बीएचयू के सहायक प्रोफेसर फर्जी प्रमाण पत्र लेने में फंसे, एससी-एसटी आयोग ने दिए जांच के आदेश
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में समाज शास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर मनोज वर्मा व उनके भाई अरविंद कुमार पर अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ लेकर पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप करने का आरोप है। चंदौली निवासी अनंत नारायण मिश्र की शिकायत पर राज्य अनुसूचित जाति जनजाति (एससी-एसटी) आयोग ने अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी को जांच कर 30 अक्तूबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष बृजलाल के अनुसार, शिकायत में कहा गया है कि मनोज वर्मा व अरविंद कुमार मूलत: (पिछड़ी) कहार जाति के हैं, जबकि मनोज व उनके पिता कन्हैया प्रसाद ने सोनभद्र से खरवार जाति का प्रमाण पत्र बनवाया है। आयोग को दिए दस्तावेज में मनोज व उनका परिवार खरवार जाति का न होकर कहार जाति का है।
आरोप है कि गलती छिपाने के लिए मनोज वर्मा ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व हेड अरविंद कुमार जोशी, अनंत नारायण मिश्र व अन्य के खिलाफ वाराणसी के लंका थाने में 28 जनवरी 2019 को एससी-एसटी व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
अध्यक्ष ने बताया कि जाति छिपाना एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 का दुरुपयोग है। इस मामले में एडीजी को कन्हैया प्रसाद के पूर्व व मौजूदा गांव के दस्तावेजों की जांच कर मनोज वर्मा को अनुसूचित जाति के आधार पर विश्वविद्यालय में नौकरी मिलने के दस्तावेज की जांच कर साक्ष्य एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं। आरोप सही मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।