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वाराणसी डबल मर्डर: 9 एमएम की पिस्टल का शौक, आठ साल से बेच रहा था मुंगेर में बने असलहे

Sat, 29 Aug 2020 06:22 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 29 Aug 2020 06:22 PM IST
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Varanasi firing murder case: fond of 9mm pistol eight years Was selling in Munger accused
गोली लगने के बाद चेक शर्ट में चंदौली का दीपक जो घायल है, और उससे लिपटा हुआ घायल प्रिंस। बाद में इसकी मौत हो गई। - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी के चौकाघाट में बदमाशों की गोली का शिकार हुआ मकबूल आलम रोड का हिस्ट्रीशीटर अभिषेक सिंह प्रिंस अवैध असलहे और कारतूस का धंधा तो करता ही था, प्रतिबंधित बोर की 9 एमएम की पिस्टल साथ रखने का शौकीन भी था। अभिषेक वर्ष 2012 से अवैध असलहे और कारतूस लाकर वाराणसी सहित पूर्वांचल के जिलों में बेचने के लिए जरायम जगत के गिरोहों के बीच चर्चित था।

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अभिषेक ने बनारस, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर और बिहार के भभुआ, सासाराम, जहानाबाद और मुंगेर के नई उम्र के लड़कों की अच्छी खासी टीम खड़ी कर रखी थी। ये लड़के मुंगेर निर्मित देसी पिस्टल और रिवाल्वर 15 से 17 हजार रुपये में खरीद कर बस या ट्रेन से बनारस लाते थे। इसके बाद अभिषेक के इशारे पर इन्हें बनारस और आसपास के जिलों में 30 से 40 हजार रुपये में बेंचा जाता था।
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बात बिगड़ने पर अभिषेक खुद को अधिवक्ता बताकर पुलिस पर धौंस जमाता और अपने गिरोह के लड़कों का बचाव करता था। अभिषेक के खिलाफ रामनगर थाने में पहली बार वर्ष 2013 में आर्म्स एक्ट और गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

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इसके बाद उसके खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट, हत्या का प्रयास और हत्या सहित अन्य आरोपों में रामनगर और कैंट थाने में मुकदमे दर्ज होते रहे। अभिषेक का जेल आना-जाना भी लगा ही रहा। उधर, अभिषेक की हत्या की सूचना पाकर उसकी पत्नी और मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था।

जमीन विवाद की पंचायत में थी रुचि
अभिषेक रामनगर, रिंग रोड के किनारे और चौबेपुर क्षेत्र में जमीन विवाद की पंचायतों में भी खासा हस्तक्षेप करता था। इसे लेकर कई बार उसका नाम सुर्खियों में आ चुका था। जमीन विवाद की पंचायत में वह वकालत के रसूख का इस्तेमाल करता था।

बताया जाता है कि कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन हुआ और उससे पहले तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी की सख्ती के चलते जिले में गांजा की बिक्री बंद सी हो गई तो अभिषेक ने तस्करों से संपर्क कर चंदौली को गांजा बिक्री का अड्डा बनाया और बनारस सहित आसपास के अन्य जिलों में सप्लाई कराने लगा।

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