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पिंडदान के लिए उमड़े वंशज
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 16 Sep 2016 02:27 AM IST
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पितरों को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार यानी महालया को काशी में पिंडदान के लिए वंशजों का रेला उमड़ेगा। इसके लिए रात से ही पिशाचमोचन कुंड समेत गंगा तटों पर भीड़ उमड़ने लगी। उत्तर से दक्षिण तक के वंशज काशी पहुंचने लगे हैं। पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी तादाद में लोग पिंडदान के लिए काशी आएंगे। सुख, समृद्धि, सफलता, यश, वैभव की कामना से पितरों की स्मृति में सुबह से ही पिंडदान और तर्पण, अर्पण आरंभ हो जाएगा। इसके बाद पितरों को पसंद व्यंजनों को ब्राह्णणों, बटुकों के आगे परोसा जाएगा। उन्हें दक्षिणा और उपहार देकर विदा किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य बिमल जैन बताते हैं कि श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण के बाद ब्राह्मण भोजन अवश्य कराना चाहिए। श्राद्ध के लिए लोहे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पितरों के नाम पर ब्राह्मण भोजन के लिए तैयार किए जाने वाले व्यंजनों में अरहर, मसूर, कद्दू, बैंगन, गाजर, शलजम, सिंघाड़ा, अलसी, चना का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए श्राद्ध करने वाले को सात्विक भोजन करना चाहिए। इस बीच, पिशाचमोचन कुंड पर श्राद्ध के लिए गुरुवार शाम से ही वंशजांे का यहां पहुंचना शुरू हो गया था।
अपने कुल गोत्र, नाम, राशि और पितर का नाम तथा संबंध का उल्लेख कर हाथ में जल लेकर संकल्प करें। पूर्वाभिमुख होकर ही श्राद्ध करें। कुश, चावल, जौ, तुलसी के पत्ते और सफेद पुष्प को श्राद्ध में शामिल करें। तिल मिश्रित जल की तीन अंजुली जल तर्पण में देना चाहिए। पिंडदान के बाद ब्राह्मण को दान अवश्य दें। ब्राह्मण ना मिलने पर दामाद, नाती, भांजे को दान देने की परंपरा है। श्राद्ध के बाद गाय, कुत्ता, कौवा को पितरों के प्रिय व्यंजन ज़रूर खिलाएं। यह बताया पिशाचमोचन कुंड के प्रधान तीर्थपुरोहित पं. कृष्ण कुमार उपाध्याय ने।
अपने कुल गोत्र, नाम, राशि और पितर का नाम तथा संबंध का उल्लेख कर हाथ में जल लेकर संकल्प करें। पूर्वाभिमुख होकर ही श्राद्ध करें। कुश, चावल, जौ, तुलसी के पत्ते और सफेद पुष्प को श्राद्ध में शामिल करें। तिल मिश्रित जल की तीन अंजुली जल तर्पण में देना चाहिए। पिंडदान के बाद ब्राह्मण को दान अवश्य दें। ब्राह्मण ना मिलने पर दामाद, नाती, भांजे को दान देने की परंपरा है। श्राद्ध के बाद गाय, कुत्ता, कौवा को पितरों के प्रिय व्यंजन ज़रूर खिलाएं। यह बताया पिशाचमोचन कुंड के प्रधान तीर्थपुरोहित पं. कृष्ण कुमार उपाध्याय ने।
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