्तों को शक्ति स्वरूप में दर्शन दिए। भक्तों ने बाबा विश्वनाथ से कोरोना महामारी के खात्मे की कामना की। वहीं, पहले सोमवार के मुकाबले सुबह भीड़ ज्यादा थी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ कम होती चली गई। शयन आरती तक लगभग ढाई हजार भक्तों ने बाबा के दर्शन किए। पहली बार मंगला आरती में श्रद्धालु शामिल नहीं हुए।
सुबह पांच बजे से लोगों को मंदिर में प्रवेश मिलना शुरू हुआ। सुबह नौ बजे तक 825 लोग मंदिर पहुंचे, जबकि हर साल इस समय तक 50 से 60 हजार लोग दर्शन कर चुके होते हैं। करीब तीन किलोमीटर तक लगी बैरिकेडिंग भी खाली रही। पहले सोमवार को सुबह 11 बजे तक लोगों की कतार थी, लेकिन इस बार वह भी नहीं थी। भीड़ और कतार नहीं होने से दर्शन करने पहुंचे लोग खुश नजर आए।
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उन्हें बिना इंतजार बाबा का जलाभिषेक करने का मौका मिला। पहले सोमवार की तरह ही इस बार भी भक्तों के लिए तीन रास्ते तय किए गए थे। तीनों रास्तों से सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। मंदिर प्रशासन की ओर से तीनों रास्तों पर थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर की व्यवस्था भी की गई थी। दर्शन के लिए जिले के बाहर से आने वालों भक्तों की संख्या नहीं के बराबर रही।
फूलों से सजाया गया बाबा का दरबार
सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा विश्वनाथ का दरबार फूलों से महक उठा। पूरे मंदिर प्रांगण को सुगंधित फूलों से सजाया गया था। दिव्यांगों और बुजुर्गों को सीधे प्रवेश दिया गया। वहीं, धर्मार्थ मंत्री नीलकंठ तिवारी ने भी बाबा दरबार पहुंचकर दर्शन पूजन किया। इसके बाद बाबा के भक्तों से बात की। कॉरिडोर में चल रहे कार्यों की जानकारी लेने के बाद वह लौटे।
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सुबह पांच बजे से लोगों को मंदिर में प्रवेश मिलना शुरू हुआ। सुबह नौ बजे तक 825 लोग मंदिर पहुंचे, जबकि हर साल इस समय तक 50 से 60 हजार लोग दर्शन कर चुके होते हैं। करीब तीन किलोमीटर तक लगी बैरिकेडिंग भी खाली रही। पहले सोमवार को सुबह 11 बजे तक लोगों की कतार थी, लेकिन इस बार वह भी नहीं थी। भीड़ और कतार नहीं होने से दर्शन करने पहुंचे लोग खुश नजर आए।
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उन्हें बिना इंतजार बाबा का जलाभिषेक करने का मौका मिला। पहले सोमवार की तरह ही इस बार भी भक्तों के लिए तीन रास्ते तय किए गए थे। तीनों रास्तों से सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। मंदिर प्रशासन की ओर से तीनों रास्तों पर थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर की व्यवस्था भी की गई थी। दर्शन के लिए जिले के बाहर से आने वालों भक्तों की संख्या नहीं के बराबर रही।
फूलों से सजाया गया बाबा का दरबार
सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा विश्वनाथ का दरबार फूलों से महक उठा। पूरे मंदिर प्रांगण को सुगंधित फूलों से सजाया गया था। दिव्यांगों और बुजुर्गों को सीधे प्रवेश दिया गया। वहीं, धर्मार्थ मंत्री नीलकंठ तिवारी ने भी बाबा दरबार पहुंचकर दर्शन पूजन किया। इसके बाद बाबा के भक्तों से बात की। कॉरिडोर में चल रहे कार्यों की जानकारी लेने के बाद वह लौटे।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा बंद रहे काशी के शिवालय, भक्तों ने घरों में किया दर्शन-पूजन
कोरोना संक्रमण के कारण सावन के दूसरे सोमवार को भी शहर के शिवालय आम भक्तों के लिए बंद रहे। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा शहर के किसी भी प्रमुख मंदिर में भक्तों को भगवान भोलेनाथ का दर्शन नहीं मिल सका। सोमवार को भक्तों ने मोहल्ले के ही शिव मंदिरों में जलाभिषेक कर कोरोना महामारी के खात्मे की प्रार्थना की। कई मंदिरों के बाहर चौखट पर ही भक्तों ने माला-फूल अर्पित कर शीश नवाया।
दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव, तिलभांडेश्वर, बीएचयू विश्वनाथ, गौरी केदारेश्वर, वनखंडी महादेव, सिद्धेश्वर महादेव, कर्दमेश्वर महादेव, शूलटंकेश्वर महादेव समेत सभी शिवालयों में आम भक्तों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। मंदिरों के कपाट बंद ही रहे। सावन के दूसरे सोमवार को भी दर्शन ना कर पाने से आहत भक्तों का कहना था कि बाबा की नगरी में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि सावन का महीना हो और महादेव से भक्तों की दूरी हो।
सारंगनाथ महादेव मंदिर में पुष्प शृंगार, मिला झांकी दर्शन
सावन के दूसरे सोमवार को सारंगनाथ महादेव मंदिर में बाबा का पुष्प शृंगार हुआ। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंगों पर जलाभिषेक कर पुष्प मालाओं से विधिवत शृंगार किया गया। श्रद्धालुओं को मंदिर के मुख्य द्वार से ही झांकी दर्शन कराया गया। मंदिर के प्रधान पुजारी रामप्यारे पांडे ने बताया कि सावन मास में सारनाथ श्रद्धालुओं से गुलजार रहता था लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के कारण इस पवित्र महीने सावन में भी श्रद्धालुओं का आना न के बराबर है। आज सावन के दूसरे सोमवार को शिवलिंग को बेला, चंपा के फूलों व गुलाब की पंखुड़ियों से सजाकर शृंगार किया गया।
दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव, तिलभांडेश्वर, बीएचयू विश्वनाथ, गौरी केदारेश्वर, वनखंडी महादेव, सिद्धेश्वर महादेव, कर्दमेश्वर महादेव, शूलटंकेश्वर महादेव समेत सभी शिवालयों में आम भक्तों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। मंदिरों के कपाट बंद ही रहे। सावन के दूसरे सोमवार को भी दर्शन ना कर पाने से आहत भक्तों का कहना था कि बाबा की नगरी में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि सावन का महीना हो और महादेव से भक्तों की दूरी हो।
सारंगनाथ महादेव मंदिर में पुष्प शृंगार, मिला झांकी दर्शन
सावन के दूसरे सोमवार को सारंगनाथ महादेव मंदिर में बाबा का पुष्प शृंगार हुआ। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंगों पर जलाभिषेक कर पुष्प मालाओं से विधिवत शृंगार किया गया। श्रद्धालुओं को मंदिर के मुख्य द्वार से ही झांकी दर्शन कराया गया। मंदिर के प्रधान पुजारी रामप्यारे पांडे ने बताया कि सावन मास में सारनाथ श्रद्धालुओं से गुलजार रहता था लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के कारण इस पवित्र महीने सावन में भी श्रद्धालुओं का आना न के बराबर है। आज सावन के दूसरे सोमवार को शिवलिंग को बेला, चंपा के फूलों व गुलाब की पंखुड़ियों से सजाकर शृंगार किया गया।