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विश्वविद्यालयों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्तियां जल्द
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वाराणसी। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में रिक्त पड़े तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर जल्द ही भर्तियां शुरू होंगी। इन पदों पर भर्ती का अधिकार कुलपति को देने की मांग की गई है। इसके साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में रोस्टर जारी कर जल्द से जल्द शुरू कराने की बात कही गई है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की समस्याओं के बारे में जानकारी दी।
महासंघ ने उपमुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति, प्रोन्नति, सेवा नियमावली न होने सहित कई मांगाें के बारे में बताया। शैक्षिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने बताया कि महाविद्यालयों के शिक्षकों को प्रोफेसर का पदनाम देने के फैसले के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके अलावा अब तक शिक्षकों की कोई सेवा नियमावली नहीं बनी है। बहुत से ऐसे मानदेय शिक्षक हैं, जिसे विनियमित नहीं किया जा सका है। उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री ने मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही विश्वविद्यालयों में रिक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार कुलपतियों को देने, शिक्षकों के नियुक्ति की प्रक्रिया भी रोस्टर जारी कर जल्द से जल्द शुरू कराने की मांग की।
प्रो. मिश्र ने बताया कि मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. उदयन मिश्र ने किया। इस दौरान हृदयकांत, टीके शर्मा, डॉ. जितेंद्र, डॉ. भट्ट एवं महेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सके गा विवि
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति अब विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कर सकेगा। अब शासन स्तर से इसकी जिम्मेदारी उच्चतर शिक्षा आयोग को दी जाएगी। हालांकि विश्वविद्यालय के नियमानुसार प्राचार्य और शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार विश्वविद्यालय के पास है। शासन ने विश्वविद्यालय को पत्र जारी कर एक सप्ताह में नियमों में संशोधन कर जानकारी देने को कहा है। देश में विवि से संबद्ध कॉलेजों में करीब एक हजार पद खाली हैं।
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महासंघ ने उपमुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति, प्रोन्नति, सेवा नियमावली न होने सहित कई मांगाें के बारे में बताया। शैक्षिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने बताया कि महाविद्यालयों के शिक्षकों को प्रोफेसर का पदनाम देने के फैसले के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके अलावा अब तक शिक्षकों की कोई सेवा नियमावली नहीं बनी है। बहुत से ऐसे मानदेय शिक्षक हैं, जिसे विनियमित नहीं किया जा सका है। उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री ने मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही विश्वविद्यालयों में रिक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार कुलपतियों को देने, शिक्षकों के नियुक्ति की प्रक्रिया भी रोस्टर जारी कर जल्द से जल्द शुरू कराने की मांग की।
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प्रो. मिश्र ने बताया कि मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. उदयन मिश्र ने किया। इस दौरान हृदयकांत, टीके शर्मा, डॉ. जितेंद्र, डॉ. भट्ट एवं महेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सके गा विवि
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति अब विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कर सकेगा। अब शासन स्तर से इसकी जिम्मेदारी उच्चतर शिक्षा आयोग को दी जाएगी। हालांकि विश्वविद्यालय के नियमानुसार प्राचार्य और शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार विश्वविद्यालय के पास है। शासन ने विश्वविद्यालय को पत्र जारी कर एक सप्ताह में नियमों में संशोधन कर जानकारी देने को कहा है। देश में विवि से संबद्ध कॉलेजों में करीब एक हजार पद खाली हैं।