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वाराणसी जिले के अस्पतालों में जांच पर संकट: कहीं केमिकल का इंतजार..कहीं उपकरण तो कहीं संसाधन नहीं

Sun, 19 Jun 2022 04:26 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 19 Jun 2022 04:26 PM IST
सार

वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सभी तरह की जांच की सुविधाएं मिल सके, इसके लिए मशीनें तो मंगाई गई हैं लेकिन इनका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कई ऐसी मशीनें हैं, जो विशेषज्ञ या जरूरी उपकरण न होने से बेकार पड़ी हैं। 

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Crisis on tests in hospitals of Varanasi district waiting for chemical somewhere  equipment and somewhere no resources
मंडलीय अस्पताल में बेकार पड़ी जांच मशीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सभी तरह की जांच की सुविधाएं मिल सके, इसके लिए मशीनें तो मंगाई गई हैं लेकिन इनका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कई ऐसी मशीनें हैं, जो विशेषज्ञ या जरूरी उपकरण न होने से बेकार पड़ी हैं। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है।
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इस तरह की स्थिति तब है जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश कुमार पाठक अस्पतालों का दौरा कर अधिकारियों को सुविधाओं की मानीटरिंग करते रहने का निर्देश दिया है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो जांच की मशीनें मानीटरिंग के अभाव में आए दिन खराब रहती हैं।
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दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में एक्सरे मशीन का रिमोट नहीं
दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में रोजाना ओपीडी, इमरजेंसी मिलाकर करीब एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। पहले यहां दांतों और मसूड़ों में सूजन या अन्य कोई समस्या होने पर मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं थी। पिछले महीने स्वास्थ्य मंत्री के सामने मामला आया तो दीनदयाल अस्पताल में दंत चिकित्सा की ओपीडी तो शुरू हुई लेकिन मरीजों को जरूरत पड़ने पर यहां एक्सरे नहीं हो पा रहा है।
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ओपीडी में एक्सरे मशीन भी है लेकिन इसको चलाने के लिए रिमोट नहीं है। ऐसे में लंबे समय से जांच ठप पड़ी है। यहीं नहीं मरीजों की जांच के लिए तीन डेंटल चेयर भी हैं लेकिन केवल एक पर ही जांच होती है। ऐसा इसलिए कि यहां दंत चिकित्सक और अन्य स्टाफ नहीं है। क्योंकि स्वीकृत पद के हिसाब से दंत चिकित्सक और अन्य कर्मचारी नहीं हैं।

सीटी स्कैन मशीन खराब

दीनदयाल अस्पताल में लंबे समय से सीटी स्कैन मशीन खराब है। किसी तरह पीपीपी मॉडल पर सीटी स्कैन जांच कराई जा रही है। ट्रामा सेंटर में डिजिटल एक्सरे मशीन भी मेंटनेंस के अभाव में बंद पड़ी है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके सिंह के अनुसार रिमोट मंगाए जाने के साथ ही डेंटल ओपीडी में एक चिकित्सक की भी तैनाती की प्रक्रिया चल रही है, जिससे मरीजों को जांच में कोई दिक्कत न हो।

मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में पांच साल से शो पीस बनी है एनालाइजर मशीन
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा की पैथालॉजी में खून के साथ ही शुगर, लीवर फंक्शन टेस्ट, शुगर आदि की जांच के लिए हर दिन मरीजों की भीड़ लगी रहती है। मरीजों की सहूलियत के लिए यहां टोकन सिस्टम की व्यवस्था भी है लेकिन यहां मशीन की कमी की वजह से जांच प्रभावित हो रही है।

मरीजों को खून की जांच की बेहतर रिपोर्ट मिल सके, इसके लिए यहां नवंबर 2017 में ही एनालाइजर हेमेटोलॉजी मशीन 5 पैरा (आधुनिक तकनीक की मशीन) मंगवाई गई थी। लैब में आने के बाद कुछ दिन तक ही जांच हुई इसके बाद से मशीन पर जांच नहीं हो रही है। इससे जुड़ा एक उपकरण नहीं आने की वजह से जांच का संकट बना है। यह ऐसी मशीन है, जिस पर खून जांच की रिपोर्ट अन्य मशीनों से बेहतर आती है।

एक्सरे, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में घंटे भर का इंतजार

Crisis on tests in hospitals of Varanasi district waiting for chemical somewhere  equipment and somewhere no resources
एक्सरे कक्ष का हाल - फोटो : अमर उजाला

मंडलीय अस्पताल के एक्सरे, अल्ट्रासाउंड केंद्र पर आने वाले मरीजों को जांच और रिपोर्ट मिलाकर करीब एक घंटे तक का इंतजार करना पड़ता है। दरअसल यहां मशीनें तो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के दो स्वीकृत पदों में से केवल एक ही है। इससे काम प्रभावित होता है। एक्सरे कक्ष में दो एक्सरे मशीनें भी हैं लेकिन उन्हें चलाने वालों की कमी है। आम तौर पर एक ही कर्मचारी यहां एक्सरे करता नजर आता है।

इसी कक्ष में ढेर सारी मशीनें और उपकरण एक चादर से ढ़ककर रखी गई हैं। अस्पताल के एसआईसी डॉ. हरिचरण सिंह के अनुसार पैथालॉजी एनालाइजर मशीन के न चलने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो उसे चलवाने की दिशा में हर संभव प्रयास किया जाएगा। एक्सरे केंद्र पर उपकरणों के रखे जाने की बात है तो कुछ मशीनें बेकार हो गई हैं। उनहें नियमानुसार निष्प्रयोज्य मानते हुए रखवाया गया है।

जिला महिला अस्पताल में बिना जांच लौटती हैं गर्भवती महिलाएं

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शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा। - फोटो : अमर उजाला

जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा में हर दिन ओपीडी में 300 से 400 गर्भवती महिलाएं आती हैं। इसके अलावा यहां 100 से अधिक महिलाएं वार्डों में भी भर्ती हैं। हालत यह है कि यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ अगर किसी गर्भवती महिला को खून की जांच लिख रही हैं तो जांच नहीं हो पाती है। अस्पताल में पैथालॉजी लैब भी है, वहां जरूरी स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, जांच की मशीन भी है लेकिन खून की जांच करने के लिए मशीन में जरूरी केमिकल ही खत्म हो गया है।

करीब एक सप्ताह से इस तरह की समस्या बनी हुई है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी बायोकेमिस्ट्री (एलएफटी, केएफटी, शुगर, एसजीपीटी, एसजीओटी, किडनी संबंधी जांच, यूरिया)की जांच नहीं हो पा रही है। केमिकल कब तक आ जाएगा, महिलाओं, उनके परिजनों के सवाल के पूछने पर लैब के कर्मचारी भी कोई सटीक जवाब नहीं दे पाते हैं।

महिला अस्पताल में मरीजों को एक ही जगह स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मिल सके, इसके लिए नेशनल हेल्थ पोर्टल से लिंक करते हुए एक स्क्रीन भी लगवाया गया है। वह भी केवल शोपीस ही बना है। लंबे समय से यह चल नही रहा है। अस्पताल के एसआईसी डॉ.एके श्रीवास्तव ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर केमिकल भी मंगा लिया जाएगा, जिससे कि महिलाओं कल जांच में कोई समस्या न रहे। 

केस-1
मैदागिन निवासी एक महिला मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में पीठ में दर्द की शिकायत लेकर गई। यहां चिकित्सक ने एक्सरे जांच कराने को कहा। इसके बाद एक्सरे पहुंची तो वहां पर्चा जमा करने के करीब डेढ़ घंटे भर बाद जांच हुई और रिपोर्ट मिल सकी। बताया कि मशीन तो दो हैं लेकिन एक्सरे जांच केवल एक कर्मचारी ही कर रहा था।
केस=2
महमूरगंज निवासी एक दस साल के बच्चे के हाथ में चोट लग गई। माता-पिताजी के साथ अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सक ने फ्रैक्चर बताते हुए उसको एक्सरे कराने को कहा। पिताजी बच्चे को लेकर उपर एक्सरे कक्ष गए, जहां करीब एक घंटे बाद उसका एक्सरे हुआ। इसके बाद रिपोर्ट लेकर पिताजी के साथ चिकित्सक को दिखाने गए।
केस-3
जिला महिला अस्पताल में जैतपुरा निवासी एक महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाई। यहां चिकित्सक ने पर्चे पर शुगर, खून की जांच, अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखा। पैथालॉजी पहुंचने पर पता चला कि खून की जांच में भी केवल हीमोग्लोबीन हो पाएगा। शुगर सहित बायोकेमिस्ट्री की जांच नहीं हो पाएगी। कर्मचारियों ने पूछने पर महिला को केमिकल की कमी को वजह बताया।

मरीजों को जांच की सुविधाएं अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क मिल सके, इसके लिए सभी जगहों पर मशीनों की समय-समय पर मानीटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी अगर मशीनें नहीं चल रही हैं तो इस बारे में अस्पतालों के सीएमएस, एसआईसी को पत्र भेजकर खराब मशीनों को बनवाने, केमिकल मंगवाने को कहा जाएगा। ताकि मरीजों को भटकना न पड़े।-डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ
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