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बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर सहित 27 के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:02 PM IST
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चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह
- फोटो : file photo
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बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह, संपदा विभाग के लाल बाबू पटेल, प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संसार सिंह और 24 सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश सीजेएम जनार्दन प्रसाद यादव की कोर्ट ने लंका थानाध्यक्ष को दिया है।
कोर्ट ने यह आदेश नरिया निवासी आशीष कुमार सिंह के आवेदन पत्र पर दिया है। सभी 27 आरोपियों पर जान से मारने का प्रयास, दुकान में आग लगाने, मारपीट और धमकाने सहित अन्य आरोप हैं।
अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी के माध्यम से आशीष ने दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 23 मार्च को सीजेएम कोर्ट में आवेदन पत्र दाखिल किया था। आशीष का आरोप है कि सात मार्च को बीएचयू चीफ प्रॉक्टर सुरक्षाकर्मियों के साथ उनके घर में घुस गईं। इस दौरान उनके साथ मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।
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इसकी सूचना पुलिस को दी गई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 20 मार्च को चीफ प्रॉक्टर फिर उनके घर में सुरक्षाकर्मियों के साथ घुसीं। इस दौरान परिवार के लोगों के साथ गालीगलौज और मारपीट कर लकड़ी के टाल में आग लगा दी।
इसके बाद फायरिंग कर जान से मारने की कोशिश की गई। इस घटना की सूचना भी पुलिस को दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस वजह से न्यायालय की शरण में आना पड़ा।
मामले की सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने कहा कि बीएचयू चीफ प्रॉक्टर और सुरक्षाकर्मियों द्वारा किया गया कार्य उनके पदेन कर्तव्य की परिधि में नहीं आता है। इसलिए मामला दर्ज कर विवेचना किया जाना न्यायोचित है।
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कोर्ट ने यह आदेश नरिया निवासी आशीष कुमार सिंह के आवेदन पत्र पर दिया है। सभी 27 आरोपियों पर जान से मारने का प्रयास, दुकान में आग लगाने, मारपीट और धमकाने सहित अन्य आरोप हैं।
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अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी के माध्यम से आशीष ने दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 23 मार्च को सीजेएम कोर्ट में आवेदन पत्र दाखिल किया था। आशीष का आरोप है कि सात मार्च को बीएचयू चीफ प्रॉक्टर सुरक्षाकर्मियों के साथ उनके घर में घुस गईं। इस दौरान उनके साथ मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।
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इसकी सूचना पुलिस को दी गई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 20 मार्च को चीफ प्रॉक्टर फिर उनके घर में सुरक्षाकर्मियों के साथ घुसीं। इस दौरान परिवार के लोगों के साथ गालीगलौज और मारपीट कर लकड़ी के टाल में आग लगा दी।
इसके बाद फायरिंग कर जान से मारने की कोशिश की गई। इस घटना की सूचना भी पुलिस को दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस वजह से न्यायालय की शरण में आना पड़ा।
मामले की सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने कहा कि बीएचयू चीफ प्रॉक्टर और सुरक्षाकर्मियों द्वारा किया गया कार्य उनके पदेन कर्तव्य की परिधि में नहीं आता है। इसलिए मामला दर्ज कर विवेचना किया जाना न्यायोचित है।