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आतंकवादी ने वकील से कहा-खर्च की चिंता न करें, काम होना चाहिए

Tue, 06 Jun 2017 02:11 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Tue, 06 Jun 2017 02:11 PM IST
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Jaunpur terrorist said to the lawyer do not worry about the cost, the job should be
terrorist - फोटो : Demo Photo

नैनी जेल में बंद श्रमजीवी विस्फोट कांड में फांसी की सजा पाए बांग्लादेशी आतंकी रोनी उर्फ आलमगीर ने जौनपुर दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता श्याम शंकर तिवारी (जिन्होंने बतौर न्याय मित्र उसके मुकदमे की पैरवी की थी) से उन गवाहों के टाइपशुदा बयान की मांग की है जिनकी उसकी सजा में अहम भूमिका थी।

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अधिवक्ता को जेल से भेजे पत्र में उसने लिखा है कि आपने मुझे अपना बेटा बोला था इसलिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को दरखास्त दीजिए कि केस का फैसला तब तक न किया जाए जब तक मेरे केस के पार्टनरों का सेशन कोर्ट से फैसला न हो जाए।
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उसके कहने का तात्पर्य विस्फोट कांड के दो अन्य आरोपी हिलाल व नफीकुल से है। कहा कि पूरी फाइल की कॉपी एवं 14 अहम गवाहों के टाइपशुदा बयान आदि में जो भी खर्च लगे आप उसकी परवाह मत करिए पैसे की वजह से काम मत रोकिएगा । अपना बेटा समझकर काम करिए।
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उसने अधिवक्ता श्याम शंकर को एडवोकेट फैजान के साथ नैनी जेल मिलने के लिए बुलाया है । यह जानकारी अधिवक्ता श्याम शंकर ने दी है। उल्लेखनीय है कि 28 जुलाई 2005 को हुए श्रमजीवी विस्फोट कांड में एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी और 62 लोग घायल हुए थे।

इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम द्वारा रोनी व ओबैदुर्रहमान को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। दोनों ने हाईकोर्ट में अपील की है। इस केस में रोनी के मुकदमे की पैरवी कोर्ट के आदेश पर न्याय मित्र श्याम शंकर तिवारी एडवोकेट ने की थी।


पहले भी लिख चुका है चिट्ठी

 आतंकवादी रोनी ने पिछली बार अधिवक्ता को दीवानी न्यायालय में जो चिट्ठी भेजी थी उसमें कट्टरपंथी संगठन के वकीलों द्वारा आतंकवादी के मुकदमे की पैरवी का जिक्त्रस् था। उसने कट्टरपंथी संगठन से जुड़े अधिवक्ताओं द्वारा दिल्ली में उसके मुकदमे की पैरवी के दौरान दलाली व कारनामे देखने की बात का हवाला दिया था।

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