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विकास की आड़ में प्रकृति का दोहन खतरनाक : हितेश
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2015 02:04 AM IST
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वाराणसी। लंका स्थित विश्व संवाद केंद्र में रविवार को ‘चेतना प्रवाह’ के पर्यावरण विशेषांक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘पांचजन्य’ के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि पृथ्वी पर प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार मनुष्य है।
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विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन हो रहा है। ऐसे में जब तक मन और विचार के स्तर पर हमारे अंदर पर्यावरण संरक्षण को लेकर शुचिता नहीं आएगी, पर्यावरण प्रदूषित होता रहेगा। हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटकर ही विकास से जुड़ी चुनौतियों का मुकाबला कर सकते हैं।
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मुख्य वक्ता इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद ने कहा कि प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण के महत्व को समझने और समझाने की जरूरत है।
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अध्यक्षता प्रियरंजन शर्मा ने की। काशी विद्यापीठ के हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि शुद्ध पर्यावरण जीवन का विस्तार है।
इस मौके पर डॉ. विजयनाथ पांडेय, डॉ. अभय पांडेय, प्रदीप राय, चेत नारायण सिंह, लोकनाथ, डॉ. विवेकानंद तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, रामगोपाल तिवारी, राम प्रसाद, देवी प्रसाद सिंह आदि मौजूद रहे। स्वागत विश्व संवाद केंद्र के प्रमुख नागेंद्र जी, संचालन डॉ. अत्रि भारद्वाज ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हंस नारायण सिंह ने किया।