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आजमगढ़ में मुठभेड़, एसटीएफ ने जयहिंद को दबोचा
ब्यूरो/अमर उजाला वाराण्ासी
Updated Thu, 06 Aug 2015 02:23 AM IST
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एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने मंगलवार की रात आजमगढ़ जिले के बिंद्रा बाजार के पास मुठभेड़ के बाद तरवां निवासी जयहिंद यादव को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, 50 हजार का इनामी बदमाश धर्मेंद्र सिंह मौके से भाग निकला। धर्मेंद्र के शूटर जयहिंद ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह और धर्मेंद्र वाराणसी में सनी गिरोह के संपर्क में थे। वह जल्द ही वाराणसी में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने वाले थे। इसी बीच मुठभेड़ में सनी मार दिया गया।
सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के बाद एसटीएफ के इंस्पेक्टर शैलेश सिंह, सुनील कुमार वर्मा समेत टीम मंगलवार की दोपहर ही आजमगढ़ पहुंच गई थी। सूचना थी कि तरवां के कोटियां निवासी धर्मेंद्र और तरवां के भगवानपुर निवासी जयहिंद यादव रात में बिंद्रा बाजार में किसी घटना को अंजाम देने वाले हैं। पुलिस ने रात में ही घेरेबंदी कर दी। बाइक से जा रहे धर्मेंद्र और जयहिंद को रुकने का इशारा किया गया तो उन्होंने फायर कर दिया। पुलिस ने घेरेबंदी कर जयहिंद को गिरफ्तार कर लिया लेकिन धर्मेंद्र भाग निकला।
जयहिंद ने पूछताछ में बताया कि गैंग के सरगना सुजीत सिंह के जेल जाने के बाद आशीष चौबे गिरोह चलाता था। 16 जून को वाराणसी में आशीष के मारे जाने के बाद धर्मेंद्र गिरोह का सरगना बन गया। गैंग ने आजमगढ़, बलिया और मऊ में हत्या और लूट की कई घटनाएं की। 14 जुलाई को मऊ के रानीपुर में प्रभुशंकर चौबे की हत्या और 19 जुलाई को चिरैयाकोट में झंडा पांडेय की हत्या उनके गिरोह ने ही की थी। तीन अन्य हत्याएं भी करने की योजना थी। 29 जुलाई को वाराणसी में मंडलीय अस्पताल परिसर में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारे गए रोहित सिंह सनी गिरोह से भी उसके संबंध थे। वह वाराणसी में भी लूट करने वाले थे। बता दें कि आशीष चौबे सिगरा के जय प्रकाश नगर में ही ठिकाना बनाकर रहता था। गोली लगने से उसकी मौत हो गई थी।
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सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के बाद एसटीएफ के इंस्पेक्टर शैलेश सिंह, सुनील कुमार वर्मा समेत टीम मंगलवार की दोपहर ही आजमगढ़ पहुंच गई थी। सूचना थी कि तरवां के कोटियां निवासी धर्मेंद्र और तरवां के भगवानपुर निवासी जयहिंद यादव रात में बिंद्रा बाजार में किसी घटना को अंजाम देने वाले हैं। पुलिस ने रात में ही घेरेबंदी कर दी। बाइक से जा रहे धर्मेंद्र और जयहिंद को रुकने का इशारा किया गया तो उन्होंने फायर कर दिया। पुलिस ने घेरेबंदी कर जयहिंद को गिरफ्तार कर लिया लेकिन धर्मेंद्र भाग निकला।
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जयहिंद ने पूछताछ में बताया कि गैंग के सरगना सुजीत सिंह के जेल जाने के बाद आशीष चौबे गिरोह चलाता था। 16 जून को वाराणसी में आशीष के मारे जाने के बाद धर्मेंद्र गिरोह का सरगना बन गया। गैंग ने आजमगढ़, बलिया और मऊ में हत्या और लूट की कई घटनाएं की। 14 जुलाई को मऊ के रानीपुर में प्रभुशंकर चौबे की हत्या और 19 जुलाई को चिरैयाकोट में झंडा पांडेय की हत्या उनके गिरोह ने ही की थी। तीन अन्य हत्याएं भी करने की योजना थी। 29 जुलाई को वाराणसी में मंडलीय अस्पताल परिसर में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारे गए रोहित सिंह सनी गिरोह से भी उसके संबंध थे। वह वाराणसी में भी लूट करने वाले थे। बता दें कि आशीष चौबे सिगरा के जय प्रकाश नगर में ही ठिकाना बनाकर रहता था। गोली लगने से उसकी मौत हो गई थी।
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