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किशोरी के साथ दुष्कर्म के जुर्म में एक को सात, दो को तीन वर्ष की कैद
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Thu, 09 Mar 2017 07:34 PM IST
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बहलाकर ले जाने के बाद तीन लोगों ने लूटी थी अस्मत
आजमगढ़ जिले के सरायमीर क्षेत्र के एक गांव में दिसंबर 2007 में एक किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में कोर्ट ने तीन लोगों को सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश बीके त्यागी की अदालत ने एक को सात वर्ष की कैद, आठ हजार रुपये जुर्माना और अन्य दो को तीन वर्ष की कैद के साथ कुल 10-10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
इसी मामले के एक आरोपी मुमताज की मुकदमा कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी।
सरायमीर क्षेत्र के एक गांव में 26 दिसंबर 2007 को गांव की एक किशोरी को कुछ लोग बहला-फूसलाकर भगा ले गए और उसके साथ दुराचार किया था। अदालत के आदेश पर इस मामले में सरायमीर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
इसमें दुष्कर्म की पीड़ित किशोरी की मां ने नंदाव गांव निवासी नय्यर, सज्जाद, शाह आलम और मुमताज के विरुद्ध आरोप लगाया। पीड़िता की मां ने कहा था कि सज्जाद उसकी बेटी से अपने लड़के हासिम की शादी करना चाहता था।
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वह अच्छा आदमी नहीं था, इसलिए अपनी लड़की की शादी करने से मना कर दिया। मना करने पर सज्जाद बराबर धमकी देता था।
घटना के दिन सज्जाद पुत्र इसहाक, शाह आलम पुत्र झन्नू, नय्यर पुत्र शाह आलम और मुमताज पुत्र बासू उसकी लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले गए। जाते समय गांव के कई लोगों ने देखा था। पीड़िता अपने साथ एक लाख रुपये के जेवरात और दस हजार रुपये नगद भी ले गई। जिसे उसके घरवाले दूसरी लड़की की शादी के लिए रखे थे।
इस मामले पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने पीड़िता समेत कुल पांच गवाहों केे अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने सुनवाई के बाद तीन को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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इसी मामले के एक आरोपी मुमताज की मुकदमा कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी।
सरायमीर क्षेत्र के एक गांव में 26 दिसंबर 2007 को गांव की एक किशोरी को कुछ लोग बहला-फूसलाकर भगा ले गए और उसके साथ दुराचार किया था। अदालत के आदेश पर इस मामले में सरायमीर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
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इसमें दुष्कर्म की पीड़ित किशोरी की मां ने नंदाव गांव निवासी नय्यर, सज्जाद, शाह आलम और मुमताज के विरुद्ध आरोप लगाया। पीड़िता की मां ने कहा था कि सज्जाद उसकी बेटी से अपने लड़के हासिम की शादी करना चाहता था।
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वह अच्छा आदमी नहीं था, इसलिए अपनी लड़की की शादी करने से मना कर दिया। मना करने पर सज्जाद बराबर धमकी देता था।
घटना के दिन सज्जाद पुत्र इसहाक, शाह आलम पुत्र झन्नू, नय्यर पुत्र शाह आलम और मुमताज पुत्र बासू उसकी लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले गए। जाते समय गांव के कई लोगों ने देखा था। पीड़िता अपने साथ एक लाख रुपये के जेवरात और दस हजार रुपये नगद भी ले गई। जिसे उसके घरवाले दूसरी लड़की की शादी के लिए रखे थे।
इस मामले पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने पीड़िता समेत कुल पांच गवाहों केे अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने सुनवाई के बाद तीन को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।