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सूरजकुंड में देवदीपावली पर होगा असंख्य दीपों का दान, सफाई की दरकार
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मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को शाप के चलते कुष्ठ रोग हो गया था। इससे मुक्ति के लिए सांब काशी आए और यहां पर भगवान सूर्य के मंदिर की स्थापना की। संस्कृत विद्यालय ईश्वरगंगी के पूर्व प्रधानाचार्य व ज्योतिषाचार्य पं. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि मंदिर के पास ही कुंड का निर्माण कराया। इसका नाम सूरजकुंड है। इस कुंड में स्नान करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है। दूर-दूर से भक्त लोग यहां कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए स्नान करने आते हैं। मंदिर में पूजा पाठ करने वाले सूरजकुंड पर दीपदान करते हैं। देवदीपावली पर यहां दीपों का दान होता है। लेकिन अभी यहां साफ सफाई की दरकार है।
सूरजकुंड पर देव दीपावली 20 साल पहले शुरू की गई थी। चारों तरफ मकानों से घिरे कुंड में 12 माह पानी भरा रहता है। दरअसल, इस कुंड से थोड़ी दूरी पर लक्ष्मीकुंड और रामकुंड हैं। यहां के लोगों का कहना है कि अंदर ही अंदर ये कुंड आपस में जुड़े हैं। यही कारण है कि जल यहां हमेशा रहता है। बारिश के मौसम में पानी बढ़ने पर कुंड का पानी गंगा में चला जाता है।
सांबादित्य के मंदिर में गेहूं और गुड़ के दान का विधान
कुंड के समीप सांबादित्य के मंदिर में हर रविवार को भक्तों की भीड़ होती है। भक्त यहां गुड़ और गेहूं का दान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि दान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। कई लोग यहां लाल वस्तुओं का दान करते हैं।
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सूरजकुंड पर देव दीपावली 20 साल पहले शुरू की गई थी। चारों तरफ मकानों से घिरे कुंड में 12 माह पानी भरा रहता है। दरअसल, इस कुंड से थोड़ी दूरी पर लक्ष्मीकुंड और रामकुंड हैं। यहां के लोगों का कहना है कि अंदर ही अंदर ये कुंड आपस में जुड़े हैं। यही कारण है कि जल यहां हमेशा रहता है। बारिश के मौसम में पानी बढ़ने पर कुंड का पानी गंगा में चला जाता है।
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सांबादित्य के मंदिर में गेहूं और गुड़ के दान का विधान
कुंड के समीप सांबादित्य के मंदिर में हर रविवार को भक्तों की भीड़ होती है। भक्त यहां गुड़ और गेहूं का दान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि दान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। कई लोग यहां लाल वस्तुओं का दान करते हैं।
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