वाराणसी: ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, इस दिन होगी सुनवाई
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ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण संबंधी मांग पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक की अदालत ने अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी और सुन्नी वक्फ बोर्ड की आपत्तियां खारिज कर दीं। अदालत ने कहा है कि मामले की सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योर्तिलिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण रडार तकनीक से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से कराने की मांग अदालत से की है। इसके विरोध में प्रतिवादी अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी व अन्य और सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ ने आपत्ति दाखिल की है।
मंगलवार को अंजुमन इंतजामियां कमेटी के अधिवक्ता एखलाक अहमद और सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता तौहीद खां ने हाईकोर्ट में प्रकरण लंबित होने और स्थगन आदेश की जानकारी अदालत को दी। कहा कि ऐसी स्थिति में इस अदालत को सुनवाई का अधिकार नहीं है। प्रकरण की सुनवाई स्थगित की जानी चाहिए।
उधर, याची अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने विपक्षियों की आपत्ति का विरोध किया। कहा कि हाईकोर्ट का स्थगन आदेश समाप्त होने के बाद सुनवाई आरंभ हुई है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी और सुन्नी वक्फ बोर्ड की आपत्तियां खारिज कर दीं। साथ ही अगली सुनवाई की तिथि 17 फरवरी निर्धारित कर दी।
क्या है मामला
एनशिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर (प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योर्तिलिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ ) व अन्य के पक्षकार पंडित सोमनाथ व्यास और अन्य ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं के पूजापाठ आदि के अधिकार को लेकर वर्ष 1991 में मुकदमा दायर किया था। उनकी ओर से कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का एक अंश है।
पंडित सोमनाथ की मृत्यु के बाद बीते साल दिसंबर में अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने वादमित्र के तौर पर अदालत में आवेदन दिया। अधिवक्ता की दलील है कि देश की आजादी के दिन ज्ञानवापी परिसर का धार्मिक स्वरूप मंदिर का था। उन्होंने अदालत से संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण रडार तकनीक से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से कराने की मांग की थी।