{"_id":"5d85312c8ebc3e93be633c7f","slug":"crime-varanasi-news-vns484946949","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज्य सूचना आयोग का फर्जी सदस्य जेल भेजा गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राज्य सूचना आयोग का फर्जी सदस्य जेल भेजा गया
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वाराणसी। नियमों को धता देकर सरकारी गनर लेकर चलने वाले राज्य सूचना आयोग के फ र्जी सदस्य अभिषेक मिश्रा को शुक्रवार को शिवपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया। अदालत ने अभिषेक को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। आजमगढ़ जिले के मूल निवासी और न्यू कॉलोनी सोयेपुर बेलवा बाबा क्षेत्र में रहने वाले अभिषेक के पास से थाईलैंड की करेंसी और एक मोबाइल बरामद हुआ है।
इंस्पेक्टर शिवपुर इंद्रभूषण सिंह यादव और दरोगा नरेंद्र कन्नौजिया गुरुवार रात शिवपुर चुंगी के पास मौजूद थे। इसी दौरान दरोगा नरेंद्र के मोबाइल पर फ ोन आया। फ ोन करने वाले ने खुद को राज्य सूचना आयोग का सदस्य अभिषेक मिश्रा बताया। अभिषेक ने कहा कि चोरी के आरोप में जिस युवक को शिवपुर पुलिस ने हिरासत में लिया है, उसे तत्काल छोड़ दिया जाए। इस पर इंस्पेक्टर शिवपुर ने अभिषेक को थाने पर बुलाया तो वह सरकारी गनर के साथ आया।
इंस्पेक्टर को अभिषेक पर शक हुआ तो उन्होंने पूछताछ शुरू की और सूचना सीओ कैंट को दी। एएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि अभिषेक कभी खुद को राज्य सूचना आयोग का अध्यक्ष तो कभी सदस्य बता रहा था, लेकिन कोई कागजात नहीं दिखा पाया। लखनऊ से पूछताछ कराई गई तो फ र्जीवाड़े की पुष्टि हो गई। इस पर मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया और गनर को पुलिस लाइन भेज दिया गया। उधर, एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि एएसपी डॉ. अनिल कुमार जांच कर बताएंगे कि अभिषेक को गनर कैसे मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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छह महीने से लेकर चल रहा था गनर
नियमानुसार, डीएम, एसएसपी और सीओ एलआईयू की तीन सदस्यीय समिति सरकारी गनर देने के संबंध में निर्णय लेती है। इस समय जिले के 58 लोगों को गनर मिले हैं। लेकिन अभिषेक को बिना लिखापढ़ी के छह माह पहले पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक ने गनर दे दिया था। प्रतिसार निरीक्षक के अनुसार, अभिषेक खुद को ऊंची पहुंच वाला और राज्य सूचना आयोग का सदस्य बताता था तो उच्चाधिकारियों के मौखिक निर्देश पर गनर दे दिया।
वीडीए से लेकर आरटीओ तक गनर लेकर दिखाता था हनक
एएसपी डॉ. अनिल ने बताया कि गनर लेकर अभिषेक ने सरकारी विभागों में जबरदस्त हनक बनाई थी। गनर देखते ही उसे सरकारी विभागों के अधिकारी भी सम्मान देते थे। इस तरह से अभिषेक मिश्रा वीडीए, आरटीओ और जिला प्रशासन के विभागों में जाकर अपने मनमाफि क काम कमीशन लेकर कराता था। एक दो बार उसने जिले में तैनात अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों को भी अर्दब में लेने की कोशिश की थी।
‘साहब’ के साले से परेशान हैं होटल संचालक और थानेदार
अभिषेक की जालसाजी का भेद खुल कर सामने आ गया, लेकिन ऐसे ही कुछ और जालसाज भी हैं, जिनकी वजह से शहर के बड़े होटल संचालक और उस क्षेत्र के थानेदार परेशान हैं। खुद को पुलिस महकमे के एक वरिष्ठ अधिकारी का साला बताकर एक युवक अपने दोस्तों के साथ आए दिन होटलों में शराब और लजीज व्यंजनों की पार्टी करता है। मामला साहब के साले का होने के कारण होटल संचालक बिल के रुपये नहीं मांग पाते हैं और बाद में थानेदार को मामला रफ ादफ ा कराना पड़ता है। यही नहीं, वह लखनऊ में पुलिस महकमे के आला अफ सरों से करीबी संबंधों का हवाला देकर डिप्टी एसपी और एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की बात भी खुलेआम करता रहता है।
कुछ और भी मौखिक आदेश पर लेकर चल रहे हैं गनर
अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि कुछ और भी लोग हैं जो बिना लिखापढ़ी के ही मौखिक आदेश पर सरकारी गनर लेकर चल रहे हैं। इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि प्रतिसार निरीक्षक से गनर प्राप्त लोगों की सूची मंगवाई गई है। नियम विरुद्ध जिसके भी पास गनर होगा, उसे वापस कराया जाएगा। इस मामले में जिन भी पुलिसकर्मियों का दोष उजागर होगा, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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इंस्पेक्टर शिवपुर इंद्रभूषण सिंह यादव और दरोगा नरेंद्र कन्नौजिया गुरुवार रात शिवपुर चुंगी के पास मौजूद थे। इसी दौरान दरोगा नरेंद्र के मोबाइल पर फ ोन आया। फ ोन करने वाले ने खुद को राज्य सूचना आयोग का सदस्य अभिषेक मिश्रा बताया। अभिषेक ने कहा कि चोरी के आरोप में जिस युवक को शिवपुर पुलिस ने हिरासत में लिया है, उसे तत्काल छोड़ दिया जाए। इस पर इंस्पेक्टर शिवपुर ने अभिषेक को थाने पर बुलाया तो वह सरकारी गनर के साथ आया।
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इंस्पेक्टर को अभिषेक पर शक हुआ तो उन्होंने पूछताछ शुरू की और सूचना सीओ कैंट को दी। एएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि अभिषेक कभी खुद को राज्य सूचना आयोग का अध्यक्ष तो कभी सदस्य बता रहा था, लेकिन कोई कागजात नहीं दिखा पाया। लखनऊ से पूछताछ कराई गई तो फ र्जीवाड़े की पुष्टि हो गई। इस पर मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया और गनर को पुलिस लाइन भेज दिया गया। उधर, एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि एएसपी डॉ. अनिल कुमार जांच कर बताएंगे कि अभिषेक को गनर कैसे मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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छह महीने से लेकर चल रहा था गनर
नियमानुसार, डीएम, एसएसपी और सीओ एलआईयू की तीन सदस्यीय समिति सरकारी गनर देने के संबंध में निर्णय लेती है। इस समय जिले के 58 लोगों को गनर मिले हैं। लेकिन अभिषेक को बिना लिखापढ़ी के छह माह पहले पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक ने गनर दे दिया था। प्रतिसार निरीक्षक के अनुसार, अभिषेक खुद को ऊंची पहुंच वाला और राज्य सूचना आयोग का सदस्य बताता था तो उच्चाधिकारियों के मौखिक निर्देश पर गनर दे दिया।
वीडीए से लेकर आरटीओ तक गनर लेकर दिखाता था हनक
एएसपी डॉ. अनिल ने बताया कि गनर लेकर अभिषेक ने सरकारी विभागों में जबरदस्त हनक बनाई थी। गनर देखते ही उसे सरकारी विभागों के अधिकारी भी सम्मान देते थे। इस तरह से अभिषेक मिश्रा वीडीए, आरटीओ और जिला प्रशासन के विभागों में जाकर अपने मनमाफि क काम कमीशन लेकर कराता था। एक दो बार उसने जिले में तैनात अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों को भी अर्दब में लेने की कोशिश की थी।
‘साहब’ के साले से परेशान हैं होटल संचालक और थानेदार
अभिषेक की जालसाजी का भेद खुल कर सामने आ गया, लेकिन ऐसे ही कुछ और जालसाज भी हैं, जिनकी वजह से शहर के बड़े होटल संचालक और उस क्षेत्र के थानेदार परेशान हैं। खुद को पुलिस महकमे के एक वरिष्ठ अधिकारी का साला बताकर एक युवक अपने दोस्तों के साथ आए दिन होटलों में शराब और लजीज व्यंजनों की पार्टी करता है। मामला साहब के साले का होने के कारण होटल संचालक बिल के रुपये नहीं मांग पाते हैं और बाद में थानेदार को मामला रफ ादफ ा कराना पड़ता है। यही नहीं, वह लखनऊ में पुलिस महकमे के आला अफ सरों से करीबी संबंधों का हवाला देकर डिप्टी एसपी और एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की बात भी खुलेआम करता रहता है।
कुछ और भी मौखिक आदेश पर लेकर चल रहे हैं गनर
अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि कुछ और भी लोग हैं जो बिना लिखापढ़ी के ही मौखिक आदेश पर सरकारी गनर लेकर चल रहे हैं। इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि प्रतिसार निरीक्षक से गनर प्राप्त लोगों की सूची मंगवाई गई है। नियम विरुद्ध जिसके भी पास गनर होगा, उसे वापस कराया जाएगा। इस मामले में जिन भी पुलिसकर्मियों का दोष उजागर होगा, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।