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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Decision taken in BHU to celebrate all festivals on one day in calendar of 2025

BHU: होली और विजयादशमी ने रोकी 2025 के एक देश एक पंचांग की राह, सभी त्योहारों को एक दिन मनाने पर हुआ निर्णय

Sat, 06 Apr 2024 08:52 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 06 Apr 2024 08:52 PM IST
सार

बीएचयू में हुई बैठक में 2025 के पंचांग में सभी त्योहारों को एक दिन मनाने पर निर्णय हुआ।लेकिन, होली और विजयादशमी की तिथि पर पेच फंसा है। ऐसे में अगली बैठक में इसका निराकरण होगा।  

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Decision taken in BHU to celebrate all festivals on one day in calendar of 2025
राशि चक्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होली और विजयादशमी की तिथियों पर भेद ने 2025 के एक देश एक पंचांग की राह रोक रखी है। वहीं, संवत 2082 के बाकी तिथि-त्योहारों को एक ही तारीख पर मनाने के लिए पंचांगकारों ने सहमति जताई है। होली और विजयादशमी की तिथि पर भेद होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका है। अप्रैल के अंत में होने वाली अगली बैठक में इसका विवाद सुलझने की उम्मीद है। इसके बाद ही काशी से एक देश एक पंचांग की राह निकलेगी।

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शुक्रवार को बीएचयू के ज्योतिष विभाग में काशी में मनाए जाने वाले त्योहारों की एकरूपता लाने के लिए पंचांगकारों की दूसरी बैठक आयोजित हुई। प्रो. रामचंद्र पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संवत 2082 यानी 2025 में प्रकाशित होने वाले पंचांग के व्रत पर्वों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान वासंतिक नवरात्र में महानिशा पूजा, मेष संक्रांति का पुण्यकाल, परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया, गंगासप्तमी, सीता नवमी, जन्माष्टमी, कुशोत्पाटनी अमावस्या, मकर संक्रांति का पुण्यकाल, आषाढ़ कृष्ण एकादशी और ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी की तिथियों पर सभी ने एक से सर्वसम्मति से निर्णय लिया।
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वहीं, होली एवं विजयदशमी में कुछ प्रमाण वचनों के अभाव में निर्णय को अग्रिम बैठक के लिए स्थगित किया गया। अगली बैठक में इस पर चर्चा करके इसमें आने वाले भेद को समाप्त करके एक तिथि एक पंचांग की रूपरेखा तैयार होगी। इसके अलावा 2025 के अन्य व्रत पर्वों में कोई विभेद नहीं है। विश्व पंचांग के समन्वयक और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने कहा कि बीते वर्षों में काशी से प्रकाशित होने वाले पंचांगों में व्रत पर्वों में अंतर बढ़ता जा रहा है।
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इससे समाज में भ्रम एवं ज्योतिष के प्रति अनास्था एवं अविश्वास बढ़ता जा रहा है। इसीलिए उनमें समरूपता स्थापित करने के लिए दूसरी बैठक हुई। अप्रैल में काशी के पंचांगों में एकरूपता की रूपरेखा तैयार हो जाएगी और जुलाई तक यह पंचांग छपकर भी आ जाएंगे। चैत्र प्रतिपदा से इनका इस्तेमाल भी शुरू हो जाएगा।


बैठक में ये रहे शामिल
बैठक में गणेश आपा पंचांग के संपादक, श्री हृषिकेश पंचांग के संपादक विशाल उपाध्याय एवं शिव मूर्ति उपाध्याय, महावीर पंचांग के संपादक डॉ. रामेश्वर ओझा, अन्नपूर्णा पंचांग के संपादक डॉ. श्रीकांत तिवारी, शिव गोविंद पंचांग के संपादक सदानंद, पञ्चांग गणित कर्ता अमित मिश्रा, विश्व पंचांग के संपादक प्रो. गिरजा शंकर शास्त्री, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. शंकर कुमार मिश्र, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

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