जांच रिपोर्ट : सोनभद्र नरसंहार मामले में उपजिलाधिकारी के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
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सोनभद्र जिले के घोरावल के उभ्भा में जमीन नामांतरण आदेश पारित करने के दौरान अफसरों ने नियमों को ताक पर रख दिया। सहायक अभिलेख अधिकारी एसडीएम राजकुमार ने आदेश करने से पूर्व विपक्षियों की आपत्तियों को भी संज्ञान में लेना जरूरी नहीं समझा।
यह भी जानने की कोशिश नहीं की गई कि यह जमीन सोसायटी के नाम किस तरह से आ गई। राजस्व से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद राजकुमार ने आदेश पारित करने में बड़ा खेल किया है।
अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार की अगुवाई वाली समिति की तीन अगस्त की जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि सहायक अभिलेख अधिकारी राजकुमार ने आशा मिश्रा पत्नी आईएएस प्रभात मिश्रा के 17 अक्टूबर के बैनामे के माध्यम से 18,209 हेक्टेअर भूमि का स्थानांतरण 27 फरवरी को कर दिया।
विक्रेता के पास वह जमीन किस तरह से आई, इसकी भी जांच पड़ताल नहीं की गई। यही नहीं, छह अगस्त 1989 को तत्कालीन एसडीएम के त्रुटिपूर्ण आदेश की जांच करना भी जरूरी नहीं समझा गया। रिपोर्ट में 17 जुलाई को दस आदिवासियों की हत्या का जिम्मेदार सीधे तौर पर उप जिलाधिकारी राजकुमार को ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजकुमार ने निजी हित में नियम विरुद्ध आदेश पारित कर दिया है। ऐसे में इन्हें निलंबित करते हुए राजस्व परिषद से संबद्ध किया जाता है।
राजकुमार पर सोनभद्र में भी होगी एफआईआर :
उपजिलाधिकारी राजकुमार पर सोनभद्र में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। शासन ने रविवार को इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। शासन से जिलाधिकारी को कहा गया है अपने स्तर से राजकुमार के खिलाफ थाने में एफआईआर कराते हुए शासन को भी अवगत कराएं।