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दो सगी बहनों ने फांसी लगाकर जान दी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 24 Nov 2016 02:08 AM IST
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लगा ली फांसी
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शिवपुर थाना क्षेत्र की चांदमारी वीडीए कॉलोनी के एक मकान में दो सगी बहनों सुनीता (45) और निधि (40) ने फंदे पर झूलकर जान दे दी। बुधवार को मकान से दुर्गंध आने पर आसपास के लोगों ने दरवाजा खटखटाया तो नहीं खुला। शिवपुर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर दोनों का शव बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस के अनुसार दोनों बहनों ने दो से तीन दिन पहले आत्महत्या की है। मुहल्ले के लोगों से हुई पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि दोनों के जीविकोपार्जन का कुछ सहारा नहीं था। आर्थिक तंगी से आजिज आकर दोनों ने आत्महत्या की है।
मिर्जापुर के कछवा के मूल निवासी रहे बीएचयू से सेवानिवृत्त लउधर राम ने चांदमारी वीडीए कॉलोनी में मकान बनवाया था। बड़ी बेटी स्नातक उत्तीर्ण सुनीता और एलएलबी पास निधि का उन्होंने कई साल पूर्व विवाह किया लेकिन दोनों अपनी ससुराल छोड़कर मायके में ही रहती थीं। तकरीबन चार साल पहले लउधर राम की मौत हो गई और उनका बेटा अलग होकर बेनियाबाग इलाके में रहने लगा तो दोनोें बहनें अकेली पड़ गईं और उनके जीविकोपार्जन का कोई जरिया नहीं बचा।
पड़ोसियों ने बताया कि आसपास के लोगों की मदद से दोनों को जो मिल जाता था, वही खा लेती थीं और फिर खुद को कमरे में बंद कर लेती थीं। इधर, कई दिन से दोनों को मुहल्ले में देखा नहीं गया था। बुधवार की शाम दोनों के मकान से दुर्गंध आनी शुरू हुई तो सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि सुनीता पंखे के सहारे और निधि रोशनदान के सहारे फंदे से लटक रही थी। सीओ कैंट राजकुमार यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हो सकेगा कि दोनोें ने कितने दिन पहले फांसी लगाई थी। घर की स्थिति और इलाकाई लोगों से मिली जानकारी के आधार पर यही लग रहा है कि दोनों ने आर्थिक तंगी से आजिज आकर आत्महत्या की है।
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मिर्जापुर के कछवा के मूल निवासी रहे बीएचयू से सेवानिवृत्त लउधर राम ने चांदमारी वीडीए कॉलोनी में मकान बनवाया था। बड़ी बेटी स्नातक उत्तीर्ण सुनीता और एलएलबी पास निधि का उन्होंने कई साल पूर्व विवाह किया लेकिन दोनों अपनी ससुराल छोड़कर मायके में ही रहती थीं। तकरीबन चार साल पहले लउधर राम की मौत हो गई और उनका बेटा अलग होकर बेनियाबाग इलाके में रहने लगा तो दोनोें बहनें अकेली पड़ गईं और उनके जीविकोपार्जन का कोई जरिया नहीं बचा।
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पड़ोसियों ने बताया कि आसपास के लोगों की मदद से दोनों को जो मिल जाता था, वही खा लेती थीं और फिर खुद को कमरे में बंद कर लेती थीं। इधर, कई दिन से दोनों को मुहल्ले में देखा नहीं गया था। बुधवार की शाम दोनों के मकान से दुर्गंध आनी शुरू हुई तो सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि सुनीता पंखे के सहारे और निधि रोशनदान के सहारे फंदे से लटक रही थी। सीओ कैंट राजकुमार यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हो सकेगा कि दोनोें ने कितने दिन पहले फांसी लगाई थी। घर की स्थिति और इलाकाई लोगों से मिली जानकारी के आधार पर यही लग रहा है कि दोनों ने आर्थिक तंगी से आजिज आकर आत्महत्या की है।
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