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BHU कोवैक्सीन शोध मामला: बिना विभागाध्यक्ष की जानकारी के जोड़ा सदस्यों का नाम, आईसीएमआर को भेजा गया जवाब
Tue, 21 May 2024 12:16 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 21 May 2024 12:16 PM IST
सार
आईएमएस बीएचयू में कोवैक्सीन पर हुए शोध रिपोर्ट में विभागाध्यक्ष के जानकारी के बिना ही सदस्यों के नाम जोड़े गए हैं। आईएमएस बीएचयू के प्रोफेसर द्वारा शोध में बिना पूछे नाम देने पर महानिदेशक ने नोटिस दिया था। जिसका जवाब दिया गया है।
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IMS BHU
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आईएमएस बीएचयू में कोवैक्सीन पर हुए शोध रिपोर्ट में विभागाध्यक्ष की जानकारी के बिना ही सदस्यों के नाम जोड़े गए हैं। आईएमएस के कुछ विभागों में जब विभागाध्यक्ष के स्तर पर पड़ताल कराई गई तो पता चला कि उस समय विभाग में सीनियर रेजिडेंट का नाम शोध में जोड़ा गया है। जबकि इसकी जानकारी न तो विभागाध्यक्ष को और न ही किसी कंसल्टेंट को दी गई।
नियमानुसार कंसल्टेंट या विभागाध्यक्ष की जानकारी के बिना किसी तरह के शोध या स्टडी में नाम नहीं जोड़ा जा सकता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आईसीएमआर के अगले कदम पर टिकी हैं। आईएमएस बीएचयू जीरियाट्रिक विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसएस चक्रवर्ती और फार्माकोलॉजी विभाग की डॉ. उपिंदर कौर ने कोवैक्सीन के दुष्प्रभाव वाला शोध किया है।
आईएमएस के स्तर पर चल रही जांच में शोध रिपोर्ट में तथ्यों की कमी, जल्दबाजी में करने का जिक्र है। आईसीएमआर की ओर से शोध में बिना जानकारी आईसीएमआर का नाम देने पर नोटिस जारी किया गया है। नए मामले में वैक्सीन पर शोध की रिपोर्ट 2021 और फिर 2022 में भी प्रकाशित करवाई गई है। खास बात यह है कि हर बार अलग-अलग रिसर्च जर्नल्स को शामिल किया गया है।
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नियमानुसार कंसल्टेंट या विभागाध्यक्ष की जानकारी के बिना किसी तरह के शोध या स्टडी में नाम नहीं जोड़ा जा सकता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आईसीएमआर के अगले कदम पर टिकी हैं। आईएमएस बीएचयू जीरियाट्रिक विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसएस चक्रवर्ती और फार्माकोलॉजी विभाग की डॉ. उपिंदर कौर ने कोवैक्सीन के दुष्प्रभाव वाला शोध किया है।
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आईएमएस के स्तर पर चल रही जांच में शोध रिपोर्ट में तथ्यों की कमी, जल्दबाजी में करने का जिक्र है। आईसीएमआर की ओर से शोध में बिना जानकारी आईसीएमआर का नाम देने पर नोटिस जारी किया गया है। नए मामले में वैक्सीन पर शोध की रिपोर्ट 2021 और फिर 2022 में भी प्रकाशित करवाई गई है। खास बात यह है कि हर बार अलग-अलग रिसर्च जर्नल्स को शामिल किया गया है।
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2021 की रिपोर्ट में चार, 2022 की रिपोर्ट में 13 विभागों का नाम
वैक्सीन के दुष्प्रभावों के मामले में प्रो. चक्रवर्ती ने 2021 और 2022 में अलग-अलग शोध किया है। इसमें 6 जुलाई को रिसर्च पेपर स्वीकृत होने के बाद 23 जुलाई 2021 को यह ऑनलाइन भी दिखने लगा। इसमें जीरियाट्रिक मेडिसिन, फार्माकोलॉजी समेत चार विभागों का नाम शामिल हैं। इसके बाद 20 जुलाई 2022 को भी एक शोध का प्रकाशन कराया गया।
इसकी रिपोर्ट में 12 विभागों का नाम शामिल किया गया है। इसमें फार्माकोलॉजी, जीरियाट्रिक मेडिसिन, कम्यूनिटी मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, आईएमएस बीएचयू के कॉलेज आफ नर्सिंग, सेंटर फॉर बायोस्टेटिक्स, सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग, स्त्री एवं प्रसूति तंत्र आदि का नाम है।
इसकी रिपोर्ट में 12 विभागों का नाम शामिल किया गया है। इसमें फार्माकोलॉजी, जीरियाट्रिक मेडिसिन, कम्यूनिटी मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, आईएमएस बीएचयू के कॉलेज आफ नर्सिंग, सेंटर फॉर बायोस्टेटिक्स, सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग, स्त्री एवं प्रसूति तंत्र आदि का नाम है।
शोध में शामिल सदस्यों ने आईसीएमआर को भेजा जवाब
बीएचयू प्रशासन की ओर से बयान जारी किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि बीएचयू प्रशासन ने कोवैक्सीन के प्रभावों वाले अध्ययन का संज्ञान लिया है। इसमें आईएमएस के कुछ सदस्य शामिल हैं। आईएमएस प्रशासन इस मामले को देख रहा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अध्ययन में शामिल सदस्यों ने अपना जवाब आईसीएमआर को भेज दिया है।