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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Court Fought Arms Act case for 27 years received 15-day sentence 12 such verdicts delivered two years

अदालत: आर्म्स एक्ट में 27 साल केस लड़ा, मिली 15 दिन की सजा; दो साल में 12 फैसले इस तरह के आए

Sun, 06 Sep 2026 04:22 PM IST
Aman Vishwakarma रवि प्रकाश सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
रवि प्रकाश सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 06 Sep 2026 04:22 PM IST
सार

आर्म्स एक्ट के एक मामले में आरोपी ने करीब 27 साल तक मुकदमा लड़ा। दो साल में इस तरह के 12 फैसले सामने आए हैं। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 15 दिन की सजा सुनाई। फैसले के बाद मामले से जुड़े पक्षों में चर्चा रही।

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Court Fought Arms Act case for 27 years received 15-day sentence 12 such verdicts delivered two years
वाराणसी कोर्ट के मामले। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अपराध के बाद मुकदमा लंबा खिंच जाए तो इसका मतलब यह नहीं कि कानून की पकड़ खत्म हो गई। अदालत में वर्षों तक मुकदमा लड़ने के बाद भी दोष साबित होने पर आरोपी को सजा भुगतनी पड़ती है। 

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आर्म्स एक्ट के एक मामले में आरोपी ने 27 साल तक मुकदमा लड़ा, आखिरकार अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए 15 दिन के कारावास की सजा सुनाई। इसी तरह दो साल में 12 ऐसे मामलों में कोर्ट ने सजा सुनाई जो अपराध के सापेक्ष रहीं। दोषी को इस बात का भरोसा था कि मामूली अपराध है, लेकिन कोर्ट में लंबी बहस चली और सजा मिली। इस तरह की सजा उन अपराधियों के लिए भी संदेश है, जो मुकदमे के लंबा खिंचने को राहत समझते हैं। 

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पुलिस और अदालत से मिले आंकड़ों के अनुसार, बीते दो साल में 28 मामलों में दोषियों को कारावास की सजा सुनाई गई। पांच मामलों में दोषियों को 15 दिन से 45 दिन तक की सजा हुई, जबकि 8 मामलों में अदालत ने उन्हें जेल में बिताई गई अवधि के बराबर सजा सुनाई। कुछ मामले दो से पांच साल की सजा के भी रहे। कई मामलों में आरोपियों ने अपराध के बाद वर्षों तक अदालत की कार्यवाही का सामना किया और अंत में दोष सिद्ध होने पर सजा भुगतनी पड़ी।

सजा छोटी, लेकिन कानून की पकड़ बड़ी:  वरिष्ठ अधिवक्ता मंगलेश दूबे ने बताया कि अदालत से मिली कम अवधि की सजा को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। 15 दिन, 45 दिन या छह महीने की सजा होने का मतलब यह नहीं कि अपराध का कोई परिणाम नहीं हुआ। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत का फैसला आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनता है और उसे न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना ही पड़ता है। संदेश साफ है सजा की अवधि कम हो सकती है, लेकिन दोष सिद्ध होने के बाद अदालत का फैसला भुगतना पड़ता है। 

40 दोषियों को एक से पांच साल तक की हुई सजा: एक साल में 40 अभियुक्तों को एक से पांच साल की सजा पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते बीते साल 40 अभियुक्तों को अदालत ने सजा सुनाई। जिसमें एक साल से पांच साल तक की सजा मिली। जिसमें गंभीर अपराध भी शामिल रहें। 

तीन मामलों से समझिए अदालत का संदेश 

  • ताजा मामला कैंट थाना अंतर्गत साल 1999 में दर्ज आर्म्स एक्ट का है। जिसमें पुलिस ने धीरज कुमार उर्फ छोटू को पुलिस ने आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार किया। प्राथमिकी दर्ज की। केस लंबा चला। साल 2026 अगस्त में अदालत ने उसे 15 दिन साधारण कारावास की सजा सुनाई।
  • 18 साल पहले मंडुवाडीह पुलिस ने आर्म्स एक्ट में भोला सिंह को चेकिंग के दौरान पकड़ा था। प्राथमिकी दर्ज हुई। कोर्ट ने उसे जेल में बिताई गई अवधि की सजा सुनाई। 18 साल का समय कचहरी में बीता।
  • 15 साल पुराने चोलापुर के एक मामले में कोर्ट मामूली अपराध में महिला को सजा सुनाई। साथ ही जुर्माना भी लगाया।
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