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कागजों में घूम रही विकास योजना, कई परियोजनाएं अब भी अटकीं

Mon, 14 Jun 2021 02:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jun 2021 02:06 AM IST
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Development plan moving on paper, many projects still stuck
शहर के विकास के लिए बनी कई परियोजनाएं अब भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। कई परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च भी कर दिए गए, मगर विकास प्राधिकरण खाली हाथ है। आलम यह है कि विकास प्राधिकरण अपनी अटकी परियोजनाओें के लिए कोई प्रयास भी नहीं कर रहा है। तीन साल पहले नई काशी की परिकल्पना की गई और अब तक उसका स्थान तक चयन नहीं किया जा सका। ऐसे ही वर्षों से अटके ट्रांसपोर्ट की जमीन के विवाद को भी सुलझाया नहीं जा सका है।
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18 साल बाद भी टीपी नगर पर निर्णय नहीं
विकास प्राधिकरण ने मोहन सराय के पास बैरवन, सरायमोहन, कंकनाडाडी और मिल्कीचक में 45 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की। मगर विरोध के चलते अब तक उस पर कब्जा नहीं मिल पाया। उस समय 82 करोड़ रुपये में 89 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी थी। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए बनी यह योजना करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद अधर में लटकी है। करीब तीन साल पहले तत्कालीन उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने शासन को पत्र लिखकर किसानों की जमीन वापस करने, उनसे मुआवजा वापस लेने और इस योजना को दूसरी जगह करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद वीडीए वीसी राहुल पांडेय ने भी कुछ प्रयास किए, मगर सफलता नहीं मिली।
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नई काशी के लिए स्थान का चयन ही नहीं
प्रदेश की पहली मॉडल सिटी बसाने की योजना भी कागजों से बाहर नहीं आ पाई। रिंग रोड किनारे नई काशी की बसाने के लिए गुजरात की एक कंपनी को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें 13 गांवों में 850 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने का प्रस्ताव भी दिया गया था। मगर इस बीच शूलटंकेश्वर के पास इस योजना को शिफ्ट करने की योजना बनने लगी। करीब तीन साल बाद भी न्यू काशी पर स्थिति जस की तस है। जबकि इस योजना पर भी करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो गया है।
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एलएपी पर भी आगे नहीं बढ़ी बात
पुरानी काशी को संवारने के लिए विकास प्राधिकरण ने सूरत की डिजाइन प्वाइंट कंसलटेंट को सर्वे का जिम्मा दिया था। सर्वे में एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने के बाद अब तक इस योजना पर कोई निर्णय नहीं किया गया। इस योजना में लक्सा इलाके में पुराने व जर्जर मकान को हटाकर नया निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव है। यहां बिना किसी को विस्थापित किए बुनियादी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।

जिन परियोजनाओं और योजनाओं पर काम आगे नहीं बढ़ा है उसकी समीक्षा कराई जाएगी। तकनीकी दिक्कतों को दूर कर परियोजनाओं को शुरू कराया जाएगा।-दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
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