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फुटकर मंडियों में कट रही ग्राहकों की 'जेब'
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 30 May 2016 01:30 AM IST
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सब्जियां भोजन की थाली का प्रमुख आधार होती हैं लेकिन बिचौलियों ने इस पर अपनी बुरी नजर लगा दी है। सब्जियों के दाम पर कोई नियंत्रण न होने के कारण घर-घर का बजट बिगड़ रहा है। कारण, बिचौलियों की मनमानी, और छोटी मंडियों में तगड़ी सेटिंग। नतीजा, पहड़िया थोक मंडी से शहर की छोटी मंडियों तक पहुंचते-पहुंचते सब्जियों के भाव डेढ़ से दो गुना तक बढ़ जाते हैं।
छोटी मंडियों में सब्जियों के दाम को उतार-चढ़ाव का खेल हर दिन होता है। ऐसे में खरीदार अपना बजट बिगड़ने के लिए शासन-प्रशासन को कोस कर रह जाते हैं। पहड़िया मंडी में बिकने वाली सब्जियों के दाम खुले होते हैं लेकिन वहां से जब सब्जियां शहर की छोटी मंडी चंदुआसट्टी, पंचकोशी, सुंदरपुर, विशेश्वरगंज, कज्जाकपुरा, मंडुवाडीह, ककरमत्ता, कमच्छा आदि मंडियों में आती हैं तो उनके दाम अचानक बढ़ जाते हैं। सूत्रों की मानें तो सब्जियों की कीमत तय करने में बिचौलियों की जबरदस्त दखल होती है। यहां तक कि आस-पास के क्षेत्रों से आने वाली सब्जियां छोटी मंडियों में पहुंचती हैं, जिसे बिचौलिए मनमाने रेट में बेचते हैं। फुटकर मंडियों और ठेलों पर कॉलोनियों तक पहुंचते-पहुंचते ये रेट बेतहाशा बढ़ जाते हैं।
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छोटी मंडियों में सब्जियों के दाम को उतार-चढ़ाव का खेल हर दिन होता है। ऐसे में खरीदार अपना बजट बिगड़ने के लिए शासन-प्रशासन को कोस कर रह जाते हैं। पहड़िया मंडी में बिकने वाली सब्जियों के दाम खुले होते हैं लेकिन वहां से जब सब्जियां शहर की छोटी मंडी चंदुआसट्टी, पंचकोशी, सुंदरपुर, विशेश्वरगंज, कज्जाकपुरा, मंडुवाडीह, ककरमत्ता, कमच्छा आदि मंडियों में आती हैं तो उनके दाम अचानक बढ़ जाते हैं। सूत्रों की मानें तो सब्जियों की कीमत तय करने में बिचौलियों की जबरदस्त दखल होती है। यहां तक कि आस-पास के क्षेत्रों से आने वाली सब्जियां छोटी मंडियों में पहुंचती हैं, जिसे बिचौलिए मनमाने रेट में बेचते हैं। फुटकर मंडियों और ठेलों पर कॉलोनियों तक पहुंचते-पहुंचते ये रेट बेतहाशा बढ़ जाते हैं।
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