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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Devotees decorate Bindumadhav with cream and Panchameva day begins Mangala Aarti in Kartik

UP News : मलाई और पंचमेवा से बिंदुमाधव को सजा रहे भक्त, कार्तिक में मंगला आरती से होती है दिन की शुरूआत

Sun, 20 Oct 2024 10:29 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 20 Oct 2024 10:29 AM IST
सार

Varanasi News : आरती के दौरान मंदिर के अंदर मलाई काटकर भगवान का परिधान तैयार किया जाता है और मलाई का वस्त्र और पंचमेवा का मुकुट धारण कराते समय पांचवीं आरती होती है। आरती के बाद कुछ देर दर्शन के लिए मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खुलते हैं। 

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Devotees decorate Bindumadhav with cream and Panchameva day begins Mangala Aarti in Kartik
डेढ़ घंटे का विशेष पूजन किया जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नकार्तिक समो मासो न कृतेन समं युगम्, न वेद सदृशंशास्यं न तीर्थ गङ्गाया समय्...अर्थात कार्तिक के समान कोई मास नहीं, सतयुग के समान कोई युग नहीं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं एवं गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं। देश के पंचमाधव में से एक बिंदुमाधव काशी के पंचनद तीर्थ पर विराजमान हैं। कार्तिक मास में श्रद्धालु भगवान के मलाई शृंगार का दर्शन कर रहे हैं।

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कार्तिक मास अर्थात विष्णुमास में भोर में पंचगंगा घाट पर भगवान बिंदुमाधव मंदिर में मंगला आरती से दिन की शुरूआत हो रही है। इसके बाद भोर में पांच बजे मक्खन आरती, शृंगार आरती और पंचामृत स्नान का विधान पूर्ण हुआ। कार्तिक मास पर्यंत भगवान बिंदु माधव का मलाई से ही परिधान तैयार किया जा रहा है।
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मंदिर खुलने से पहले ही आसपास के मोहल्ले के मराठी परिवार के श्रद्धालु मलाई की थाली लेकर मंदिर पहुंच जाते हैं। पुजारी जिसकी थाली उठा लेते हैं वह खुद को धन्य समझता है और जिसकी थाली बच जाती है वह दूसरे दिन फिर से पहुंचता है।
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शृंगार के बाद भगवान का मलाई और पंचमेवा के मुकुट से सजे स्वरूप की आरती उतारी जाती है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि भगवान के वस्त्र तैयार करने के दौरान डेढ़ घंटे का विशेष पूजन किया जाता है।

एकादशी पर शेषशायी शृंगार, चतुर्दशी पर होगा हरिहर श्रृंगार
मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य मुरलीधर गणेश पटवर्धन ने बताया कि शृंगार आरती का भव्य आयोजन एक मास तक शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक होता है। रोजाना विविध शृंगार के साथ देवोत्थानी एकादशी को भगवान बिंदुमाधव का शेषशायी शृंगार होता है। भगवान चातुर्मास के बाद द्वादशी को उठते हैं। 

द्वादशी को तुलसी विवाह के साथ घोड़े पर, त्रयोदशी को झूले पर शृंगार एवं बैकुंठ चतुर्दशी को हरिहर शृंगार होता है। पूर्णिमा को भगवान का पंचामृत स्नान दोपहर 12 बजे होता है। हाथी पर श्रृंगार के साथ छप्पन भोग अन्नकूट का भोग लगता है। शाम को छह बजे भगवान के उत्सव विग्रह को पालकी पर बैठाकर शहर में भ्रमण कराया जाता है। 

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