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आरएस यादव ने महिला के नाम खरीदी जमीनी, चार घंटे में अपने नाम कराया

Thu, 29 Jun 2017 12:20 PM IST
amarujala.com, written by अजीत कुमार सिंह
amarujala.com, written by अजीत कुमार सिंह Updated Thu, 29 Jun 2017 12:20 PM IST
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RS Yadav bought land in woman name, made her name in four hours
एआरटीओ आरएस यादव - फोटो : SELF

काला धन सफेद करने के लिए आरएस यादव ने कई हथकंडे अपनाए। पहले वह दूसरों के नाम पर जमीन खरीदता था। बाद में जमीन अपने नाम करा लेता था। दोनों रजिस्ट्री के पैसे वही देता था। पांडेयपुर की आवास विकास कॉलोनी में पौने दो बिस्वा के एक प्लाट का पता चला है।

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बाजार में इसकी मौजूदा कीमत सवा करोड़ के आसपास बताई जा रही है। चंदौली पुलिस को इन तथ्यों की जानकारी हो चुकी है। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है। वाराणसी में सीधे तौर पर यह पहली ऐसी संपत्ति है, जो यादव के नाम है।
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पांडेयपुर में आवास विकास कॉलोनी का ऐसा ही एक मामला सामने आया है। 26 दिसंबर, 2011 को उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने पांडेयपुर, स्वामी विवेकानंद नगर की रहने वाले किरण कुमारी सिन्हा को पौने दो बिस्वा (दो सौ वर्ग मीटर) का (तीन ए/13) भूखंड आवंटित किया था।
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कागजात खंगालने पर पता चला है कि रजिस्ट्री के लिए यादव ने डिमांड ड्राफ्ट दिया था। डिमांड ड्राफ्ट छावनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से बनवाया गया। आवास विकास ने यादव के पैसे देने पर कोई आपत्ति नहीं की जबकि नियमत: रजिस्ट्री के पैसे किरण या उनके परिवार के किसी सदस्य को देने चाहिए थे।

इसी दिन यानी 26 दिसंबर, 2011 को किरण ने इस प्लाट की रजिस्ट्री यादव के नाम कर दी। सरकारी कागजात के मुताबिक किरण ने यादव को यह प्लॉट 21 लाख रुपये में बेचा। एक लाख 47 हजार का स्टांप लगाया गया था। इस जमीन की मौजूदा कीमत करीब 80 लाख रुपये है।

15 दिन बाद शासन ने जांच विजिलेंस को सौंपी

RS Yadav bought land in woman name, made her name in four hours
rs yadav - फोटो : अमर उजाला

एक ही दिन हुई दोनों रजिस्ट्री में आरएस यादव का चालक महेंद्र मौर्या गवाह है। ये वही महेंद्र मौर्या है, जो छावनी क्षेत्र स्थित 50 करोड़ के होटल वेस्ट इन का मालिक है। पिछले 15 दिन से पुलिस उसे तलाश रही है। पुलिस को यह भी पता चला है कि आवास विकास कॉलोनी में ही उक्त प्लॉट के पास ही यादव के परिवार के दो अन्य लोगों के भूखंड हैं।

तीनों प्लॉट को मिलाकर एक आलीशान कोठी बनाने की योजना थी। मामले में आवास विकास परिषद भी जांच के दायरे में है। दरअसल, यादव सरकारी कर्मचारी होने के नाते आवास विकास परिषद से प्लाट खरीदता तो उसे तमाम औपचारिकताएं पूरी करनी होतीं।

आवास विकास परिषद के परियोजना प्रबंधक जेके कौशल कहते हैं कि एक ही दिन में प्लाट का आवंटन कराना और फिर उसे किसी और को बेच देना काफी मुश्किल है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता एवं गरीब, दलित, शोषित समाज के अध्यक्ष राकेश न्यायिक ने उक्त भूमि के रजिस्ट्री के कागजात आरएस यादव के मुकदमे की जांच कर रहे सीओ चकिया प्रदीप सिंह चंदेल को सौंपा है।

उधर, जेल में बंद चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव के भ्रष्टाचार की जांच के लिए शासन ने विजलेंस को रिपोर्ट भेज दी है। चंदौली पुलिस ने अवैध वसूली के मामले में आरएस यादव को जौनपुर के मछलीशहर से गिरफ्तार कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला उजागर किया था। जल्द ही इस मामले में विजलेंस जांच शुरू करेगी।

 

आरएस यादव के भ्रष्टाचार के खुलासे और अवैध तरीके से अर्जित की गई अकूत संपत्ति के मामले में चंदौली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। चंदौली पुलिस ने मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराने की बात गृह विभाग से की थी।

 

गृह विभाग की ओर से बताया गया था कि विजलेंस से जांच कराई जाएगी लेकिन गृह विभाग ने विजलेंस से जांच कराए जाने की संस्तुति करने में 15 दिन लगा दिए। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा ने बताया कि एआरटीओ के भ्रष्टाचार की जांच विजलेंस से कराने की संस्तुति कर दी गई है। संबंधित दस्तावेज भी विजलेंस को भेज दिए गए हैं।

 

मालूम हो कि इसी महीने के शुरुआत में चंदौली पुलिस ने ट्रकों से वसूली करते हुए आरटीओ के एक सिपाही को गिरफ्तार किया था। सिपाही ने बताया था कि वह एआरटीओ आरएस यादव के लिए वसूली करता है। इसके बाद एआरटीओ आरएस यादव पर पुलिस ने शिकंजा कसते हुए मछलीशहर से गिरफ्तार कर लिया। अब विजलेंस को यह जांच सौंप दी गई है।

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