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वाराणसी सिलेंडर ब्लास्ट: हादसे के बाद जिला प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में, सिलिंडर भरने वालों की कोई जानकारी नहीं
Mon, 23 Aug 2021 05:07 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Mon, 23 Aug 2021 05:07 PM IST
सार
घरेलू गैस से कई गुना ज्यादा खतरनाक इन सिलेंडर में सुरक्षा मानकों की जांच करने वाला कोई नहीं है। उधर, एडीएम सिटी ने साफ किया कि गुब्बारा भरने वाले सिलेंडर का कोई लाइसेंस नहीं होता है।
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ट्रॉमा सेंटर में पहुंची पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी के सूजाबाद क्षेत्र में गुब्बारा भरने वाले सिलिंडर से हुए हादसे ने जिला प्रशासन की कार्यशैली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। प्रशासन के पास हाइड्रोजन, एसीटीलिन व हीलियम के सिलिंडर भरने वाले और व्यापार करने वालों की कोई जानकारी नहीं है। घरेलू गैस से कई गुना ज्यादा खतरनाक इन सिलिंडरों में सुरक्षा मानकों की जांच करने वाला कोई नहीं है। उधर, एडीएम सिटी ने साफ किया कि गुब्बारा भरने वाले सिलेंडर का कोई लाइसेंस नहीं होता है। यह प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान है।
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दरअसल, गुब्बारे में अमूमन हाइड्रोजन गैस से भरकर गुब्बारे बेचे जाते हैं। रामनगर में रविवार को हुए हादसे में गुब्बारा भरने वाले सिलिंडर की आवाज कई किलोमीटर तक गूंजी तो लोगों में दहशत फैल गई। बीएचयू के रसायन विभाग के एसोसिएट प्रो. वी गणेशन ने बताया कि गुब्बारे में एसीटीलिन व हीलियम गैस भरी जाती है।
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ये गैस दूसरी गैसों से महंगी होती है। लेकिन सस्ती गैस के चक्कर में हाइड्रोजन गैस से सिलेंडर भरे होते हैं। हाइड्रोजन गैस को कैल्शियम कार्बाइड से बनाते हैं। जिसे देसी भाषा में कार्बेट कहा जाता है। कैल्शियम कार्बाइड पानी के साथ मिलकर रिएक्शन करती है। जिसके बाद वह हाइड्रोजन के रूप में गैस देती है।
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यह गैस अन्य गैसों के भांति आसानी से बनाई जा सकती है। इसका धमाका 80 ये 100 डेसीबल की आवाज पैदा करता है। यानि ये धमाका एक से डेढ़ किलोमीटर तक आवाज कर दहशत पैदा कर सकता है।
प्रेशर से फटता है हाइड्रोजन का सिलेंडर
हाइड्रोजन गैस काफी खतरनाक होती है, लेकिन सस्ती होती है। हाइड्रोजन गैस के सिलिंडर की अपेक्षा एलपीजी गैस के सिलेंडर की क्षमता अधिक होती है। हाइड्रोजन सिलेंडर का फटना प्रेशर पर निर्भर करता है। निगरानी नहीं होने के कारण इन सिलेंडर को तैयार करने में हल्की लोहे की चादर का इस्तेमाल किया जाता है।
खुलेआम सिलिंडर से गैस भरकर गुब्बारे बेचने वालों पर पुलिस प्रशासन भी रोक नहीं लगाता। जबकि ये सिलिंडर कोई मानक नहीं रखते। ऐसे में खुलेआम मौत का सामान लेकर घूमने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन भी कार्रवाई से बचता है।
खुलेआम सिलिंडर से गैस भरकर गुब्बारे बेचने वालों पर पुलिस प्रशासन भी रोक नहीं लगाता। जबकि ये सिलिंडर कोई मानक नहीं रखते। ऐसे में खुलेआम मौत का सामान लेकर घूमने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन भी कार्रवाई से बचता है।
सड़क पर फैले मांस के लोथड़े और खून देख सहम गए लोग
सूजाबाद में पोलाव शहीद बाबा मजार के पास दर्दनाक हादसा हो गया। गुब्बारों में गैस भरने वाला सिलिंडर फटने से दो लोगों की मौत हो गई। चार घायलों को बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर में जारी है। सिलिंडर का विस्फोट इतना तगड़ा था कि सिलिंडर वाली ट्राली के परखच्चे उड़ गए। यहां मौजूद बबलू का दाहिना पैर अलग हो गया।
इस घटना के चश्मदीद मंजर याद कर सिहर जा रहे हैं। लोहे की चादर वाली ट्राली कई भाग में होकर बिखरी थी। लगभग 100 मीटर तक टुकड़े फैले हुए थे। आसपास तीन-चार साइकिल व बाइक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। फारेंसिक टीम मौके पर पहुंची तो गैस सिलिंडर की टंकी के फैले टुकड़े को कब्जे में ले लिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि टंकी काफी पुरानी और पतली होने के कारण यह दबाव सह नहीं सकी और विस्फोट हो गया।
पड़ोस में बहादुरपुर गांव के बीडीसी रितेश दुबे, प्रधान मेराज और रामबाबू पटेल ने बताया कि विस्फोट इतना तेज था कि बहादुरपुर गांव तक सुनाई दिया। मौके पर भाग कर गए तो हर तरफ खून और मांस के लोथड़े फैले हुए थे। आसपास के ठेले व साइकिल क्षतिग्रस्त पडे़ थे। हर तरफ चीख पुकार और भागमभाग मची थी। एंबुलेंस का इंतजार किए बगैर घायलों को आटो और अन्य वाहनों के जरिए अस्पताल भिजवाया गया। घटना के बाद घंटे भर तक इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
इस घटना के चश्मदीद मंजर याद कर सिहर जा रहे हैं। लोहे की चादर वाली ट्राली कई भाग में होकर बिखरी थी। लगभग 100 मीटर तक टुकड़े फैले हुए थे। आसपास तीन-चार साइकिल व बाइक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। फारेंसिक टीम मौके पर पहुंची तो गैस सिलिंडर की टंकी के फैले टुकड़े को कब्जे में ले लिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि टंकी काफी पुरानी और पतली होने के कारण यह दबाव सह नहीं सकी और विस्फोट हो गया।
पड़ोस में बहादुरपुर गांव के बीडीसी रितेश दुबे, प्रधान मेराज और रामबाबू पटेल ने बताया कि विस्फोट इतना तेज था कि बहादुरपुर गांव तक सुनाई दिया। मौके पर भाग कर गए तो हर तरफ खून और मांस के लोथड़े फैले हुए थे। आसपास के ठेले व साइकिल क्षतिग्रस्त पडे़ थे। हर तरफ चीख पुकार और भागमभाग मची थी। एंबुलेंस का इंतजार किए बगैर घायलों को आटो और अन्य वाहनों के जरिए अस्पताल भिजवाया गया। घटना के बाद घंटे भर तक इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा।