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फसाद की जड़ बनी खतौनी

ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 24 Jun 2016 01:20 AM IST
हरिभानपुर में गुरुवार को मृतक के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे एसडीएम।
हरिभानपुर में गुरुवार को मृतक के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे एसडीएम।
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पैमाइश कराकर पहले ही चहारदीवारी बनवा दी गई होती तो बवाल की नौबत नहीं आती। गहरपुर स्थित जिस जमीन पर शव दफनाने को लेकर हरिभानपुर के दो वर्गों में विवाद हुआ, दरअसल वह खतौनी में कब्रिस्तान दर्ज नहीं है। जबकि, दूसरे पक्ष का दावा है कि यह जमीन काशी नरेश ने कब्रिस्तान के लिए दान में दी थी। दोनों पक्ष इसे लेकर पहले भी कई बार आमने-सामने आ चुके थे लेकिन तब न तो पुलिस ने सक्रियता दिखाई और न तहसील प्रशासन ने। अब बवाल के बाद नए सिरे से जमीन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन ने बताया कि तहसील के मौजूदा अभिलेखों के साथ ही काशी नरेश के जमाने तक के कागजात खंगाले गए हैं। शुक्रवार को फिर जमीन की पैमाइश कराई जाएगी और कब्रिस्तान की चहारदीवारी बनवाई जाएगी। चहारदीवारी निर्माण के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने गुरुवार को मौका मुआयना भी किया।
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बता दें कि शव दफनाने के विवाद में बुधवार को हरिभानपुर में दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई थी। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी जबकि तीन घायल हुए थे, जिनका उपचार चल रहा है। हरिभानपुर के वहाब महबूब, निजामुद्दीन, शौकत, अशफाक की मानें तो 1884 में काशी नरेश ने गहरपुर में कब्रिस्तान के लिए चार बीघा पंद्रह बिस्वा दो धूर जमीन दान की थी। वहीं, निर्मला सिंह, शशिबाला सिंह, बिंदो सिंह, शिवानी सिंह, किरण सिंह ने कहा कि परिवार के पूर्व प्रधान विजयी सिंह समेत चार लोगों के नाम से जमीन है, जो खतौनी में दर्ज है। जिसे कब्रिस्तान बताकर प्रशासन कब्जा करवाना चाहता है।


लेखपाल महेंद्र ने बताया कि गहरपुर में दस एकड़ 49 डिसमिल जमीन है। खतौनी में विजयी सिंह समेत काशी नरेश का नाम है। खतौनी में कब्रिस्तान दर्ज नहीं है लेकिन खसरे में उसका उल्लेख है। एसडीएम राजातालाब के अनुसार 16 बीघा जमीन के चौथाई हिस्से में काशी नरेश का नाम है, जिस पर कब्रिस्तान है और वहां वर्षों से हरिभानपुर के लोगों के शव दफन होते आ रहे हैं। बाकी तीन चौथाई हिस्से में कई खातेदार हैं। विजयी सिंह ने अपने हिस्से की ढाई बीघा जमीन लोेहता भट्ठी के अंजनी मिश्र को बेची थी। जिस जमीन का बैनामा हुआ, वह कब्रिस्तान से सटी हुई है।
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