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बुद्ध की उपदेशस्थली से बोले दलाईलामा, भारतीय दर्शन से ही फैलेगी विश्व शांति

Sun, 31 Dec 2017 02:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 31 Dec 2017 02:00 PM IST
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Dalai lama said world peace will come from indian philosophy
सेमिनार में बोलते हुए परम पावन दलाई लामा - फोटो : अमर उजाला
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने शनिवार को सारनाथ के केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान कहा कि भारतीय दर्शन से ही विश्व में शांति फैलेगी। विश्व शांति के लिए हमें संवाद स्थापित करना होगा। 
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अतीत की बातों को भूलकर हमें आगे बढ़ना होगा। आने वाली सदी संवाद की है। उन्होंने कहा कि हम 21वीं सदी की शुरुआत में है। ये हमारी जिम्मेदारी है हम इस सदी को शांतिपूर्ण बनाएं। इसके लिए हमें अपने बीच की दीवारें तोड़नी होंगी।
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गौतम बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ से दलाई लामा ने संदेश दिया कि हम अपने ज्ञान, बुद्धि और मन के रचनात्मक प्रयोग से एक खुशहाल विश्व की रचना करें। हमारी कोशिश हो कि हम लोगों को खुश रखने का माध्यम बनें।
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‘भारतीय दार्शनिक प्रस्थानों एवं आधुनिक विज्ञान में मन की अवधारणा’ विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सदियों में लोगों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन अपनी बुद्धि विवेक से न कर हथियारों से किया है।

ज्ञान और बुद्धि का प्रयोग न्यूक्लियर पावर जैसे विध्वंस कार्यों में किया गया जो मानवता के लिए सही नहीं है। हर युद्ध का कारण घृणा और क्रोध है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम स्वयं और आने वाली पीढ़ी में करुणा और प्रेम की भावना विकसित करें। 

भावनाओं की पवित्रता की ओर बढ़ना होगा

Dalai lama said world peace will come from indian philosophy
सेमिनार में उपस्थित विभिन्न देशों से आए अतिथि - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा कि अफगानिस्तान, सीरिया, यमन में बच्चों की हत्या हो रही है। ये हमारे आपसी मतभेद का नतीजा है। हमें इसे रोकना होगा, मानवता का परिचय देना होगा। हम शारीरिक पवित्रता के बारे में तो सोचते हैं लेकिन अब हमें भावनाओं की पवित्रता की ओर बढ़ना होगा।

हमें एकात्म की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा और ये भारतीय दर्शन से ही संभव है। आने वाले नए साल में विश्व में शांति का संदेश भारतीय दर्शन की इसी भूमि से दिया जा सकता है, जहां से गौतम बुद्ध ने शांति का संदेश दिया। प्रार्थना के साथ हमें लोगों के दुख के निवारण का उपाय भी ढूंढना होगा।

इससे पहले संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की सांख्य, वेदांत, न्याय, वैशेषिक, बौद्ध व जैन परंपराओं के विद्वानों व साधकों का आधुनिक वैज्ञानिकों के साथ मानव मन के विभिन्न आयामों पर संवाद बेहतर निष्कर्ष देगा।

उन्हाेंने कहा कि मन हमारे अस्तित्व का महत्वपूर्ण अवयव है। मन के रूपांतरण के बिना आभ्यांतरिक व वाह्य शांति की स्थापना संभव नहीं है। संचालन प्रो. जोश केब्जन ने किया। 
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