{"_id":"21a2473caae309db76e734e75ff53563","slug":"ips-s-gunner-formed-criminal-gang-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" आईपीएस के गनर ने बनाया लुटेरों का गिरोह ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आईपीएस के गनर ने बनाया लुटेरों का गिरोह
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Updated Fri, 16 Jan 2015 01:23 AM IST
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सोना कारोबारियों को लूटने के लिए पूर्वांचल में सक्रिय गिरोह में पुलिसवाले भी शामिल हैं। एक आईपीएस अधिकारी के गनर ने लुटेरों का गिरोह बनाया है। गिरोह के सदस्य वाणिज्य कर अधिकारी बनकर सराफ ा कारोबारियों को लूटते थे।
सराफा कारोबारी बागाराम माली से हुई लाखों की लूट में क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़े आईपीएस अधिकारी के गनर समेत तीन सिपाहियों से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। गिरोह के सरगना सुधीर श्रीवास्तव का मामा रितेश श्रीवास्तव सिपाही है, जो लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात था। क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के पीछे कहीं कोई और मास्टर माइंड तो नहीं है।
सराफा कारोबारी से लूट में साजिशकर्ता और तीन सिपाहियों समेत कुल सात बदमाशों को क्राइम ब्रांच ने दबोचा है। वाणिज्य कर अधिकारी बनकर सराफा कारोबारी को लूटने वाले तीनों सिपाहियों में नरसिंह प्रताप सिंह वाराणसी में तैनात एक आईपीएस गनर था और गिरिजेश कुमार सिंह यहीं के एक सीओ का गनर था। जबकि रितेश कु़मार श्रीवास्तव लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात था। वह भी पहले किसी बड़े अफसर का गनर रह चुका है।
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क्राइम ब्रांच के मुताबिक तीनों ने मिलकर गिरोह खड़ा किया। रितेश के भांजे चौबेपुर के सोनबरसा निवासी सुधीर को गिरोह की कमान दी गई। सराफा कारोबारी बागाराम के साथी तोलाराम को उन्होंने अपना मुखबिर बनाया। उसका काम सराफा कारोबारियों के बारे में सूचनाएं देना था। लूट के दौरान ये पुलिस वाले अपनी वर्दी में होने के साथ ही सरकारी असलहे लेकर मौके पर पहुंचते थे, जिससे सराफा कारोबारियों को एकबारगी शक नहीं होता था।
गिरफ्तार बदमाशों ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में बताया कि मुंबई से जब भी कोई सराफा कारोबारी सोना लेकर चलता था तो उसकी सूचना गिरोह के लोगों को तोलाराम के जरिए मिलती थी। जिसके बाद लुटेरे वाणिज्य कर अधिकारी बनकर व्यापारी को ट्रेस कर लेते थे और उसे पकड़कर पूछताछ करते और सोना जब्त करने की बात कहकर माल लेकर वहां से निकल जाते थे।
चूंकि सराफा कारोबारियों के अपने माल का किसी प्रकार का कोई कागजात नहीं होता था इस वजह से वे पुलिस में शिकायत नहीं करते थे। लूट के सोने को चौबेपुर में सुधीर के यहां गलाया जाता था और गला माल तोलाराम के जरिए बेचकर लुटेरे रकम आपस में बांटते थे। लुटेरों ने बताया कि डेढ़ साल में दर्जन भर से अधिक सराफा कारोबारियों को उन्होंने इसी तरह लूटा।
डीआईजी ने दिए विभागीय कार्रवाई के आदेश
लूट में शामिल तीनों सिपाहियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। डीआईजी एसके भगत ने कहा कि गिरफ्तार बदमाशों को रिमांड पर लिया जाएगा। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश एसएसपी को दिया गया है। इन्हें बर्खास्त किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई दूसरा पुलिसकर्मी ऐसी जुर्रत न कर सकें। पहले इस तरह हुई लूट की घटनाओं में किसी ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई है। पीडि़त सराफा कारोबारी अगर तहरीर देंगे तो केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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सराफा कारोबारी बागाराम माली से हुई लाखों की लूट में क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़े आईपीएस अधिकारी के गनर समेत तीन सिपाहियों से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। गिरोह के सरगना सुधीर श्रीवास्तव का मामा रितेश श्रीवास्तव सिपाही है, जो लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात था। क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के पीछे कहीं कोई और मास्टर माइंड तो नहीं है।
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सराफा कारोबारी से लूट में साजिशकर्ता और तीन सिपाहियों समेत कुल सात बदमाशों को क्राइम ब्रांच ने दबोचा है। वाणिज्य कर अधिकारी बनकर सराफा कारोबारी को लूटने वाले तीनों सिपाहियों में नरसिंह प्रताप सिंह वाराणसी में तैनात एक आईपीएस गनर था और गिरिजेश कुमार सिंह यहीं के एक सीओ का गनर था। जबकि रितेश कु़मार श्रीवास्तव लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात था। वह भी पहले किसी बड़े अफसर का गनर रह चुका है।
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क्राइम ब्रांच के मुताबिक तीनों ने मिलकर गिरोह खड़ा किया। रितेश के भांजे चौबेपुर के सोनबरसा निवासी सुधीर को गिरोह की कमान दी गई। सराफा कारोबारी बागाराम के साथी तोलाराम को उन्होंने अपना मुखबिर बनाया। उसका काम सराफा कारोबारियों के बारे में सूचनाएं देना था। लूट के दौरान ये पुलिस वाले अपनी वर्दी में होने के साथ ही सरकारी असलहे लेकर मौके पर पहुंचते थे, जिससे सराफा कारोबारियों को एकबारगी शक नहीं होता था।
गिरफ्तार बदमाशों ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में बताया कि मुंबई से जब भी कोई सराफा कारोबारी सोना लेकर चलता था तो उसकी सूचना गिरोह के लोगों को तोलाराम के जरिए मिलती थी। जिसके बाद लुटेरे वाणिज्य कर अधिकारी बनकर व्यापारी को ट्रेस कर लेते थे और उसे पकड़कर पूछताछ करते और सोना जब्त करने की बात कहकर माल लेकर वहां से निकल जाते थे।
चूंकि सराफा कारोबारियों के अपने माल का किसी प्रकार का कोई कागजात नहीं होता था इस वजह से वे पुलिस में शिकायत नहीं करते थे। लूट के सोने को चौबेपुर में सुधीर के यहां गलाया जाता था और गला माल तोलाराम के जरिए बेचकर लुटेरे रकम आपस में बांटते थे। लुटेरों ने बताया कि डेढ़ साल में दर्जन भर से अधिक सराफा कारोबारियों को उन्होंने इसी तरह लूटा।
डीआईजी ने दिए विभागीय कार्रवाई के आदेश
लूट में शामिल तीनों सिपाहियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। डीआईजी एसके भगत ने कहा कि गिरफ्तार बदमाशों को रिमांड पर लिया जाएगा। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश एसएसपी को दिया गया है। इन्हें बर्खास्त किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई दूसरा पुलिसकर्मी ऐसी जुर्रत न कर सकें। पहले इस तरह हुई लूट की घटनाओं में किसी ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई है। पीडि़त सराफा कारोबारी अगर तहरीर देंगे तो केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।