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Varanasi News: प्रदर्शनी में महामना पर आधारित दस्तावेज देखने उमड़ी भीड़
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय को पहली बार महामना से संबंधित एक लाख से ज्यादा दस्तावेज मिले हैं। महामना की चिट्ठियां, प्रतियां, पत्रिकाएं व अखबारों के कतरन शामिल हैं। 10 हजार पन्नों में सिमटे इस दस्तावेज में महामना मालवीय खुद प्रत्यक्ष रूप से मौजूद हैं। उनसे जुड़ी हजारों तस्वीरें भी देखने को मिल रही हैं।
बीएचयू में 25 दिसंबर को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की 161वीं जयंती की तैयारियां चल रहीं है। सात दिवसीय मालवीय प्रदर्शनी लगाई गई है। इन खास दस्तावेज को जुटाने व अभिलेखागार बनाने में दस साल की कड़ी मेहनत है। ब्रिटेन के इंडिया हाउस से लेकर राजस्थान समेत भारत के कई राजा-महाराजाओं के महलों तक के चक्कर काटने पड़े। कड़ी मेहनत के बाद पहली बार मालवीय के दुर्लभ लेखों, वस्तुओं और तस्वीरों का एक अभिलेखागार बीएचयू में स्थापित किया गया है। अभिलेखागार की कुछ तस्वीरों और दस्तावेजों की प्रदर्शनी मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में प्रदर्शनी में लगाई गई हैं।
बीएचयू के इतिहासकार डॉ. ध्रुव कुमार सिंह ने प्रदर्शनी की रूपरेखा तैयार की है। डॉ. ध्रुव बताते हैं कि 2012 में पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह ने महामना अभिलेखागार बनाने वाले प्रस्ताव पर सहमति दी थी। हालांकि आजादी के बाद ही यह काम हो जाना चाहिए था, तब इन दस्तावेज को आसानी से हासिल किया जा सकता था। महामना से जुड़े दस्तावेज लोग अब खुद विश्वविद्यालय को भेज रहे हैं। लोगों द्वारा भेजे गए दस्तावेज का रजिस्टर तैयार किया गया है। जिसमें डोनर के नाम लिखे गए हैं।
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बीएचयू में 25 दिसंबर को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की 161वीं जयंती की तैयारियां चल रहीं है। सात दिवसीय मालवीय प्रदर्शनी लगाई गई है। इन खास दस्तावेज को जुटाने व अभिलेखागार बनाने में दस साल की कड़ी मेहनत है। ब्रिटेन के इंडिया हाउस से लेकर राजस्थान समेत भारत के कई राजा-महाराजाओं के महलों तक के चक्कर काटने पड़े। कड़ी मेहनत के बाद पहली बार मालवीय के दुर्लभ लेखों, वस्तुओं और तस्वीरों का एक अभिलेखागार बीएचयू में स्थापित किया गया है। अभिलेखागार की कुछ तस्वीरों और दस्तावेजों की प्रदर्शनी मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में प्रदर्शनी में लगाई गई हैं।
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बीएचयू के इतिहासकार डॉ. ध्रुव कुमार सिंह ने प्रदर्शनी की रूपरेखा तैयार की है। डॉ. ध्रुव बताते हैं कि 2012 में पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह ने महामना अभिलेखागार बनाने वाले प्रस्ताव पर सहमति दी थी। हालांकि आजादी के बाद ही यह काम हो जाना चाहिए था, तब इन दस्तावेज को आसानी से हासिल किया जा सकता था। महामना से जुड़े दस्तावेज लोग अब खुद विश्वविद्यालय को भेज रहे हैं। लोगों द्वारा भेजे गए दस्तावेज का रजिस्टर तैयार किया गया है। जिसमें डोनर के नाम लिखे गए हैं।
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