UP : 77 साल... 8 जिलों की 17 हजार की आबादी नहीं हो पाई रोशन, करोड़ों हो गए खर्च; चौंका देंगे ये आंकड़े
Varanasi News : आधुनिक युग में बिजली को लेकर ऐसी स्थिति वाकई निराशाजनक है। गांवों के विकास की बात करने वाली सरकारें भी इनका भला नहीं कर पाईं। जबकि यहां योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुक हैं। सोनभद्र समेत कई जिलों के गांवों में शाम होते ही ढिबरी के सहारे लोग जीवनयापन कर रहे हैं।
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आजादी के 77 साल बाद भी पूर्वांचल के आठ जिलों के करीब 17 हजार लोगों की जिंदगी रोशन नहीं हो पाई। शाम ढलते ही इन जिलों की 191 बस्तियों और मजराें में अंधियारा छा जाता है।
सबसे खराब स्थिति सोनभद्र जिले की है। यहां के 108 मजरों/ बस्तियों में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जबकि जिले के म्योरपुर ब्लाॅक में राज्य उत्पादन निगम की 2630 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली अनपरा परियोजना, सिंगराैली पावर प्लांट के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कई विद्युत परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जहां से उत्पादित बिजली से देश-प्रदेश रोशन हो रहे हैं।
इसी तरह मिर्जापुर, बलिया, गाजीपुर, भदोही, मऊ, आजमगढ़, जाैनपुर में भी एक बड़ी आबादी तक बिजली की आपूर्ति नहीं हो पाई है। यहां पर विद्युतीकरण योजना के नाम पर करोड़ों रुपये फूंक दिए गए मगर बिजली के खंभों में आज तक करंट नहीं दाैड़ पाया।
सोलर लैंप और मोमबत्ती ही सहारा
सोनभद्र की 108 बस्तियों/मजरों में कहीं 50 तो कहीं 100 मकान बने हैं। एक अनुमान के मुताबिक, यहां पर करीब दस हजार से अधिक लोग रहते हैं। म्योरपुर ब्लॉक के 30, दुद्धी के 22, नगवां में 15, घोरावल में 17, रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक में 8, चोपन में 8, चतरा में 7, बभनी में 1 बस्ती/ मजरा विद्युतीकरण से वंचित हैं। दुद्धी ब्लॉक के खोखा, पगडेंवा गांव में ग्रामीण सोलर लैंप का इस्तेमाल करते हैं।
कारणवश सोलर बैटरी चार्ज नहीं हो पाती है, तब मोमबत्ती आदि का सहारा लेना पड़ता है। इसी तरह नगवां ब्लॉक के चेरुई, बांकी, मड़पा और म्योरपुर ब्लॉक में अनपरा के पहाड़ी क्षेत्रों वाले कुलडोमरी, रणहोर, जोगेंद्रा, मेड़रदह गांवों के कई मजरे बिजली की बाट जोह रहे हैं। विभाग का दावा है कि इन क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है।
मोबाइल चार्ज करने के लिए जाते हैं दो किमी दूर
बलिया जिले में अभी तक 61 अनुसूचित जनजातीय बस्तियों में बिजली आपूर्ति नहीं हो पाई है। बैरिया तहसील के चांद दीयर पंचायत के फिरंगी टोला में दस साल पहले पं. दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत खंभा लगाए गए थे , लेकिन आज तक तार नहीं खींचे गए। इस गांव की आबादी करीब 800 लोगों की है। यहां के लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए दो किमी दूर चांद दीयर चौराहा या बकुल्हा स्टेशन जाना पड़ता है। बिजली आपूर्ति के लिए लोग कई बार धरना-प्रदर्शन तक कर चुके हैं। इसके बावजूद अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।
पांच साल पहले लगे मीटर आज तक बंद पड़े हैं
आजमगढ़ के बरदह क्षेत्र के बाबा का पोखरा पुरवा में 25 मकानों में बनवासी समाज के लगभग 100 लोग रहते हैं। यहां पांच साल पहले मकानों में विद्युत मीटर लगाए गए थे, मगर कनेक्शन आज तक चालू नहीं हो पाए। यही हाल फूलपुर के दुबे पूरा गांव का है। गांव की आबादी करीब 100 लोगों की है। वर्ष 2017-18 में इस गांव में केवल खंभे लगाकर छोड़ दिए गए थे। मगर इन खंभों पर आज तक न तार खींचे गए और न ट्रांसफाॅर्मर लगा। अधीक्षण अभियंता घनश्याम दावा करते हैं कि जिले के सभी गांवों में विद्युतीकरण हो चुका है।
पूर्वांचल में विद्युतीकरण से वंचित आबादी
| जिला | मजरा/ बस्ती | आबादी |
| सोनभद्र | 108 | 10000 |
| मिर्जापुर | 10 | 1200 |
| गाजीपुर | 03 | 2500 |
| भदोही | 02 | 500 |
| बलिया | 61 | 800 |
| जाैनपुर | 02 | 1000 |
| मऊ | 03 | 750 |
| आजमगढ़ | 02 | 300 |