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Cyclone Montha Update: पूर्वांचल के 10 जिलों से बारिश की मेगा रिपोर्ट, अक्तूबर में सावन जैसी बारिश

Fri, 31 Oct 2025 03:14 PM IST
प्रगति चंद डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी।
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 31 Oct 2025 03:14 PM IST
सार

UP Weather Update: पूर्वांचल के 10 जिलों में मौसम का मिजाज बदल गया है। चक्रवाती तूफान मोंथा का असर वाराणसी समेत सभी जिलों में दिख रहा है। बारिश के चलते यहां ठंड बढ़ने लगी है। 

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Cyclone Montha Update Mega report of rain in 10 districts of Purvanchal including varanasi
rain - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

चक्रवाती तूफान मोंथा का असर पूर्वांचल के वाराणसी समेत 10 जिलों में दिखाई दे रहा है। 30 अक्तूबर यानी बृहस्पतिवार को वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के सभी जिलों में बारिश हुई। जिससे मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। मौसम विभाग ने 31 अक्तूबर यानी आज भी वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के साथ ही पूर्वांचल में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक, चक्रवाती तूफान मोंथा मंगलवार की सुबह आंध्रा तट पर टकराने के साथ ही गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया। यहां पढें- पूर्वांचल के 10 जिलों में बारिश की मेगा रिपोर्ट... 

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वाराणसी में बारिश के बाद बढ़ी ठंड

चक्रवाती तूफान मोंथा का असर बृहस्पतिवार को अधिक देखने को मिला। भोर में सुबह 5 बजे से शुरू होकर 7 बजे तक तेज हवा के साथ बारिश हुई। इसके बाद शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक हल्की से तेज बारिश का सिलसिला जारी रहा। नौ साल में सबसे कम अधिकतम तापमान बृहस्पतिवार को दर्ज किया गया। मौसम कुछ ऐसा था कि लगा मानो कार्तिक नहीं, बल्कि सावन का महीना चल रहा हो। मौसम में इस बदलाव का असर यह रहा कि तापमान औसत से 7.9 डिग्री सेल्सियस नीचे 23.8 चला गया। मौसम विभाग ने शुक्रवार यानी आज भी हल्की से तेज बारिश की संभावना जताई है।

आजमगढ़ में बारिश और हवाओं से कई जगह गिरी धान की फसल
आजमगढ़ जिले का मौसम चार दिन से खराब है। तीन दिन से तो धूप ही नहीं निकल रही और रुक- रुक कर बारिश हो रही है। इससे फूलपुर, अहरौला, पवई, सगड़ी, पल्हना सहित कई क्षेत्रों में धान की फसल गिर गई है। कुछ किसानों की काटी गई फसल खेतों में भींग रही है। इससे किसानों का नुकसान होगा। बृहस्पतिवार को दिन भर रुक- रुक कर हल्की बारिश होती रही है। ऐसे में लोग सिहरन महसूस करने लगे हैं। चार दिनों में अधिकतम तापमान तीन और न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया। उधर, कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो अगर इसी तरह मौसम रहा तो किसानों का काफी नुकसान होगा। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह ने शुक्रवार तक जिले में अच्छी बारिश के साथ तेज हवा चलने की संभावना जताई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।  
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बलिया में 36 घंटे में 20 एमएम बारिश, कभी धीमी-कभी तेज हुई

चक्रवाती तूफान मोंथा का असर जिले में बृहस्पतिवार को भी रहा। 36 घंटे से कभी धीमी और कभी तेज बारिश का दौर जारी रहा। जिले में बृहस्पतिवार को 20 एमएम बारिश दर्ज की गई, 16 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने से ठंड का अहसास होने लगा है। तीन दिन में 9 डिग्री पारा लुढ़का है। बृहस्पतिवार को दिनभर सूरज बादलों की ओट में छुपा रहा। हवा संग बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई है। बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित रहा। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें कीचड़ से सन गईं। शहर की सड़क पर गड्ढों में पानी भरने से लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ी।

इसे भी पढ़ें; Varanasi Weather: आठ घंटे तक बारिश, नौ साल में अधिकतम तापमान सबसे कम; आज भी ऐसा ही रहेगा मौसम

भदोही में मोंथा का प्रभाव, 24 घंटे में 10 मिमी हुई बारिश
बंगाल की खाड़ी में उठे मोंथा चक्रवात का असर जिले में भी देखने को मिल रहा है। जिले में बुधवार की रात से रुक-रुककर हो रही बारिश बृहस्पतिवार को भी जा रही। मौसम विभाग के अनुसार, 24 घंटे में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई। माैसम विशेषज्ञा ने बारिश से 20 फीसदी फसल प्रभावित होने की आशंका जताई है। चौथे दिन भी सूर्य बादलों में ही छिपे रहे। तेज हवाओं के कारण ठंड बढ़ गई है। खेतों में पककर खड़ी धान की फसल गिर गई है। बारिश के कारण खेतों में काटकर छोड़ी गई धान की फसल भींग गई। शहर से लेकर गांव तक सड़कों पर कीचड़ फैल गया है। मोंथा चक्रवात के कारण बुधवार शाम को शुरु हुई रिमझिम बारिश बृहस्पतिवार शाम तक जा रही। बारिश के कारण किसान चिंतित है। कई जगहों पर धान की बालियां मिट्टी में लग गई हैं।
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चंदौली में तीन दिन से हो रही बारिश ने धान की फसल को किया बर्बाद

बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान मोंथा जिले में भी अपना असर दिखा रहा है। बृहस्पतिवार को सुबह से ही आसमान पर काले बादल छाए हुए हैं। रुक-रुककर बारिश हो रही है जिससे मौसम पूरी तरह ठंडा बना हुआ है। सुबह से ही तेज व ठंडी हवा चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इससे धान की फसल बर्बाद हो रही है। राज्य मौसम व कृषि विभाग के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि वाराणसी, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, गाजीपुर और बलिया सहित पूर्वांचल के 31 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना है।  
 
गाजीपुर में तीन दिनों की बारिश से 8150 हेक्टेयर में लगी धान की फसल बर्बाद
मोंथा चक्रवाती तूफान के चलते बीते तीन दिनों से बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों और खलिहान में पड़ी धान की फसल भीगने के साथ हवा से गिर गई है। करीब 14 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा से धान की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को भी जिले में रुक-रुक कर बारिश होती रही। तीन दिनों में जिले में 11 एमएम बारिश रिकार्ड की गई वहीं अधिकतम तापमान चार डिग्री लुढ़क कर 26 डिग्री सेंटीग्रेट पर पहुंच गया है। इससे दिन में ही लोगों को कंपकपी का एहसास हुआ।

जिले में करीब 1.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई है। जानकारों के अनुसार इनमें से करीब पांच फीसदी यानी 8150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगी धान की फसल चक्रवाती तूफान मोंथा से हुई बारिश व तेज हवा के कारण या तो बर्बाद हो गई है या फिर खेतों में गिर गई है। आपदा विशेषज्ञ अशोक राय के अनुसार चक्रवाती तूफान का असर एक नंबर तक जिले में प्रभावी रहने की संभावना है। इसके चलते आने वाले दो दिनों तक तेज हवा के साथ कहीं तेज तो कहीं मध्यम बारिश हो सकती हैं। उधर, जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि बारिश के चलते हुए फसलों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। इसके लिए प्रभावित किसानों से जानकारी मांगी जा रही है।

जौनपुर में हवा के साथ हुई बारिश से गिरी धान की फसल, 4-5 फीसदी नुकसान का अनुमान

तीन दिनों से बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों और खलिहान में पड़ी धान की फसल भीग गई है। कई जगह खड़ी धान की फसल हवा के कारण गिर गई है। किसानों के अनुसार, ज्यादा बारिश हुई तो जमीन पर पड़ी बालियों के धान अंकुरित होने शुरू हो जाएंगे। फसल की लागत भी निकालना मुश्किल हो जाएगा। मौसम विशेषज्ञों ने 31 अक्तूबर तक बूंदाबांदी के साथ हल्की बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई है। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में खरीफ सीजन में एक लाख 53 हजार 641 हेक्टेयर में किसानों ने धान की खेती की है। धान की किसानों ने पखवाड़ा भर पहले कटाई शुरू कर दी थी। बीते तीन दिन से मौसम के करवट लेने और बारिश होने से धान की कटाई का काम बंद हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश का दौर यूं ही जारी रही, तो धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। काफी हद तक धान की फसल खेतों में गिरी पड़ी है। कृषि विशेषज्ञों ने चार से पांच फीसदी धान की फसल को नुकसान होने संभावना जताई है। फसल बीमा कराने वाले किसानों को नुकसान का भारपाई की जाएगी।  

मऊ में 10 साल में पहली बार दिवाली के बाद हुई बारिश
चक्रवाती तूफान मोंथा का असर बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को दिन में रुक-रुक कर रिमझिम बारिश होती रही। 21 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। हवा में नमी बढ़ने की वजह से अधिकतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। जबकि पिछले पांच दिन में अधिकतम तापमान में छह डिग्री सेल्सियस तक की कमी आई है। इस सीजन में अब तक 401 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई है। एक अक्तूबर से 30 अक्तूबर तक 74.50 मिमी बारिश हो चुकी है। 28 और 29 अक्तूबर को मिलाकर कुल 2.25 मिलीमीटर बारिश हुई है। दीपावली, छठ बीतने के बाद पिछले 10 साल में पहली बार बारिश हुई है। कृषि वैज्ञानिकों ने शुक्रवार तक इसी तरह बारिश होने की संभावना जताई है।
 

मोंथा चक्रवात और पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ के चलते शुक्रवार तक ऐसे ही मौसम बना रहेगा। तेज हवा के साथ बारिश की संभावना है। हवा के साथ बारिश होने की स्थिति में सभी फसलों पर विपरीत असर पड़ सकता है। कहा कि किसानों को सतर्क रहने की जरुरत है। -डॉ. विनय कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी 

मिर्जापुर में 15 साल में अक्तूबर में हुई सबसे अधिक 271.5 एमएम बारिश

मोंथा चक्रवात के प्रकोप के कारण बुधवार की देर रात में शुरू हुई तेज बारिश बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे तक होती रही। लालगंज में सबसे कम और चुनार क्षेत्र में सबसे अधिक बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार तीन दिन में 135 मिलीमीटर बारिश हुई है। 15 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने के कारण धान की फसल बर्बाद हो गई है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा भू-भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह व तकनीकी अधिकारी (मौसम वैज्ञानिक) शिव मंगल सिंह ने बताया कि अक्टूबर महीने में साल 2010 से 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में सबसे अधिक 271.5 मिलीमीटर बारिश हुई है। वैज्ञानिकों ने सक्रिय मोंथा चक्रवात के प्रभाव से आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की वर्षा तथा तेज गरज-चमक की संभावना जताई है। 31 अक्तूबर को भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की है।

सोनभद्र में बेमौसम बारिश ने धान की पक कर तैयार फसल बर्बाद
चक्रवात मोंथा से खराब हुए मौसम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पिछले 72 घंटे में हुई 70 एमएम बारिश से धान की फसल बरबाद हो गई है। किसान फसल की कटाई की तैयारी में जुटे थे, मगर बारिश ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। कई जगह फसल पानी में डूब गई तो कहीं खेत में गिर गई है। करीब 30 फीसदी नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है। कृषि और बीमा कंपनी की टीमें अलग-अलग सर्वे कर रही हैं।
 

बारिश से फसलों को कितना नुकसान हुआ है, इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारी सर्वे कर रहे हैं। बीमा कराने वाले किसान ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा रहे हैं। सर्वे के बाद ही पता चल सकेगा कि कितनी क्षति हुई है। बीमा कराने वालों को ही कंपनी से मुआवजा मिलेगा। -अमित चौबे, उप कृषि निदेशक 

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