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संपूर्णानंद विश्वविद्यालय : प्राध्यापक बन नहीं सकते, प्रोफेसर बना दिया

Mon, 10 Apr 2017 10:45 AM IST
amarujala.com- Written by: अनूप ओझा
amarujala.com- Written by: अनूप ओझा Updated Mon, 10 Apr 2017 10:45 AM IST
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Sampurnanand Sanskrit University : Can not become Teacher, appointed as a Professor
sampurnanand university - फोटो : अमर उजाला

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर फर्जीवाड़ा के जरिए नियुक्ति का खुलासा हुआ है। जिसके पास प्राध्यापक बनने तक की योग्यता नहीं थी, उसे न केवल तैनाती दी गई, बल्कि प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति भी दे दी गई।

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मामले में अब तक 73.83 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पर प्रदेश के महालेखा परीक्षक (एजी) की रिपोर्ट को भी दबा दिया गया। वेतन मद में हुए भुगतान पर वित्त अधिकारी को पत्र लिखकर एजी ने जब आपत्ति जताई, तब कुलपति ने उसी प्रोफेसर को वित्त अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया। एजी की रिपोर्ट शासन तक पहुंच गई है।
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एजी की रिपोर्ट बताती है कि विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉ. प्रेमनारायण सिंह की सेवा पुस्तिका एवं व्यक्तिगत पत्रावली के अनुसार उनकी शिक्षा शास्त्र विभाग के आचार्य पद पर नियुक्ति 2 अप्रैल, 2001 को की गई थी।
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राज्यपाल को शिकायत भेजकर सुग्रीव मिश्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्राध्यापक पद के लिए नियमानुसार स्नातक में 50 प्रतिशत और बीएड में 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।

डॉ. प्रेमनारायण सिंह के बीएड में 53 प्रतिशत और स्नातक (शास्त्री) में 49.7 प्रतिशत अंक हैं। नियुक्ति नियम विरुद्ध, कूटरचित अभिलेखों के आधार पर की गई है।  एजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुलसचिव ने एक शिकायती पत्र के आधार पर प्रेम नारायण सिंह की शैक्षणिक योग्यता संबंधी अभिलेखीय साक्ष्य मांगे थे। 

कुलपति-रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी की भूमिका संदिग्ध

Sampurnanand Sanskrit University : Can not become Teacher, appointed as a Professor
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एजी ने कहा है कि कुलपति के आदेश के बाद भी डॉ. प्रेमनारायण ने अपनी डिग्रियों की छायाप्रति उपलब्ध नहीं कराई। 24 नवंबर, 2016 को जारी एजी की रिपोर्ट को दरकिनार कर डॉ. प्रेमनारायण सिंह को वित्त अधिकारी भी बना दिया गया है।

यही नहीं, विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध शैक्षणिक विवरण के अनुसार डॉ. प्रेम नारायण सिंह द्वारा एक ही वर्ष में दो से तीन डिग्री लेने की पुष्टि होती है। एजी ने कहा है कि एक ही वर्ष में दो डिग्रियों की जानकारी के बाद की गई कार्रवाई तथा वेतन, भत्तों के मद में भुगतान का विवरण भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने उपलब्ध नहीं कराया है।

कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे के ओएसडी राजेंद्र मिश्र ने दावा कि एजी की रिपोर्ट उनको प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने माना कि निर्देश मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने डॉ. सिंह के पक्ष के साथ रिपोर्ट राजभवन को भेज दी है।


प्रेमनारायण सिंह पर अभी तक आरोप तय नहीं हैं। वित्त अधिकारी नहीं होने से काम प्रभावित हो रहा था, इस वजह से उनको प्रभार दिया गया है। एजी की रिपोर्ट पर जल्द कदम उठाए जाएंगे। - प्रो. यदुनाथ दुबे, कुलपति

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