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पुलिस-प्रशासन में ठनी, किसी तरह हुई पैमाइश
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 25 Jun 2016 01:32 AM IST
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कपसेठी थाना क्षेत्र के गहरपुर में शुक्रवार को कब्रिस्तान की जमीन की पैमाइश कराने को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों में ही ठन गई। मामला बढ़ता देख जिलाधिकारी को हस्तक्षेप करना पड़ा, तब पैमाइश का काम शुरू हुआ। हालांकि इस दौरान एक ही पक्ष के लोग मौजूद थे।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सीताराम गुप्ता के साथ एसपी ग्रामीण आशीष तिवारी, नौ थानाध्यक्ष और एक कंपनी पीएसी के साथ गहरपुर में पैमाइश कराने पहुंचे थे। पैमाइश शुरू होने के पूर्व एसपी ग्रामीण ने एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन राम को मौके से हटा दिया। इससे नाराज एसडीएम विरोध करते हुए दूर चले गए। एसडीएम के हटते ही हरिभानपुर के वहाब अली के साथ आए लोगों ने पैमाइश कराने से इंकार कर दिया। वहाब ने अफसरों से कहा कि एसडीएम नहीं रहेंगे तो हम पैमाइश स्थल पर नहीं जाएंगे। इस पर एडीएम और एसपी ग्रामीण ने एसडीएम को मौके पर बुलाया लेकिन उन्होंने आने से इंकार कर दिया।
इसके बाद एसपी ग्रामीण ने मामले की जानकारी डीएम विजय किरन आनंद को दी। फिर डीएम के आदेश पर एसडीएम और वहाब सहित अन्य लोग पैमाइश स्थल पर गए, तब विवादित स्थल आराजी नंबर 251 रकबा 10 एकड़ 49 डिसमिल की पैमाइश की गई। इस बारे में एसपी ग्रामीण का कहना है कि किसी अधिकारी को हटाया नहीं गया था, हम सभी साथ थे। पैमाइश हो गई है, नक्शे का काम अभी फाइनल नहीं हुआ।
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दोनों पक्षों को नक्शा दिखाकर उनकी राय और सहमति के आधार पर मामले का निस्तारण कराया जाएगा। उधर, एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि एसपी ग्रामीण ने हमें मौके से हटा दिया था। डीएम के आदेश पर पुन: पैमाइश स्थल पर गया। इसके बाद मिलकर पैमाइश कराई गई।
सबकी जुबां पर एक सवाल, एसडीएम ने जमीन पर क्यों चलाया फावड़ा
हरिभानपुर, गहरपुर, जगतीपुर, कालिका धाम, गैरहा, तारापुर और बाराडीह के लोगों की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिरकार एसडीएम ने विवादित स्थल पर फावड़ा क्यों चलाया। बुजुर्गों की बात सुनने की बजाय उन्हें डांट कर क्यों भगाया। शुक्रवार को गहरपुर में पैमाइश के दौरान पुलिस से लेकर सभी की जुबान पर एसडीएम द्वारा फावड़ा चलाए जाने की चर्चा होती रही।
ग्रामीणों के अनुसार हरिभानपुर निवासी सुलेमान की पत्नी नसीरुन के इंतकाल के बाद बुधवार को गहरपुर के कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर हुए विवाद के बाद एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन ने मौके पर पहुंच कर फावड़ा चलाने के साथ ही बुजुर्गों को डांटकर भगा दिया था। इसके बाद मामले ने इतना तूल पकड़ा कि दो वर्गों के बीच मारपीट के बाद हत्या हो गई। लोगों का कहना था कि एक प्रशासनिक अधिकारी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। हालांकि, एसडीएम ने इन बातों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मैं तो मामले का निबटारा कराने का प्रयास कर रहा था।
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अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सीताराम गुप्ता के साथ एसपी ग्रामीण आशीष तिवारी, नौ थानाध्यक्ष और एक कंपनी पीएसी के साथ गहरपुर में पैमाइश कराने पहुंचे थे। पैमाइश शुरू होने के पूर्व एसपी ग्रामीण ने एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन राम को मौके से हटा दिया। इससे नाराज एसडीएम विरोध करते हुए दूर चले गए। एसडीएम के हटते ही हरिभानपुर के वहाब अली के साथ आए लोगों ने पैमाइश कराने से इंकार कर दिया। वहाब ने अफसरों से कहा कि एसडीएम नहीं रहेंगे तो हम पैमाइश स्थल पर नहीं जाएंगे। इस पर एडीएम और एसपी ग्रामीण ने एसडीएम को मौके पर बुलाया लेकिन उन्होंने आने से इंकार कर दिया।
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इसके बाद एसपी ग्रामीण ने मामले की जानकारी डीएम विजय किरन आनंद को दी। फिर डीएम के आदेश पर एसडीएम और वहाब सहित अन्य लोग पैमाइश स्थल पर गए, तब विवादित स्थल आराजी नंबर 251 रकबा 10 एकड़ 49 डिसमिल की पैमाइश की गई। इस बारे में एसपी ग्रामीण का कहना है कि किसी अधिकारी को हटाया नहीं गया था, हम सभी साथ थे। पैमाइश हो गई है, नक्शे का काम अभी फाइनल नहीं हुआ।
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दोनों पक्षों को नक्शा दिखाकर उनकी राय और सहमति के आधार पर मामले का निस्तारण कराया जाएगा। उधर, एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि एसपी ग्रामीण ने हमें मौके से हटा दिया था। डीएम के आदेश पर पुन: पैमाइश स्थल पर गया। इसके बाद मिलकर पैमाइश कराई गई।
सबकी जुबां पर एक सवाल, एसडीएम ने जमीन पर क्यों चलाया फावड़ा
हरिभानपुर, गहरपुर, जगतीपुर, कालिका धाम, गैरहा, तारापुर और बाराडीह के लोगों की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिरकार एसडीएम ने विवादित स्थल पर फावड़ा क्यों चलाया। बुजुर्गों की बात सुनने की बजाय उन्हें डांट कर क्यों भगाया। शुक्रवार को गहरपुर में पैमाइश के दौरान पुलिस से लेकर सभी की जुबान पर एसडीएम द्वारा फावड़ा चलाए जाने की चर्चा होती रही।
ग्रामीणों के अनुसार हरिभानपुर निवासी सुलेमान की पत्नी नसीरुन के इंतकाल के बाद बुधवार को गहरपुर के कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर हुए विवाद के बाद एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन ने मौके पर पहुंच कर फावड़ा चलाने के साथ ही बुजुर्गों को डांटकर भगा दिया था। इसके बाद मामले ने इतना तूल पकड़ा कि दो वर्गों के बीच मारपीट के बाद हत्या हो गई। लोगों का कहना था कि एक प्रशासनिक अधिकारी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। हालांकि, एसडीएम ने इन बातों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मैं तो मामले का निबटारा कराने का प्रयास कर रहा था।