फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   ‘देह ही देश’ पुस्तक में महिला उत्पीड़न का दर्द

‘देह ही देश’ पुस्तक में महिला उत्पीड़न का दर्द

Fri, 29 Mar 2019 01:38 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Mar 2019 01:38 AM IST
विज्ञापन
‘देह ही देश’ पुस्तक में महिला उत्पीड़न का दर्द
वाराणसी। बीएचयू महिला महाविद्यालय और प्रगति लेखक संघ के तत्वावधान में पुस्तक देह ही देश पर आयोजित संवाद-परिसंवाद में वक्ताओं ने महिलाओं के उत्पीड़न की चर्चा की। गरिमा श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक में लेखिका ने क्रोएशिया में हुए बलात्कार का जिक्र करते हुए महिलाओं की वर्तमान स्थिति का जिक्र किया है।
विज्ञापन

बीएचयू हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. आशीष त्रिपाठी ने कहा कि देह ही देश साहित्य के अनेक विधाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली एक महत्वपूर्ण रचना है। प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक केवल स्त्री तक सीमित न होकर व्यापक स्तर पर मानवीय संवेदनाओं को उद्घाटित करती है। लेखिका प्रो. गरिमा श्रीवास्तव ने अपने क्रोएशिया प्रवास और वहां हुए 400 से अधिक बलात्कार राहत कैंप की चर्चा की। अध्यक्षता करते हुए महिला महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी ने कहा कि समाज को नई दृष्टि से देखने की किताब है। यौन हिंसा जब किसी स्त्री पर होती है तो वह उसको और निहत्थी करती है। अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. प्रभाकर सिंह ने विषय प्रस्तावना रखी। इस दौरान शोध छात्रा निवेदिता और ज्योति तिवारी, डॉ. वंदना चौबे ने विचार रखे। डॉ. नीरज खरे ने कार्यक्रम का संचालन और प्रो. सुमन जैन ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed